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मेरे गुज़रे हुए कल को ,, मेरे आनेवाले कल को ,, जो संवारा है तूने ,, मेरे हर ज़ख्म को ,, मेरे हर दर्द को ,,, जो सराहा है तूने,, कि डूब जाऊं जब मैं अंधेरे आसमां के आशियाने में ,,, तो मुझे छुपा लेना अपनी गोद में ,,,, ए - ज़िन्दगी।।।।।।
गुड़ियों के बाज़ार में ,,,एक मजबूर गरीब बाप ने अपनी बेटी नीलम कर दी।।।। और सौदागरों ने उसकी कीमत लगाकर उसे खरीद भी लिया।।
मासूम सी है ,,,,, और नादान भी उम्मीदें ही तो है ,,,,,, बिखरती भी है ,, संभलती भी है,, गिरती भी हैं और संवरती भी है,,, हर रोज़ टूटती भी हैं ,, उम्मीदे ही तो है ,,,, कभी पहाड़ सी ऊंची तो कभी गहराइयों को नापती,,, बनती भी हैं और बिगड़ती भी हैं।।।।
हमारे भी कई ख्वाब थे ,,, उन बच्चों की तरह,,, जिनका बचपन खिलौनों के बीच गुजरता है,,, और हम गुजार देते है बचपन दूसरों की गुलामी में,, वे स्कूल जाते हैं ,,,,पर हम सिर्फ़ उन्हें जाते हुए देख पाते हैं।।।।। हम भी कोमल है ,,छोटे हैं और नादान भी ।।।। पर हमारे हाथों को बजन की आदत है।।। वे जाते हैं मंहगे होटलों में खाने , और हम वहीं काम करते है ।।। वे जाते है शॉपिंग माल्स घूमने को ,,,और हम बस दिल में ख्वाब रखते हैं।।। वे सोते हैं मखमली चादरों में ,,,और हम पर नहीं है ठंड से तन बचाने को।।।।। वे देखते हैं सपने ऊंची इमारतों का ,,, हम ढूंढते ही छत सर छुपाने को ।।।। वे घूमते हैं बड़ी गाड़ियों के भीतर ,,,और हम बाहर खड़े कपड़ा मारते है ।।।।। ख़्वाब तो हमारे भी हैं ,,,, ज़िन्दगी बेहतर बनाने के ,, पर फर्क इतना सा है बस ,,, वे चाहते है बड़े अफसर बनना ,,,और हम सोचते है हर वक़्त गरीबी को हराने का।।।।।।।।।।
दर्द की धुन पर यूहीं थिरकती रही ज़िन्दगी ,,, ना धुन बदली ,,,और ना थकी ज़िन्दगी।।।।
था कभी मुस्कुराहटों से मिलना जुलना,,, अब तो हसने वाली बातें हंसा देती हैं,, और रोने वाली बातें रुला देती हैं ।
संजोया है हर लम्हे को मैंने अपनी लिखावट में ,, कभी वक़्त मिले तो हमें भी पढ़ लिया करो।।।।
ख़ामोश सी कविता हूं,,, बस मुझे जोर से पढ़ने का गुनाह मत करना ,,, आवाज़ बेशक दवी है मेरी ,,, पर जो तुमने शोर मचाया तो चीखना मुझे भी आता है।।।
मुझे ज़िन्दगी का इतना ताजुर्बा हो नहीं है लेकिन इतना ज़रूर जानती हूं ,,, इंसान की सबसे प्यारी चीज़ उसके पास हमेशा नहीं रहती ।।। हैं वो बात अलग है यादें बनाने के मौके मिलते रहते हैं।।।
आज आईना बोला मुझसे ,, मैंने अरसों बाद देखा है तुझे ,,, मैंने भी कह दिया मुझे बरसों हो गए खुद से मिले हुए ।।।
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