थॉमस एडिसन का अंधेरा: हजार असफलताओं की रौशनी
यह 1870 के दशक की बात है, जब न्यूयॉर्क की सड़कों पर गैस लैंपों की मद्धिम रौशनी ही रात का सहारा थी। इसी शहर की एक छोटी-सी प्रयोगशाला में थॉमस एडिसन नाम का एक व्यक्ति दिन-रात एक धुन में लगा रहता था। उसका सपना था, बिजली से जलने वाला ऐसा बल्ब बनाना जो हर घर को रोशन कर दे।
एक दिन शाम को, एडिसन अपनी प्रयोगशाला में तार और कांच के बल्बों के ढेर के बीच बैठा था। उसके सहायक, जेम्स, ने झुँझलाहट भरे स्वर में कहा, "थॉमस, हमने फिर कोशिश की, यह फिलामेंट भी टूट गया! यह हजारवीं बार है जब हम फेल हुए हैं।"
एडिसन ने मुस्कुराते हुए जेम्स की तरफ देखा। उसकी दाढ़ी पर कार्बन के निशान थे और आँखें नींद से लाल थीं, लेकिन चेहरे पर हार का कोई भाव नहीं था। "जेम्स," एडिसन ने कहा, "हम फेल नहीं हुए हैं। हमें बस यह पता चला है कि 999 ऐसे तरीके हैं जिनसे बल्ब नहीं जलता।"
जेम्स ने गहरी सांस ली, "लेकिन हम कब तक ऐसे ही प्रयोग करते रहेंगे? बाजार में लोग हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। वे कहते हैं, 'यह सनकी आदमी अंधेरे में रौशनी ढूंढ रहा है!'"
एडिसन उठ खड़ा हुआ। उसने एक पुराना टूटा हुआ फिलामेंट उठाया और उसे अपनी उंगलियों के बीच घुमाया। "जेम्स, इतिहास में कोई भी महान आविष्कार आसानी से नहीं हुआ है। क्या तुम्हें लगता है ग्राहम बेल ने एक बार में टेलीफोन बना दिया होगा? या राइट बंधुओं ने पहली उड़ान में ही सफलता पा ली होगी?"
"पर हमें आगे क्या करना चाहिए?" जेम्स ने पूछा।
"हमें सिर्फ एक बार सही तरीका खोजना है," एडिसन ने दृढ़ता से कहा, "एक बार। और जब हम उसे ढूंढ लेंगे, तो पूरी दुनिया रोशनी से जगमगा उठेगी।"
अगले कुछ हफ्तों तक, एडिसन ने हर संभव सामग्री पर प्रयोग किया। प्लैटिनम, लकड़ी के रेशे, धातु के तार—वह कुछ भी छोड़ने को तैयार नहीं था। उसकी टीम थक चुकी थी, लेकिन एडिसन का जुनून कम नहीं हुआ था।
एक रात, जब सब सो रहे थे, एडिसन को एक विचार आया। उसने बांस के बारीक रेशों को कार्बन से उपचारित किया। उसने अपनी धड़कनें रोके हुए उस फिलामेंट को बल्ब में लगाया और स्विच ऑन किया।
एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर, एक हल्की पीली रौशनी पूरे कमरे में फैल गई। वह रौशनी लगातार जलती रही—एक घंटे, दो घंटे, चार घंटे... चालीस घंटे तक!
जेम्स और बाकी सहायक दौड़ते हुए आए। उनकी आँखों में अविश्वास और खुशी के आँसू थे।
"हमने कर दिखाया!" जेम्स चिल्लाया।
एडिसन ने उस जलते हुए बल्ब को देखा, उसकी आँखों में गहरी संतुष्टि थी। "हाँ, जेम्स। हमने कर दिखाया। और इस बार हमें यह भी नहीं पता चला कि कितने और तरीके थे जिनसे यह काम नहीं करता।"
थॉमस एडिसन की इस जीत ने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। यह सिर्फ एक बल्ब का आविष्कार नहीं था, यह इस बात का प्रमाण था कि 'असफलता' सिर्फ एक कदम है सफलता की सीढ़ी पर, बशर्ते आप हार न मानें। उसका अंधेरा अब दुनिया की रौशनी बन चुका था