मौत का आनंद
जब मौत आये तो ख़ुशी से झूम जाऊ
में जिस तरह अपनी मासूका से लिपट जाऊ
उसी तरह तुजमे भी सिमट जाऊ
तू सबको ले जाती हे
उस दिन में तुजे ले जाऊं
आ तुजे अपनी बाहो में कस के पकड़ लू
जिससे की न तू छूट पाए और न में भाग पाउ
एक और सच बताऊ में
तू ढूंढती आये उससे पहले आ जाऊंगा में
तू देखती रह जाएगी
और अपनी मंज़िल पर पहुंच जाऊंगा में
मुझे देखते ही मेरे प्यार में पड जाएगी
मुझे शादी के बंधन में बांधना चाहेगी
पर में ऐसा न करूँगा
क्योंकी उससे एक और मौत पैदा हो जाएगी
याद रख लेना
तू सिर्फ मेरी मासूका बनकर रेह जाएगी
और मुझे मेरे “वह” से मिला जाएगी
उस वक़्त में नाचूंगा और तू रोएगी
अपने आप पे शर्मिंदा हो जाएगी
और फिर मेरे पास कभी नहीं आएगी
तू अपने आप में सिमट जाएगी
और तेरी भी मौत हो जाएगी
मेरे शरीर से राख आएगी , जो शिव के काम आएगी
तेरे पास तो कुछ भी नहीं , तू क्या काम आएगी
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात
Mob.-9723989893