**मीत मेरी
यादों की एक किताब है,
जीवन की सौगात है,
कुछ पन्ने नए, कुछ पुराने,
कुछ पन्ने फटे, कुछ सुहाने।
पलटती हूं पन्नों को,
ढूंढ़ती हूं अपनों को,
पाती हूं सपनों को।
खराब-फटे पन्ने देते हैं पानी,
सुनहरे पन्ने भी देते हैं नमीं,
पानी बरस नया सूरज लाता है,
नमीं भी नई ताज़गी भर जाता है।
पन्नों पर कुछ नाम अमिट हैं,
जीवन की वो मेरी मीत अटूट है,
यादें उनकी, किताब को कीमती बनाती है,
मीत मेरी, मुझे जीना सिखाती है।।
प्रीति