मैं और मेरे अह्सास
झूम उठा मौसम
झूम उठा मौसम बारिस की बौछारें आई तो l
साथ अपने ढेर खुशियों की बहार छाई तो ll
वसंत आया, मन भाया झूम उठा मन मयूरा l
प्रकृति का रूप मनोरम बनाने बारिस लाई तो ll
हवाओं ने सरगम छेड़ी, कल- कल बहती है नदिया l
मोर नाचे, कोयल कूके, पपीहे ने रागिनी गाई तो ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह