🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
{{विवशता की रस्म}}
वो खामोश खड़ी थी मजबूरियों
के घेरे में,
अपना सूरज ढूंढ रही थी, रिवाजों
के अंधेरे में,
उसने ओढ़ी थी जो चुनरी, वो
कफ़न था मेरी चाहत का,
अब रास्ता कोई बचा ही नहीं था
हम दोनों की राहत का,
न वो बेवफा थी, न मैं बागी था बस
किस्मत का लिखा, कुछ दागी था,
वो सिसक रही थी अंदर से, पर
बाहर खुशियाँ जारी थीं,
वो हार गई खुद से क्योंकि, उसे
अपनों की खुशियाँ प्यारी थीं,
वो मेहंदी नहीं थी हाथों में, मेरे
सपनों का जलना था,
उसे फूलों की राह पे चलना था
मुझे काँटों पे संभलना था,
अब कोई गिला नहीं उससे न ही
कोई मलाल है,
बिछड़ के जो मिला दर्द, बस वही
एक सवाल है,
अधूरे रह गए हम दोनों, पर ये रूह
का नाता है,
जो मिल न सके इस दुनिया में, वो
रूह में बस जाता है…🥀🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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