मैंने दो तरह की स्त्रियाँ देखी हैं…
एक तरफ वो…
जो दुखी है, इज़्ज़त नहीं मिली,
फिर भी संतुष्ट है,
क्योंकि उसने दर्द के साथ जीना सीख लिया है…
और दूसरी तरफ वो…
जिसके पास सोना-चांदी, पैसा, शान-शौकत सब है,
फिर भी मन खाली है,
क्योंकि संतोष चीज़ों से नहीं,
एहसासों से मिलता है…