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Amal das

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@amaldas9614


निर्देशहीन सृष्टि

ईश्वर सच में एक बच्चा है,
जिसने अनंत शून्य में
एक सफ़ेद काग़ज़ उठाया।
उसके हाथों में थे
बहुत सारे रंग,
स्याही से भरे कलम,
और उनकी शक्ति को काग़ज़ में उतारा।
और एक मासूम बच्चे की तरह,
बिना किसी योजना,
बिना किसी डर,
वह इस ब्रह्मांड को
बस बनाता चला गया।
कहीं उसने आकाश बना दिया,
कहीं समुद्र की गहराई,
कहीं मनुष्य को,
कहीं प्रेम,
कहीं पीड़ा,
कहीं मृत्यु।
उसे खुद भी नहीं पता था
आख़िर में वह क्या बना रहा है।
वह तो बस खेल रहा था।
क्या उसके लिए यह बस
एक आनंद का विषय था?
क्या यह सृष्टि
सिर्फ़ एक निरुद्देश्य है?
मेरे हिसाब से वह कुछ भी नहीं जानता था—
न अच्छाई, न बुराई,
न लक्ष्य, न अंत।
वह बस बनाता चला गया,
जैसे बच्चा खेलता है
और मुस्कुराकर भूल जाता है
कि उसने क्या खेल रहा है।
और हम—
उसकी उसी मासूम ड्रॉइंग के अंदर
अपने अर्थ खोजते चले गए।

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সুখৰ মোহনীয়

বিশ্বব্ৰহ্মাণ্ড খন মায়াৰে ভৰা
নানা‌ মায়াৰে আমি আপোনপাহৰা হৈ আছো
প্ৰকূতিৰ এই যে প্ৰেমৰ মায়া অনন্ত
এই মায়াত পৰি নিজৰ অস্তিত্ব হেৰুৱালু |


মই মোৰ নিজৰ কাম কি?
মই মোক নিজকে জনা উচিত |
প্ৰকূতিৰ মোহনীয় প্ৰেম
সকলো জীৱৰ ক্ষেত্ৰত নিজে নিজে আহে |

মই ইয়াত কোনো জীৱৰ প্ৰেম নথকাৰ কথা কোৱা নাই
মই মোৰ বাবে কোন ?
মই কিনো কৰি আছো
এইবোৰ আমাক সকলোকে কোনটো দিশৰ পৰা জাগ্ৰিত কৰি আছে ?

প্ৰকূতিৰ প্ৰেমত মই নিজকে নিজে
যিমান কাষ চপাইছিলো
মই লাহে লাহে দুখৰ যে কিমান
গভীৰ পৰা গভীৰ সুখ
উপলদ্বি কৰিব পাৰিছো |

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