सिखलाता है, फुसलाता है मुझे,वो बातें भी बताता है बहुत
मेरे अंदर का एक आदमी मुझे,रोज़ रोज़ सताता है बहुत,
मगफिरत मिलेगी तेरी रूह को,जन्नत हासिल होगी तुझे,
दोस्त हो जैसे फरिश्तों का, ऐसे गुरुर दिखाता है बहुत
बहतर हूरें मिलेंगी,बाअदब पेश आ तेरी खिदमत में रहेंगी
पर न जाने क्या हैं वो,मेरी रूह की नूर से कतराता है बहुत
सुना है मैंने,ब़ंदगी से ही ब़ंदा पाता है,दीदार ए ख्वाब जिंदगी का
उसे ताबूत पे क्यूं नाज़ है, तुरबत की अहमियत बताता है बहुत
कहूं मेरे रोंगटे में मैंने देखा उसे,आंखो से पीया है दरिया उसका
ये जरिया वो आजमाता नहीं,मेरी मासूमियत से इतराता है बहुत
मिट्टी के मिलन की बात बोलूं,बादल के छींटें को साहेद रखकर,
बिजली के जो राज बताऊं,तो मुझे घूरकर बोखलाता है बहुत
कहूं,खुद को पाने में जो मज़ा है जेठा,वो जन्नत में हासिल नहीं होगी जाहीद
उसे,खुद का रास्ता पता न खुदको,पर वो ख़ुदा का रास्ता दिखलाता है बहुत
- jetha malde