*"शिक्षा - जीवन का उजाला"*
कागज़ और कलम से रिश्ता जोड़े,
वो नाम है *शिक्षा* प्यारी।
अंधेरों को चीर कर निकले,
ज्ञान की वो उज्ज्वल तारी।
माँ की गोद पहली पाठशाला,
गुरु का आशीष पहला मंत्र।
"अ से अनार" से शुरू होकर,
"ज्ञ से ज्ञान" तक का ये तंत्र।
पंछी को मिले दो पंख जैसे,
वैसे ही इंसान को दो आँखें।
एक आँख से देखे संसार,
दूसरी से पढ़े किताबों की भाषा।
*शिक्षा* नहीं पूछती जात-पात,
*शिक्षा* नहीं देखती अमीर-गरीब।
झोपड़ी में बैठा लड़का भी,
बन सकता है देश का नसीब।
देखो सावित्री बाई फुले को,
जिन्होंने जलाया ज्ञान का दीप।
काँटे चुभे, पत्थर लगे,
फिर भी न मानीं हार, न कीं चूक।
देखो अब्दुल कलाम को,
मिसाइल मैन से राष्ट्रपति बने।
छोटे से रामेश्वरम से उठकर,
पूरे विश्व में नाम रोशन किए।
ये कमाल किसका है dear?
बस *शिक्षा* का, बस *ज्ञान* का।
जो झुक कर सीखता है,
वही एक दिन आसमान छूता है।
*शिक्षा* है राधा का प्रेम,
जो मीरा को भक्ति सिखाए।
*शिक्षा* है कृष्ण की गीता,
जो अर्जुन को कर्म का रास्ता दिखाए।
*शिक्षा* है माँ आदिशक्ति,
जो अज्ञान के राक्षस को मारे।
*शिक्षा* है जगन्नाथ की रसोई,
जहाँ सबको बराबर प्रसाद मिले।
आज मोबाइल का ज़माना है,
ऑनलाइन क्लास, डिजिटल ज्ञान।
पर गुरु का मान वही है,
विद्यार्थी का सम्मान वही है।
किताबें दोस्त बन जाती हैं,
लाइब्रेरी मंदिर लगती है।
हर सवाल का जवाब मिलता,
हर समस्या का हल दिखती है।
पर अफसोस, कुछ लोग आज भी,
गमंड में डूबे रहते हैं।
पढ़े-लिखे होकर भी,
दूसरों को छोटा समझते हैं।
अरे मूर्ख! *शिक्षा* का मतलब ही यही,
कि विनम्र बनो, सेवा करो।
जैसे नदी झुकती है तभी,
सागर तक पहुँच पाती है।
पेड़ जितना फलदार होता,
उतना ही झुक जाता है।
इंसान जितना ज्ञानी होता,
उतना ही विनम्र हो जाता है।
इसलिए dear, पढ़ो, लिखो, सीखो,
रुको मत, थको मत।
हर दिन एक नया सबक,
हर रात एक नया संकल्प।
देश तभी आगे बढ़ेगा,
जब हर बच्चा स्कूल जाएगा।
बेटी भी पढ़ेगी, बेटा भी पढ़ेगा,
तभी भारत विश्व गुरु कहलाएगा।
*शिक्षा* है वो हथियार,
जिससे गरीबी मिटती है।
*शिक्षा* है वो दवा,
जिससे कुरीति कटती है।
आओ प्रण लें आज हम,
ज्ञान का दीप जलाएँगे।
अपने लिए, अपने घर के लिए,
और पूरे समाज के लिए।
क्योंकि अंत में यही सच है:
*"सा विद्या या विमुक्तये"*
अर्थात - *वही विद्या है जो मुक्ति दिलाए*।
*जय जगन्नाथ* 🙏🌼
*राधे राधे* 🦚
---
*