" बदलता समय "
उसने अंगड़ाई ली
और बोली
मनजीत समय कितना बदल गया है।
मनजीत
हां रंजीता,समय बदल गया और समय के बदलाव के साथ तुम मेरी हो गई।
रंजीता
हां, लेकिन मेरे पतिदेव कब आयेगा पता नहीं है। चार दिनों के लिए गांव गये है। लेकिन उसका ठिकाना नहीं। मैं उससे थक चुकी हूं।
मनजीत
और हमारा पुराना प्यार फिर से जिंदा हो गया।
इतना कहकर मनजीत ने रंजीता को अपने बांहों में भर लिया।
रंजीता
तेरी बाहों में मुझे अपनापन लगता है।
- कौशिक Dave