गरीबी के नाम पर
सभी अमीरो को गाली देना छोड़ दे ,
अमीर बनने के लिए तू भी महेनत शुरू कर दे
सरकारी जमीन पर कब्ज़ा छोड़ दे ,
अपनी ज़मीर पर कब्ज़ा बना दे
सरकारी सहाय लेता हे तो अपनी पढाई पूरी कर दे
आयकर भरने वालो के पैसे हे ये समज ले ,
पढाई ख़तम हो तो ठीक वरना इन पैसो से मौज कर ले ,
ऐसा ख्याल दिमाग से निकल दे ,
कर भरने वालो पर ऐहसान कर दे
मुक्त का मकान लेने का ख्याल छोड़ दे
भाड़े के मकान में रहकर किराया देना शुरू दे
वक़्त आने पर अपने दम पे अपना का मकान ले ले ,
या फिर
अपनी नाकामियां छिपाने के लिए गरीबी का नाम लेना बंध कर दे
मेहनत करने वालो को हर तरह की मदद कर दे ,
किसान और मजदुर को इस दुनिया का सारा सुख दे दे
स्वाभिमानी लोगो को स्वाभिमान से जीने दे,
और कामचोरों को कुत्ते की मौत मरने दे
में एक परिवार की जिम्मेदारियां उठाकर ही चल रहा हु,
बाकी दो परिवार की जिम्मेदारियां थोपना बंध कर दे,
हो सकता हे कोई मजबूत इंसान आपके परिवार की मदद कर दे ,
लेकिन उस इंसान को मदद के लिए तू बार बार मजबूर मत कर दे
बच्चे पैदा करके उनका सारा जिम्मा सरकार पर छोड़ दे ,ऐसी घटीया सोच छोड़ दे
बेबाक सच बोलने के लिए जाना जाता हु ,
यदि शब्दो से बुरा लगा हे तो माफ़ कर दे
क़र्ज़ लेकर शादिया करनी बंध कर दे ,
चाय की चुस्की और पान की पिचकारी के साथ बड़ी बड़ी बाते करना बंध कर दे ,
घर बैठ कर मुक्त का सरकारी अनाज खाना बंध कर दे,
मेहनत कर और अपने घर को अनाज से भर दे
मेरे इन शब्दो को तू सिर्फ इस कागज़ पर मत रख दे,
इसे देश के संविधान के कागज़ में भी लिख दे
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893