Quotes by Satveer Singh in Bitesapp read free

Satveer Singh

Satveer Singh

@satveersingh.781057
(3k)

अधर मौन रहे, नयन बोलते रहें।
था हृदय की थाह में जो,
नयन उसका भेद खोलते रहें।

Instagram👉 satveer_si001

लबों पर लफ्ज़ ठहर जानें से इश्क़ नहीं रुकता।
आँखें बयाँ कर देती है हाल-ए-जिगर का।।

सत्यवीर सिंह जेतुंग

सत्यवीर सिंह जेतुंग

सत्यवीर सिंह जेतुंग

- सत्यवीर सिंह जेतुंग

सत्यवीर सिंह जेतुंग

- सत्यवीर सिंह जेतुंग

|| प्रेम का सामर्थ्य ||

बंध जाते हैं सिंधु सेतुओं से,
पत्थर पानी में भी तिर जाते हैं।
हो यदि सामर्थ्य प्रेम में,
तो बंदर भी सेतु बनाते हैं।

विष फिर विवश हो जाता है।
ज्यों गरल मीरा के समुख आता है।
यदि हो सामर्थ्य प्रेम में,
शक्तिहीन हो सुधा बन जाता है।

न रुकता अंतक, मृत्यु अटल है।
फिर न जीवन है, न कल है।
हो यदि सामर्थ्य प्रेम में
यम के समुख खड़ा हो जाता है।
मृत्यु से भी बड़ा हो जाता है

Read More

खेत-खलिहान, बाग-मेदान,
उपजाऊ भूमि- साफ आसमान
और गोबर की दिवार- पड़ोस की काकी का कच्चा मकान। सब बदलता जा रहा है।
शायद शहर गाँव की ओर आ रहा है।

कभी शमी पर कोयल गाती थी।
भोर में मोरों की एक टोली आती थी।
बाग में इमली लग जाती थी।
रात में नानी लोरी सुनाती थी।
अब कहाँ है यह सब?
अब तो यह सब छुटता जा रहा है,
शायद शहर गाँव की ओर आ रहा है।

-सत्यवीर सिंह

Read More