The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
खामोशी अक्सर उन सवालों का जवाब होती है, जिनके जवाब शब्दों में नहीं मिलते। ज़िंदगी वही सिखाती है, जो किताबों में कभी लिखा ही नहीं होता। कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में सबक बनकर आते हैं, और कुछ पूरी कहानी बन जाते हैं। जिस दिन इंसान खुद को समझ लेता है, उस दिन दुनिया की आधी उलझनें खत्म हो जाती हैं। 🌙 - kajal jha
: ख़ामोशी अक्सर सबसे तेज़ आवाज़ होती है, बस उसे सुनने वाला कोई अपना होना चाहिए। इंसान की असलियत तब सामने आती है जब उसके पास पावर हो या उसका वक्त खराब हो। समंदर की गहराई और इंसान के दिल की गहराई को मापना असंभव है, दोनों ही कई राज़ दफन किए होते हैं। सुकून की तलाश में हम पूरी दुनिया छान मारते हैं, जबकि वो हमारे भीतर की स्थिरता में छुपा होता है। - kajal jha
खामोशी में भी एक आवाज़ होती है, जो हर कोई सुन नहीं पाता। कुछ दर्द ऐसे होते हैं ज़िंदगी में, जो इंसान हँसकर भी छुपा जाता है। ✨ - kajal jha
खामोशी अक्सर वो कह देती है, जो शब्द उम्रभर नहीं कह पाते। कुछ रिश्ते किस्मत से नहीं, सब्र और सच्चाई से निभाए जाते। - kajal jha
अबीर उड़ता है तो अहंकार भी उड़ जाना चाहिए, गुलाल लगे तो दिल भी मिल जाना चाहिए। होली सिर्फ त्योहार नहीं, रिश्तों को फिर से जीने का बहाना है। रंग तो एक दिन में धुल जाते हैं, पर शब्दों के दाग सालों तक रहते हैं। इस होली सिर्फ चेहरा नहीं, अपना व्यवहार भी रंगीन कर लेना।
कभी-कभी इंसान इसलिए नहीं टूटता कि उसके पास कोई नहीं होता, बल्कि इसलिए टूटता है कि जिस पर भरोसा होता है, वही बदल जाता है। सच तो ये है कि दर्द आवाज़ नहीं करता, वो बस चुपचाप दिल में घर बना लेता है। 💔 - kajal jha
रिश्ते हैं किताबों की तरह, कुछ पल में पढ़े जाते, कुछ जीवनभर दिल में बस जाते हैं। जो समझ पाए उसे ही मिलती सच्ची दोस्ती, वरना हर चेहरा सिर्फ़ दिखता है एक परछाई की तर - kajal jha
“मैं अभी बाकी हूँ” भीड़ भरे इस शहर में, मैंने अक्सर खुद को खोया है, चेहरों की इस मेला-धूप में मन को तन्हा ही रोया है। हँसी ओढ़कर निकली थी घर से, आँखों में सावन छिपाए हुए, सबको अपना दर्द सुनाया, पर अपने ज़ख्म दबाए हुए। रिश्तों की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते कितनी बार फिसली हूँ मैं, सबकी ख़्वाहिश पूरी करते खुद से ही बिछड़ी हूँ मैं। आईने ने जब सच बोला, दिल थोड़ा-सा काँप गया, “तू थक गई है अब मान भी ले,” अंदर कोई चीख गया। पर हार मानना फितरत में नहीं, टूटकर भी जुड़ जाती हूँ, रात अगर सौ बार गिराए, सुबह बनकर उठ जाती हूँ। मैंने सीखा है अंधेरों से रोशनी खुद जलानी है, कदम डगमगाएँ चाहे जितना, राह नई बनानी है। लोग कहेंगे — “बहुत बदली है,” हाँ, मैं अब वैसी नहीं रही, जो हर बात पे चुप रह जाती, अब वो खामोशी नहीं रही। अब शब्द मेरे हथियार बने हैं, सपने मेरी ढाल हुए, आँसू जो कल तक कमज़ोरी थे, आज वही कमाल हुए। मैंने दर्द को दोस्त बनाया, उससे जीना सीखा है, जिसने दिल को तोड़ दिया था, उसी से हँसना सीखा है। हाँ, कुछ रिश्ते छूट गए पीछे, कुछ रास्ते अनजाने हैं, पर जो मेरे अपने थे ही नहीं, उनके क्या अफसाने हैं। मैं अब खुद की आवाज़ बनूँगी, भीतर की आग जलाऊँगी, जो मुझको कमज़ोर समझेगा, उसे अपना सच दिखलाऊँगी। मैं नदी हूँ, रुकना क्या जानूँ, पत्थर भी रास्ता देंगे, मैं सपना हूँ, अधूरा सही, एक दिन पंख लगा लेंगे। तुम देखना, ये वक़्त गवाह होगा, मैं फिर से मुस्कुराऊँगी, टूटी हुई नहीं, मज़बूत बनकर अपनी पहचान बनाऊँगी। क्योंकि कहानी अभी खत्म नहीं, अधूरा सा एक मुकाम हूँ, गिरकर भी जो खड़ी हुई है — हाँ, मैं वही इंसान हूँ। मैं हार नहीं, शुरुआत हूँ, मैं अंत नहीं, उड़ान हूँ, जो खुद से फिर मिल आई है — मैं अभी बाकी हूँ… हाँ, मैं अभी बाकी हूँ।
कभी खुद से भी मिल लिया करो, थोड़ा अपने साथ भी जिया करो। भीड़ की आवाज़ों में क्या रखा है, कभी अपनी खामोशी भी सुना करो। दुनिया को खुश करते-करते थक सा जाता है ये दिल, सबकी मुस्कान बनते-बनते क्यों छुपा लेते हो अपना ही ग़म हर पल। रुक जाओ कभी ज़रा, आईने से बात कर लिया करो, दुनिया बाद में भी मिल जाएगी, पहले खुद को समझ लिया करो। क्योंकि सच यही है— जो इंसान खुद से दूर हो जाता है, वो पूरी दुनिया के पास होकर भी अंदर से बहुत अकेला रह जाता है। - kajal jha
खामोशी में भी एक आवाज़ होती है, जो दिल तक पहुँच जाती है। हर मुस्कान खुशी नहीं होती, कुछ दर्द भी छुपा जाती है। - kajal jha
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser