जिनके हाथों में कलम है वो जब सत्ता की चापलूसी करने लगे तब इंसाफ की आशा कम रखनी चाहिए।
एक लेखक, पत्रकार या फ़िर कवि कभी सत्ता से डरता नहीं है।
वह अपनी कलम से समाज की सच्चाई को उजागर करता है।
जो सही है उसकी सराहना भी करता है।
सत्ता की जनता के प्रति जो नाकामियों है वह बतलाता है, उनकी टीका करता है।
एक बलात्कारी को आसानी से बेल मिल जाती है
निर्दोषों को इंसाफ दिलाने में मां-बाप की जान निकल जाती है।
किसीने सही में कहां है कि कानून वो अमीरों द्वारा बनायीं गई ऐसी जाल है।
जिसमें गरीब लोग फंसकर तड़पते रहे और अमीर लोग पैसों के बल पर उन पर राज करे।