रोशनी उस लफ़्ज़ों पर डाली जा रही थी कोर्ट की कचेरी में,
जहा सिसक सिसक कर मर गया बेदर्द इश्क़ के फसाने में।
वो तौहीन लगा रहा जर्ज़ के सामने उसकी आदत के सैलाब में,
विटनेस गवाही दे रहा मुजे चरित्रहीन करने पर तुली दुनियाँ के अपमान में।
आज वो नहीं फिर भी सबूत क्या दू मेरे हिस्से में बटे दिन रात के उजाले में,
शायरी या भी बूरखा पहने चल रही, कोई ना समझा कलम से लिखी सच्चाई में।
DEAR ZINDAGI 💞🌹