संबल
श्रीमती ज्योतसना शर्मा उम्र 58 वर्ष, एक गृहणी है। वे कहती है कि जीवन एवं मृत्यु दोनो षब्द एक दूसरे के पूरक है। जीवन है तो मृत्यु भी अवश्यंभावी है, यही सत्य है और जो सत्य है, उससे भागना या डरना क्या ? किंतु एक सबसे बडी सच्चाई यह भी है कि जीवन एक बहुत सुंदर रचना है ईश्वर की। बहुत सुदृढ़ है, सशक्त हैं। यह एक संघर्ष है। छोटी बडी कठिनाईयाँ, परेशानियाँ तो लगी रहती है परंतु हँसते खिलखिलाते इन्हे पार करना ही तो जीवन है। जीवन में छोटी बडी बीमारियाँ भी आती जाती रहती है। आज कैंसर जैसी बीमारी भी अक्सर अपने आस पास ही सुनने को मिलती रहती है, जिसका नाम ज्यादा खतरनाक है इसे सुनते ही लोगों के होश फाख्ता हो जाते है क्योंकि लोग उसे जानलेवा या लाइलाज मान लेते है, पर वास्तविकता इससे अलग है।
मैं भी सन् 2004 में इससे रूबरू हुई। मई के महिने में मझे पता चला कि मैं ब्रेस्ट कैंसर सी पीडित हूँ, पर सचमुच मुझे न डर लगा, न कोई घबराहट हुई। परिवार वाले और आत्मीयजन अवश्य दुखी और विचलित हो गये। उन्हें देखकर थोडा सा दुख अवश्य होता था पर एक छिपी हुई गुप्त सच्चाई यही है कि मेरे जीवन के सबसे सुंदर दिन वही थे। पूरा इलाज एक तरफ और अपने लोगों की प्यार, चिंता, अपनापन और सहयोग एक तरफ। मुझे पता ही नही चला, मैं लगभग एक वर्ष में ही पूर्ण स्वस्थ्य हो गई। मुझे इस समय जीवन के और अधिक सुंदर पहलू दिखाई दिए।
ऐसे समय में अपना मनोबल बनाए रखना बहुत जरूरी है, आप जीवन का सुंदरतम रूप देख सकेंगे और मानसिक रूप से अधिक सबल हो सकेंगे। आपका जीवन किसी के लिए प्रेरणादायक बन जायेगा। मन में यह विश्वास अवश्य पक्का होना चाहिए कि जीवन मृत्यु किसी की मोहताज नही वह तो ईष्वर का दिया हुआ वरदान है, इसे डरकर नही हँसकर जीना है। इसलिए जहाँ जीवन सुंदर रचना है वहाँ यह भी मानना चाहिए कि मृत्यु भी ईश्वर का पावन निमंत्रण है। वह तो जब और जिस क्षण आना है तभी आएगी उससे पहले डर के कारण मर मर कर जीना तो जीवन को व्यर्थ गँवा देना है। वह तो जीवन नही है।
हर पल खुश रहकर खुशियाँ बाँटते हुए जीना ही सच्चा जीवन है। इसलिये किसी भी संकट या बीमारी में घबराए नही उसका हिम्मत के साथ हँसकर सामना करते चले, यही जीवन है।