सुनो,
जानते हो मेरा एक बहुत छोटा ख़्वाब है..
तुम हो, मैं हूं और हमारा बहुत ख़ूबसूरत फूलों से भरा एक आशियाना..
चाहती हूँ.. किसी रोज हम मिलें।
तुम बातें करो, और मैं तुम्हें एकटक देखती रहूँ.. की तुम कितनी बातें करते हो।
किसी रोज चाँद की रोशनी में, तारों के नीचे, कॉफी के प्याले पकड़े हम अपनी बचपन से लेकर अब तक की सारी बातें, किस्से, घटनाएं बताएं..
कभी मैं, कभी तुम सब कुछ बताओ..
और इस तरह एक दूसरे को और करीब से जानें।
घर के किसी भी कोने या हिस्से में तुम बैठो जब,
तो मैं भी साथ में बैठे सकूं, तुम्हारे काँधे पर सर रखे,
तुम्हें महसूस करूं, तुम्हारी मौजूदगी को, तुम्हारे साथ को जीना है मुझे।
उस चारदीवारी में पूरे अधिकार से तुम्हारे साथ रहूँ और जब चाहूँ तुम्हारे हाथों को थाम सकूँ।
कहीं आईने के आगे बिखरा पड़ा हो मेरा सामान। अलमारी में हर तरफ तुम्हारे सामानों के बीच मेरा भी कुछ सामान हो।
घर के परदे मेरी पसंद के और दीवारों पर तुम्हारी पसन्द का रंग हो।
कहीं कुछ बिखरा भी हो , तो उस बिखरेपन में कुछ तुम बसे हो और कुछ मैं भी।
कोई डर नहीं, रोक-टोक नहीं।
केवल प्यार, विश्वास और अधिकार हो।
तुम में मुझे दिखे मेरा ही अक्स कहीं,
और मुझमें भी कुछ तुम्हारी झलक हो।
सबको खबर हो तुम सिर्फ मेरे हो,
और मैं बस तुम्हारी।
जैसे तुम मेरी पहचान बनो, और मैं तुम्हारी पहचान।
#सुनो #रूपकीबातें