✤┈SuNo ┤_★_🦋
यार क्यों ना हो सुबह मेरी पलकें भारी
रात भर तुम आँखों में जो रहती हो,
कहने को हम सोया करते हैं मगर रात
भर ख्वाबों में तुम आते जाते रहती हो,
हो कोई शराबी तो शराब को इल्जाम
दिया जाता है,
बन जाए कोई आशिक़ तो शबाब को
इल्जाम दिया जाता है,
गुलाब की दास्तां पूछे तो काँटों को
इल्जाम दिया जाता है,
कोई नहीं करता गुनाह क़ुबूल अपना
हो पलकें भारी तो ख्वाब को इल्जाम
दिया जाता है,
हकीकत में दीदार नसीब नहीं, ख्वाबों
में ही दीदार किया करते हैं,
हम वो दिलदार हैं जो हर पल महबूबा
के नाम का ही दम भरा करते हैं,
कसम खुदा की इन आँखों ने जब से
तेरा दीदार किया,
भूल से भी कभी इसने ना खुदा का
दीदार किया,
जब से तेरे कूचे में आ गए हम इन
नजरों को नजर आता ना और
कोई भी मंजर,
अब तो आख़िरि बस यही तमन्ना है
तेरे ही कूचे में जिएं मरे हम,
हो दम-ए-आख़िर और तेरा दीदार
करें हम, भले हों कब्र में,
खुदा से ले लें थोड़ी सी मोहलत और
तेरा इस्तिक़बाल करें हम..🔥
कूचे=मकानो के बीच छोटा रास्ता,
दम-ए-आख़िर=ज़िंदगी का आखिरी समय
इस्तिक़बाल=आदर-सत्कार, स्वागत,
╭─❀🥺⊰╯
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@LoVeAaShiQ_SinGh°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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