शून्य से शून्य तक ✧
(चार सूत्रों में पूर्ण यात्रा)
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✧ सूत्र 1 — शून्य से जड़ तक ✧
“शून्य से प्रथम गति तेज़ प्रकट होता है।
तेज़ से आकाश जन्मता है,
आकाश से वायु चलती है,
वायु से अग्नि प्रकट होती है,
अग्नि से जल शांति पाता है,
और जल से पृथ्वी स्थिर होती है।
इसी क्रम से पंचतत्व और जड़ जगत का निर्माण हुआ।”
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✧ सूत्र 2 — जड़ से जीव ✧
“पृथ्वी पर जीव का निर्माण पंचतत्वों के संगम से हुआ।
आकाश ने चेतना दी,
वायु ने गति दी,
अग्नि ने ऊर्जा दी,
जल ने जीवन–रस दिया,
और पृथ्वी ने स्थायित्व दिया।
इन पाँचों के मिलन से ही जीव का पहला बीज अंकुरित हुआ,
जहाँ आत्मा पंचतत्वों में रूप लेकर जीवित अनुभव करती है।”
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✧ सूत्र 3 — जीव से मनुष्य ✧
“जीव एक यात्री है।
वह ८४ लाख योनियों से गुजरकर अनुभव एकत्र करता है।
सूक्ष्म से स्थूल,
जलचर से स्थलीय,
पशु से मनुष्य —
हर रूप केवल यात्रा का एक पड़ाव है।
मनुष्य इस यात्रा का शिखर है,
जहाँ आत्मा को स्वयं को पहचानने का अवसर मिलता है।
इसीलिए मानव जन्म को दुर्लभ कहा गया है।”
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✧ सूत्र 4 — मानव से शून्य तक ✧
“मानव की यात्रा जड़ से आत्मा तक है।
शरीर जड़ तत्वों का बना है,
मन ऊर्जा और विचारों का प्रवाह है,
और आत्मा मौन शून्य है।
जब मनुष्य इन तीनों को समझ लेता है,
तभी ईश्वर के द्वार खुलते हैं।
यात्रा का आरंभ शून्य से होता है,
और अंततः शून्य में ही उसका विलय होता है।
यही मुक्ति, यही मोक्ष है।”
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✍🏻 — 🙏🌸 अज्ञात अज्ञानी