एक छोटा-सा बच्चा अपनी माँ के साथ भगवान की सुंदर मूर्ति घर लेकर आया।
उसकी आँखों में खुशी थी और मन में श्रद्धा।
माँ ने कहा—
“बेटा, हम भगवान को अपने घर प्रेम से लाते हैं, पूजा करते हैं और उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।”
बच्चा रोज़ भगवान के सामने हाथ जोड़ता और कहता—
“हे प्रभु, हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखना।”
कुछ दिनों बाद विसर्जन का समय आया।
बच्चे ने देखा कि कुछ लोग पूजा के बाद मूर्तियों को गंदे नाले और कचरे के पास छोड़ रहे थे।
वह उदास होकर माँ से बोला—
“माँ, जिन्हें हम इतनी श्रद्धा से घर लाए, पूजा की… क्या उन्हें ऐसे स्थान पर छोड़ना सही है?”
माँ ने प्यार से समझाया—
“नहीं बेटा। भगवान का सम्मान केवल पूजा करने में नहीं, बल्कि विसर्जन के समय भी हमारी जिम्मेदारी निभाने में है।”
बच्चे ने हाथ जोड़कर कहा—
“तो हम अपनी आस्था का अपमान नहीं करेंगे। मूर्ति का विसर्जन भी श्रद्धा और सम्मान से करेंगे।”
उस दिन से उस परिवार ने संकल्प लिया—
पूजा श्रद्धा से करेंगे, विसर्जन सम्मान से करेंगे और प्रकृति को भी स्वच्छ रखेंगे।
क्योंकि जिन भगवान को हम प्रेम से अपने घर लाते हैं,
उनकी विदाई भी प्रेम, श्रद्धा और सम्मान से होनी चाहिए।
🌺 अपनी संस्कृति का मान रखें।
अपनी आस्था का सम्मान करें।
🌊 विसर्जन जिम्मेदारी से करें।
सच्ची भक्ति वही है, जिसमें श्रद्धा के साथ संवेदना और जिम्मेदारी भी हो।