सुकून- ए -दिल , हासिल होता है मुश्किल ,
कहां - कहां राहगीर बन ढूंढू ,
किसी कूचे में या किसी रहगुज़र ।
ऐ - मेरे- मुकद्दर क्यों नहीं हासिल होता
मुझे झिलमिलाता अकीदत ।
क्यों तराजू में तोल रहे हो
मेरे कविश को इस कदर ।
रहमत कर इस कदर कि
मैं भी सुकून- ए -नींद पा सकूं इस सफ़र ।।