वो रूहानी रात के बाद,सुनहरे सवेरे में
चद्दर पर पड़ी गहरी सिलवट से मैंने पुछा,
"कहीं तुम बिख़र तो नहीं जाओगी?"
सिलवट ने मुस्कुराते हुए कहा,
"बनाया भी तुमने है,बिखेरोगे भी तुम"
मैंने कहा,"भला में ऐसा क्यों करूँगा?"
उसने कहा,"इंसानो की फ़ितरत यही है"
मैंने पुछा,"कहीं तुम बेवफा तो नहीं?"
वो बोली,"हम प्यार का मतलब ही नहीं जानते बेवफाई क्या करेंगे"
~अद्वैत