शाहीन बाग म है भंडारा ।नेता गण सब करैं पुकारा ।।
अय्यर आसिफ खान बुलाए ।भाषण भाँजन हित सब आए ।।
पाँच - पाँच सौ रुपया पाए ।जो नर नारी गए बुलाए ।।
दिल्ली पर करबै अधिकारा ।बिनु सत्ता न होय गुजारा ।।
करैं बकैती बिनु कछु सोचे ।आए नर - नारी बिनु कोंचे ।।
आजादी कय गावै गाना ।पशु जइसे बिनु पूँछ विषाना ।।
राजनीति कय गोरख धंधा। पडा़ रहा अबहीं भर मंदा ।।
सीएए कर करहिं बिरोधा ।सोचहिं जीतब बिनु अवरोधा ।।
अन्ना दादा केर जो चेला ।सी.एम बना खेल जो खेला ।।