एक भूल कविता
कवि बनने को...
कविता चाहिए ;
कविता पिरोने को....
तूलिकाचाहिए ;
तूलिका को ...
एक रचना चाहिए ;
रचना को ....
एक दिमाग चाहिए ;
मगर दिमाग....
है....! कहां....!!!
दुनिया का ज्ञान ....
है .....! कहां.....!!!
फिर भी चली हूं .....
साहित्य में .....
योगदान करने.....!!!
अलंकार...छंद....तुकों....
को मिलाकर.....
एक और भूल करने...!!!
इस भूल से ही....
अगर कविता बन जाऊं....
तो ए...कविता ....!!!
तुझे में समर्पित हो जाऊं.....?
अंजना झँवर लाहोटी
फ्रीलांस राइटर
सूरत गुजरात