जो मन को शांत ना कर सके,
कोई बात नहीं,
किन्तु मन को अशांत करे।
जो खुशी ना दे पाए कोई बात नहीं,
पर हृदय भीतर बोझ पैदा करे।
जो विवेक को मार दे,
या दयाभाव से दूर करे ,
उन्हें छोड़ देना ही हमारी बुद्धिमत्ता की पहचान होगी ।
फिर चाहे वो कर्म हो,
विचार हो या फिर,
कोई अपना व्यक्ति हो।
त्याग ही उचित है,
वरना हमें दुःख, दर्द ही मिलेगा।