अफ़सोस तो है कि, ना खत दे सका, ना पैगाम दे सका,
तोहफे में जिंदगी का एक पन्ना यादगिरी का ना दे सका।
चाहत मेरी किस्से में हिस्से की तरह दुनिया से लिप्त हो ऐसे जोड़ सका,
मेरी नियति का लिखा पन्ना फिर ना पढ़ सकू ऐसा मशवरा खुदा से भी माँग सका।
DEAR ZINDAGI 💞🌹