धुरी
"सुनो! आज हमारे बेटे का सपना पूरा हो गया।" दिवाकर अपनी पत्नी के साथ जलसे में शामिल होने दिल्ली आया था। यह गणतंत्र दिवस उसके लिए नयी खुशियां लेकर आया था, क्योंकि उसके इकलौते बेटे का चयन एयर फ़ोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में हो गया था।
"हाँ.. आपने पिताजी के विरोध के बाद भी बेटे को सहयोग किया, दोनों को समझाया तभी आज यह खुशी नसीब हुई।"
"सही कह रही हो किरण मेरे पिताजी एक कृषक हैं, वे हमेशा जमीन से जुड़े रहे, उनके लिए आकाश में उड़ने का सपना एक डर के समान था, शायद इसीलिए वे सहमत नहीं हुए थे।"
आसमान में लहराते तिरंगे को देखकर किरण फिर बोली.. "तिरंगे में नीचे हरा रंग हरियाली और सम्पन्नता का प्रतीक है, जो जमीन से जुड़े आपके पिताजी के श्रम को दर्शा रहा है और ऊपर केशरिया रंग शक्ति का प्रतीक है जो हमारे युवा बेटे की ऊर्जा को दर्शाते हुए आसमान में उड़ने की प्रबल इच्छाशक्ति दर्शा रहा है।"
"हमारे कृषि प्रधान देश के लिए किसान और सेना दोनों ही महत्वपूर्ण और सम्माननीय हैं और मुझे गर्व है कि मैं इनके बीच की कड़ी बन सका।"
"आपने सही सामंजस्य बनाया, इसीलिए पिता और पुत्र दोनों का हाथ पकड़कर घर में शांति स्थापित कर सके, और केसरिया और हरे रंग के बीच के सफेद रंग की तरह से दो पीढ़ियों को जोड़कर रखा।"
"उस सफेद पट्टी पर दिख रहे नीले चक्र को देखो, हम तीन रंगों की बात करते हैं, किन्तु गतिशीलता के प्रतीक उस चक्र पर ध्यान नहीं देते, किरण तुमने चौबीस घण्टे गतिशील रहते हुए मुझे जो सहयोग दिया यह उसी का प्रतिफल है।"
©डॉ वन्दना गुप्ता
मौलिक
(27/01/2019)