तुम यूँ नहीं बंधे मुझसे
मानो किसी क्षणिक मोह में थाम लिया हो तुम्हें —
तुम तो मेरी श्वासों की लय में घुल गए हो,
मेरी धड़कनों की अंतरध्वनि बन गए हो।
अब यह संबंध देह का नहीं रहा,
यह आत्मा की शिराओं में बहता हुआ अनादि बंधन है।
प्राण भी यदि साथ छोड़ दें एक दिन,
तो भी मेरी रूह की देहरी पर
तुम्हारा नाम दीपक बन जलता रहेगा।
मैं तुम्हें मुक्त कैसे कर दूँ…
जब तुम मेरे अस्तित्व का ही दूसरा स्वर बन चुके हो।❣️