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Alka rahul Aggarwal

Alka rahul Aggarwal

@alkaaggarwal126584
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रुद्र और श्रेया की शादी हो चुकी थी। शादी में आए गेस्ट और मीडिया वाले सभी रुद्र की पत्नी का चेहरा देखना चाहते थे।

अवंतिका श्रेया के पास आती है और उसका घुंघट उठाने लगती है। श्रेया की घबराहट बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। वो अपने कपड़े को अपनी मुट्ठी से कसकर टाइट पकड़ लेती है।

अवंतिका जैसे ही श्रेया का घुंघट उठाती है ,तो वो श्रेया का चेहरा देखकर चौक जाती है। वही रुद्र भी श्रेया को हैरानी से देख रहा था। वहां मौजूद जितने भी वीआईपी गेस्ट थे और मीडिया वाले थे वो सब पहली बार श्रेया को देख रहे थे। मीडिया वाले श्रेया की तस्वीरें लेने लगते हैं। श्रेया चुपचाप अपनी नजरें झुकाए खड़ी थी ,उसे बहुत घबराहट हो रही थी।

रूद्र फिर श्रेया का हाथ कसकर पकड़कर दबा देता है जिससे श्रेया को हल्का दर्द महसूस होता है। वो अपनी आंखें बंद कर लेती है।

रुद्र अपने होठों पर फेक स्माइल लिए सारे मीडिया वालों की तरफ देखकर बोलता है-"ये है मेरी पत्नी मिसेस रूद्र प्रताप सिंह।"

धीरे-धीरे गेस्ट और मीडिया वाले मेंशन से चले जाते, उनके जाने के बाद रुद्र श्रेया का हाथ पकड़कर उसे खींचता हुआ अपने कमरे में ले जाकर बैड पर धक्का दे देता है। अवंतिका जी भी उनके पीछे आती है।

रूद्र गुस्से में उस पर चिल्लाते हुए बोलता है -"कौन हो तुम और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शादी का जोड़ा पहनकर मुझसे शादी करने की, नव्या कहां है?"

श्रेया के मुंह से आवाज नहीं निकल रहा था। उसकी आंखों से लगातार आंसू गिर रहे थे।

रूद्र ये देखकर उसका बाजू पकड़कर अपने दांत पीसते हुये बोलता है-"तुम्हे मेरी बात सुनाई दे रही है या नहीं या मैं पुलिस को बुलाऊ अगर पुलिस यहां आ गई ना, तो तुम सोच भी नहीं सकती तुम्हारे साथ क्या होगा ,कहां है नव्या?"

श्रेया रुद्र की बात सुनकर बहुत घबरा जाती है। वो रोते हुये बोलती है-" नहीं पुलिस को मत बुलाइएगा ,मेरा नाम श्रेया है,मै नव्या की बेस्ट फ्रेंड हू।"

अवंतिका जी ये सुनकर हैरानी से बोलती है -"क्या पर तुम यहा कैसे आई और नव्या कहां है?"

श्रेया-" नव्या एक लड़के से प्यार करती है,वो हमारे ही कॉलेज में पढ़ता है, विक्की नाम है उसका, कुछ दिन पहले नव्या ने मुझे बताया कि उसकी शादी उसके घरवालों ने उसकी मर्जी के बिना तय कर दिया है, वो आपसे शादी नहीं करना चाहती थी रूद्र जी इसलिए मैं और विक्की यहां आए थे और वो विक्की के साथ भाग गई।"

रुद्र उसकी ये बात सुनकर गुस्से में फ्लावर वॉश उठाकर दीवार की तरफ दे मारता है। श्रेया डर से अपनी आंखें बंद कर लेती है।

रुद्र अवंतिका जी से बोलता है -"देखा मां आपने इसलिए मैं शादी नहीं करना चाहता था पर आपने मेरी बात नहीं मानी, भाग गई ना वो लड़की।"

अवंतिका जी-" रुद्र मुझे नहीं पता था वरना मैं कभी उससे तुम्हारी शादी की बात नहीं करती पर अब जो भी हो ये तुम्हारी पत्नी है, अब तुम्हें इसके साथ अपना रिश्ता निभाना पड़ेगा।"

