🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
ये जो महफ़िल में, ज़ख्मों की
नुमाइश कर रहे हैं,
यकीनन ये मोहब्बत नहीं साज़िश
कर रहे हैं,
कहाँ मुमकिन है, सच को सिर्फ़
बातों से परखना,
लोग तो काबे में भी झूठ की
गुंजाइश कर रहे हैं,
खुले मंज़र पे जो रुमाल रखकर
रो रहे हैं,
वही पीठ पीछे मेरे कत्ल की
रंजिश कर रहे हैं,
वो जिनके अपने दामन पर लहू
के हैं सैकड़ों धब्बे,
वही अब मेरे किरदार की पैमाइश
कर रहे हैं,
अदालत चुप, गवाह चुप, मुंसिफों
के होंठ भी चुप,
मगर सब मिलके मुजरिम की
सिफारिश कर रहे हैं,
चरागों को बचाना, अब हवा के
बस में कहाँ है, कि
खुद घर के ही कोने अब तपिश
कर रहे हैं,
जिन्हें हक़ की सदाओं से, हमेशा
खौफ़ आता था,
वो अब सरे-आम सच की ही
नुमाइश कर रहे हैं…🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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