Quotes by Dr Darshita Babubhai Shah in Bitesapp read free

Dr Darshita Babubhai Shah

Dr Darshita Babubhai Shah Matrubharti Verified

@dbshah2001yahoo.com
(1.6m)

मैं और मेरे अह्सास

संगदिल
में कहां कभी किसीका एहसान रखता हूँ l
बात सीधी लगती है पर सच्ची कहता हूँ ll

बेपनाह बेहिसाब इश्क़ हो गया कब से l
संगदिल सनम से मोहब्बत करता हूँ ll

में एक तरफ़ा प्यार युगों युगों करके l
रोज सुबह शाम ठंडी आहे भरता हूँ ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

जिंदगी
जिंदगी के राज बोले क्या l
पटारा दिल का खोले क्या ll

थोड़ी सी खुशी के लिए l
आस्तीन को छोले क्या ll

कहो तो तुम्हारी खुशी को l
पूराने जख्मों फोले क्या ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

जिंदगी
जिंदगी की अहमियत को समझा ही नहीं l
गहराईयाँ औ बारीकी को जाना ही नहीं ll

सहरा में रेत फ़िसलती वैसे ही जिंदगी गई l
रात दिन वक्त का हिसाब पहचाना ही नहीं ll

कुछ अपनी कुछ अपनों के लिए गुजरी कि l
प्यार को नशीले लम्हों से सजाया ही नहीं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

प्यार
सीतमगर से प्यार किया l
दिल को यू बेकरार किया ll

नया बहाना सुनाता फिर भी l
हर बात पे एतबार किया ll

झूठी उम्मीदे दे संगदिल ने l
अश्क़ देके खुशगवार किया ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

इंतजार
एक पल तुम्हें देखे बिना गुजारा भी नहीं l
तुम्हारे बिना दूसरा मेरा सहारा भी नहीं ll

एक हम है सारी दयार को ठुकरा दिया l
एक तुम हो की रिश्ता निभाया भी नहीं ll

तेरी कायनात मेंने खुशबुओ से महका दी l
तुने एक गुल आंगन मेरे सजाया भी नहीं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

मोहब्बत
बे-मिजाज़ दिल फेंक से मोहब्बत है तो हैं l
प्यार में इंतजार ही मेरी किस्मत है तो हैं ll

में नहीं चाहती सदा पास मेरे बेठा रहे वो l
प्यारी नशीली यादों की सौगात है तो हैं ll

ताउम्र साथ निभाने के लिए हाथ पकड़ा है l
दुनिया चाहे इसे समझे बग़ावत है तो हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

दोस्त
दोस्त की खास जगह होती है दिल की कहानी
में l
यारों के साथ करते रह्ते है मटरगश्ती जवानी में ll

अज़ीब सा सुकून मिलता दो लम्हों के साथ में l
कोई तो कशिश होती होगी रिश्तों की रुहानी में ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

रुहानी
रुहानी सुकुन मिलता है तेरे दीदार से l
आज एक नजर देख भी लो प्यार से ll

भूले से भी दूर जाने का नाम ना ले ओ l
समाने बेठा रहे यहीं ख्वाइश यार से ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

सफ़र
हमनवाज़ के साथ सफ़र में जाने को जी चाहता हैं l
खूबसूरती पलों के अह्सास पाने को जी
चाहता हैं ll

कुछ खिंचे खिंचे से रहते है दिल में रहने
वाले की l
हमसफ़र को और नजदीक लाने को जी
चाहता हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

अंजाम
मोहब्बत में अंजाम बिछड़ने का नसीब था l
उतनी दूर चला गया जीतना ही करीब था ll

दुनिया में मुकम्मल नाम दाम कमाया हुआ l
अमीरजादा दिलों दिमाग से भी गरीब था ll

मिलना बिछड़ना इत्तिफ़ाक़ होता है कि l
जैसा भी था फिर भी वो ही हबीब था ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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