कुछ लोग राहों में यूँ मिल जाते हैं
अपने पराये में अंतर बताते हैं
जब भी खोते हम दुख के अंधेरों में
ये फरिश्ते उम्मीद की किरन जगाते हैं
काली अंधियारी रात के बाद ऊजियाली सुबह लाते हैं
सर्दी भरे दिन मे गुंगुनी सी धूप बन जाते हैं
जब भी रुकते हैं हम कभी भी घबराकर
मैं ह ना कहकर हिम्मत बड़ा जाते हैं
जीवन के हर मोड पे वो साथ निभाते हैं
कभी संग मे रोते कभी रूलाते हैं
सच्चे रिश्तो के रुप मे ये फरिश्ते
हमारे दोस्त कहलाते हैं