जीना करती है दुश्वार।
मरना करती है दुश्वार।।
उफ़ !ये मोहब्बत
उफ्फ! ये मोहब्बत।
पागल करती है दिन रात।
तारे गिनती है हर रात ।
चांद से मिलती है हर रात।।
मीठे सपने बुनती है
आंखे जगती हैं दिन रात
उफ्फ!ये मोहब्बत
उफ्फ!ये मोहब्बत
घायल करती हैं दिन रात।।
~✍️©निमिषा~