हम खुद एक अपना संविधान लिखेंगे
हिन्दू, सिख ईशाइ ना मुसलमान लिखेंगे
हम सब भारतीय हैं यही पहचान लिखेंगे
लोगों की भड़काउ बातों में ना आएंगे
हम लड़ेंगे नहीं दुश्मन जैसे
हम शान्ति का एक आवाम लिखेंगे
कभी गुरूद्वारे का लंगर
कभी मंदिर की घंटी
इशू से माफ़ी
तो कभी आज़ान लिखेंगे
हम खुद एक अपना संविधान लिखेंगे
जिन्दा रहेंगे देश की सेवा के खातिर
प्रहरी बन सुबह शाम रहेंगे
बाल भी बका ना होने देंगे तेरा
हम तुझपर ये अपनी जान लिखेंगे
हम एक अपना संविधान लिखेंगे
दोहराने नहीं देंगे वो इतिहास दोबारा
आने नहीं पयेगा कोई डलहौज़ी दोबरा
काटा गया था एक कलेजे का टुकड़ा
हम अखंड अपनी पहचान लिखेंगे
हम अपना एक संविधान लिखेंगे
जहाँ ना जाती पाती ऊच नीच
ना गोरे काले का भेद भाव
इस गंदी राजनीति से मुक्त अपना संसार बुनेगे
ये भारत माँ तुझपे हम अपना अभिमान लिखेंगे
हम एक अपना संविधान लिखेंगे...
Trisha....✍️