सात समंदर पार, चाँद का दीदार,
तुझे सलाम है नारी,
इक तू ही तो है, जिसके भरोसे जिंदा है,
हमारी सभ्यता प्यारी,
तुम्हीं होली दिवाली सारी खुशियों का खजाना हो,
तेरे आगे झुकी सृष्टि, तेरा भगवान आभारी।।
मैं हूँ तेरे लिए, तू है मेरे लिए,
प्रेम का तेल भरकर जलाये दिए,
तुझपे वारी हूँ मैं, ये दिल हारी हूँ मैं,
मरते दमतक समर्पण तुम्हारे लिए।।
-राकेश सागर