बहुत रोशन कर लिया त्योहारों में अपने घरों को,
चलो इस बार मन के अंधेरे को दूर किया जाए,
आज तक बस सोचते ही तो रहें हैं के उजाला करेंगे,
क्यों न इस बार इसे पूरा जरूर किया जाए।
चलो इस बार मन के अंधेरे को दूर किया जाए,
छुपे है जो रावण और कंस मन के अँधेरे में ,
लिया है जिन्होंने तुम्हें अपने माया के घेरे में,
जो तुम्हें बाहर से अलग और अंदर से कोई और दिखाते हैं,
जो तुम्हारे अस्तित्व की नींव को खतरे में बताते हैं,
समय आ गया के इनके हौसले को चूर चूर किया जाए,
चलो इस बार मन के अंधेरे को दूर किया जाए।
~Tarak