शीर्षक " सुमित बौद्ध जी "
मैं आपके लिए क्या लिखूँ, आप तो एक फूल हैं,
जिससे मिलते हैं, उसके जीवन में अपनी महक बिखेर देते हैं।
आप सुमित और सुहावन हैं, यूँ ही सबके दिल छू जाते हैं,
आँखों में अरमान लिए, निरंतर प्रगति के सफर पर चलते जाते हैं।
प्रकृति से दुआ है मेरी—मिले आपको आपके ख्वाबों का सफर,
आपके नाम की चमक से रोशन हो जाए सारा मैनपुरी नगर।
भाई-बहन के लिए चाँद और माता-पिता के कुल के दीप हैं आप,
अपने माली के आँगन में सदा खुशियों की लौ जलाए रखें आप।
राह में आए जो अंगारे, उन्हें अपनी शीतलता से बुझा देना,
उम्मीदों का, सद्भावना का, एक नया बीज लगा देना।
जब खिलें फूल, तो उसकी खुशबू हर किसी तक पहुँचा देना,
फूलों की सोहबत में रहकर, अपना चेहरा भी खिला देना।
मेरी यही कामना है कि संघर्षों के बीच भी आप मुस्कुराते रहें,
और काँटों भरे बागों में भी अपनी महक बिखेरते रहें।
कवि -एसटीडी मौर्य ✍️
कटनी मध्य प्रदेश
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