The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
हास्य व्यंग्य कविता :- भ्रष्ट शिशु ------------------------ होली में जनमा, एक नेता का बेटा मुसीबत बन गया, चैन से नहीं लेटा ! पैदा होते ही वह कमाल कर गया उठा, बैठा और नेता जी की कुर्सी पर चढ़ गया ! यह देखकर डॉक्टर घबरा गई बोली - ये तो अजूबा है, साईंस भी इसके सामने झूठा है । इसे पकड़ो और लिटाओ, दुधमुंहा शिशु है, मॉं का दूध पिलाओ । दूध के नाम पर शिशु ने फुर्ती दिखाई पास खड़ी नर्स की पकड़ी कलाई, बोला - आज होली है, ये कब काम आएगी काजू-बादाम की भंग अपने हाथों से पिलाएगी । नेता जी के समझाने पर भी वह नहीं माना, चींख-चींखकर अस्पताल सिर पर उठाया और गाने लगा, शीला का गाना । उसके बचपने में शीला की जवानी छा गई, मुन्नी बदनाम न हो इसलिए नर्स भंग की रिश्वत लेकर आ गई । बेटे को भंग पीता देख नेता जी घबरा गए, बोले - तुम कौन हो और क्यों कर रहे हो अत्याचार ? शिशु बोला - तुम्हारी ही औलाद हूं नाम है भ्रष्टाचार.... । @ राकेश सोहम्
अब किस बात की दूं दुहाई और तुम्हें मना लूं भटका हुआ हूं मैं खुद पहले खुद को पा लूं। @ राकेश सोहम् #भटकना
अब चुंबन से डर नहीं लगता साहब, कोरोनावायरस से लगता है @ एक चुंबन दबंगई #चुंबन
उन्होंने आजादी का जश्न कुछ यों मनाया, घर के सारे काम और खाना पति से बनवाया ! @ राकेश सोहम् #Freedom
मेरी एक ख़ूबसूरत कविता। @ राकेश सोहम्
कविता : राकेश सोहम् भरोसा --------- कलम का कविता पर और कविता का भरोसे पर अटक जाना, समय की विडंबना है ! कलम कातिल है और कसाई भी ? अब कलम की ताकत संदेहास्पद हो गई है ! # राकेश सोहम्
Copyright © 2025, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser