बहुत दर्द से भरी ग़ज़ल को मैंने लिखा था।
यह सोच कर की वो जानकर मेरा दर्द,
आएगा मेरे पास भागा-भागा,
और कस कर मुझे गले लगा लेगा..
उसने ग़ज़ल को सुना और खूब रोया,
फिर बेतहाशा दौड़ गया, जाने किस ओर..
मैं भी भागी पीछे उसके, और देखा..
वो वही ग़ज़ल सुना रहा था बड़े दर्द भरे अंदाज़ में,
कुछ देर यूँही खड़ा रहा,
फिर चला गया..
वो लड़की भी अपने रास्ते चली गयी,
बिना कुछ कहे, बिना किसी दर्द के,
और बिना किसी शिकन के..
आज मालूम हुआ मुझे,
वो भी महसूस करता है मेरा दर्द,
बस कहता नहीं, जताता नहीं..
मुझे उससे मोहब्बत है,
उसे किसी और से,
फ़र्क इतना है, मैं सब कह देती हूँ उससे,
और वो कुछ बताता नहीं।
#रूपकीबातें