उत्तराधिकारी
मुंबई में एक प्रसिद्ध उद्योगपति जो कि कई कारखानों के मालिक थे, अपने उत्तराधिकारी का चयन करना चाहते थे। उनकी तीन संताने थी, एक दिन उन्होने तीनों पुत्रों को बुलाकर एक मुठठी मिट्टी देकर कहा कि मैं देखना चाहता हॅँ कि तुम लोग इसका एक माह के अंदर क्या उपयोग करते हो।
एक माह के बाद जब पिताजी ने तीनों को बुलाया तो उन्होने अपने द्वारा किये गये कार्य का विवरण उन्हें दे दिया। सबसे पहले बड़े पुत्र ने बताया कि वह मिट्टी किसी काम की नही थी इसलिये मैनें उसे फिंकवा दिया। दूसरे पुत्र ने कहा कि मैंने सोचा कि इस मिट्टी में बीजारोपण करके पौधा उगाना श्रेष्ठ रहेगा। तीसरे और सबसे छोटे पुत्र ने कहा कि मैने गंभीरता पूर्वक मनन किया कि आपके द्वारा मिट्टी देने का कोई अर्थ अवश्य होगा इसलिये मैने तीन चार दिन विचार करने के पश्चात उस मिट्टी को प्रयोगशाला में भिजवा दिया जब परिणाम प्राप्त हुआ तो यह मालूम हुआ कि साधारण मिट्टी ना होकर फायर क्ले ( चीनी मिट्टी ) है जिसका औद्योगिक उपयोग किया जा सकता है। यह जानकर मैने इस पर आधारित कारखाना बनाने की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है।
उस उद्योगपति ने अपने तीसरे पुत्र की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा करते हुये उसे अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी बना दिया और उससे कहा कि मुझे विश्वास है कि तुम्हारे नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में हमारा व्यापार दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति करेगा। मेरा विश्वास है कि तुम जीवनपथ में सभी को साथ लेकर चलोगे और सफलता के उच्चतम शिखर पर पहुँचोगे। मेरा आशीर्वाद एवं शुभकामनाँए सदैव तुम्हारे साथ है।
बेटा एक बात जीवन में सदा ध्यान रखना कि जरूरी नही कोई बहुत छोटी चीज छोटी ही हो। मिट्टी का क्या मोल ? लेकिन तुम्हारी तीक्ष्ण बुद्धि और विचारशीलता ने मिट्टी में भी बहुत कुछ खोज लिया। जीवन में सफलता पाने के लिये यह आवश्यक है कि हम छोटी से छोटी चीज के अंदर समाहित विराटता को खोजने का प्रयत्न करें।