चरण कमल पड़े जो, तेरे मेरी चौखट पे ,
घर संसार खिल उठा कमल के समान तेरे आगमन से ।
तूने जो बांध के रखा , हर रिश्ते को अपने आंचल से ,
घर-घर नहीं रहा मेरा ,बन गया स्वर्ग तेरे आगमन से ।
एक,एक सिक्का जोड़, तूने जो महल मेरा बनाया है ,
टूटी हुई झोपड़ी से मुझे महलों में बिठाया है ।
तू ग्रह की मेरे शोभा ही नहीं , तू स्थिरता की देवी है ,
गृह लक्ष्मी के रूप में मेरे संपूर्ण घर को बांध के रखती है ।
तू मेरी गृहालक्ष्मी ही नहीं मेरी महालक्ष्मी है ।।