नमस्कार दोस्तो।
पता नहीं क्यूँ, सहनशीलता ने अब अपना जवाब दे दिया है।
कल जो कुछ हुआ शर्मनाक था।
इतना गुस्सा भरा हुआ है कल से कि दिमाग ने काम करना बन्द ही कर दिया है। अब अपना आक्रोश,, भावनाओं को जाहिर करने का कोई तरीका ही नहीं समझ आया तो अपने क्रोध का कुछ अंश शब्दों के द्वारा आप सभी के साथ साझा कर लिया। हो सकता है कि कुछ मित्र हमसे सहमत ना हो। सभी की अपनी सोच होती है,,,पर बात जब राष्ट्र के सम्मान की हो तब हम सभीको जाति,क्षेत्र,धर्म समुदाय से उपर उठकर एक साथ होना चाहिए । विश्व में बहुत हँसी हुई कल हमारी,,,जो हमें तो चैन से बैठने ही नहीं दे रही। कुछ फोटो मिले कल के,देखकर खून खौल रहा है,,पर कुछ कर नहीं सकते क्युंकि शांति का पाठ ही पढ़ा है बचपन से।
अन्त में हम कहना चाहते हैं कि हमारे शब्दों से जिस किसी को भी कष्ट हो या बुरा लगे तो ,,, ,,
हम माफी तो बिल्कुल नहीं मांगेगे,,,, जो कहना हो आप स्वतंत्र हैं कहते रहिये।
और हाँ,,,,,अपने क्रोध की ज्वाला यहीं शब्दों से ही शान्त करने की कोशिश कर रहे हैं,,,अगर साक्षात जाहिर करने का मौका मिले ना तो "आज़ाद" जी की जीवनी पढकर ही बड़े हुए हैं हम। और बहरों को सुनाने के लिए गाँधी जी नहीं भगत सिंह के विचार सही मानते हैं।
तो आप आ सकते हैं साक्षात।।।।।।
🇮🇳जय हिन्द🇮🇳