कैसे हम नववर्ष मनाएं ।
उत्साहित कैसे हो जांए ।।
दानव रूप बदल कर आया ।
कबतक मन तुझको समझाएं ।।
शान्त समय स्तब्ध हुआ है ।
सूर्य धरा से छुब्ध हुआ है ।
बुद्धि पराजित अफवाहों से ।
भीड़तंत्र की भेंट हुआ है ।
ज्ञानोदय कैसे कर पाएं ।
माना कि कुछ है सपने सा ।
लेकिन सुख यदि है अपने का ।
मर्म समझ कर अर्थ गढ़े हम ।
यदि संशय हो अनहोने का ।
बुद्धि शक्ति काहे बिसरायें ।।
विश्व गुरु की ओर चले हम ।
विश्व बंधु का पाठ पढ़े हम ।
गरल जलधि के भय से क्या ।
अमृत के न शब्द गढ़े हम ।
जग संग शांत राग हम गाएं ।।