रुद्र अवंतिका जी बात सुनकर गुस्से में श्रेया की तरफ देखता है।

श्रेया ये सुनकर उससे बोलती है-"देखिए प्लीज मुझे जाने दीजिए, जो भी हुआ गलती से हुआ, सॉरी पर मै ये शादी नहीं मानती,ये शादी एक गलती है।"

रुद्र उसकी बात सुनकर उसका हाथ पकड़कर अपने दांत पीसते हुये बोलता है-" तुम मानो चाहे ना मानो पर अब तुम मेरी पत्नी हो और पूरे शहर को ये बात पता चल गई है कि तुम मिसेज रुद्र प्रताप सिंह हो, अब तो तुम्हें पूरी जिंदगी मेरे साथ इसी मेंशन में बितानी पड़ेगी, तुम यहां से नहीं जा सकती।"

श्रेया उसकी ये बात सुनकर घबरा जाती है। वो फिर अवंतिका से बोलती है -"प्लीज मुझे जाने दीजिए, मैं एक मामूली कॉलेज स्टूडेंट हू और यहां हॉस्टल में रहती हूं, मैं यहां पढ़ाई करने आई हूं पर ये शादी ये सब मुझसे नहीं होगा प्लीज मुझे जाने दीजिए ,मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूं।"
इतना बोलकर वप अपने दोनों हाथ अवंतिका के सामने जोड़ लेती है।

अवंतिका उसका हाथ हटाकर बोलती है -"देखो ये सब करने से कुछ नहीं होगा और मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती, तुम अब सिंह परिवार की बहू हो और ये सच्चाई तुम जितनी जल्दी स्वीकार करोगी, उतना ही तुम्हारे लिए अच्छा होगा।"

वो फिर रुद्र से बोलती है -"रूद्र मैं एयरपोर्ट के लिए निकलती हूं।"

रूद्र-" ठीक है मां आप जायिये इसका तो मैं ध्यान रखूंगा।"

अवंतिका एक नजर श्रेया की तरफ देखती है और वहां से चली जाती है।

अवंतिका के जाने के बाद श्रेया रुद्र की तरफ देखती है। रुद्र उससे बोलता है-" आता हूं मैं थोड़ी देर में तब तक तैयार रहना क्योंकि आज हमारी फर्स्ट नाइट है।"

श्रेया उसकी ये बात सुनकर बहुत बुरी तरह घबरा जाती है। रूद्र फिर कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करके चला जाता है।

श्रेया कमरे में चक्कर काटते हुये बोलती है-" नहीं मै यहा नही रह सकती, मैं ये शादी नहीं मानती मुझे यहां से भागना पड़ेगा।"

श्रेया फिर जल्दी से बालकनी में आती है और नीचे की तरफ देखती है। बालकनी के बाहर नीचे गार्डन मे गार्ड पहरा दे रहे थे।

श्रेया ये देखकर बोलती है-" यहां तो गार्ड है, अब यहां से कैसे जाऊं?"

श्रेया फिर जल्दी से कमरे के अंदर आती है और दरवाजा जोर-जोर से खटखटाने लगती है। थोड़ी देर के बाद एक नौकर दरवाजा खोलता है और अपना सर झुकाकर बोलता है-" जी बहुरानी कुछ चाहिए आपको?"

श्रेया-" हां वो मुझे पानी चाहिए।"

नौकर उसकी बात सुनकर अपना सर हिलाकर वहां से चला जाता है। श्रेया जल्दी से कमरे से बाहर आती है और नौकरों से नजर बचाते हुए मेंशन के बाहर चली जाती है। वो फिर बाहर आकर गार्ड से नजर बचाकर गेट तक जाती है। गेट के बाहर दो वॉचमैन थे जो आपस में बातें कर रहे थे। श्रेया उनसे भी नजर बजाते हुए वहां से भागने में कामयाब हो जाती है।

क्या होगा जब रूद्र को पता चलेगा कि श्रेया भाग चुकी है?
रूद्र क्या श्रेया को खोज पाएगा?"

ये जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरी ये नई कहानी शादी बाय मिस्टेक।

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दिल्ली शहर

दिल्ली के मशहूर बिजनेसमैन रूद्र प्रताप सिंह के मेंशन को आज खूबसूरती से सजाया जा रहा था क्योंकि आज रूद्र प्रताप सिंह की शादी थी। रूद्र प्रताप सिंह एक जाना माना बिजनेस मैन था। उसका कारोबार देश के साथ विदेश में भी फैला हुआ था।

रूद्र प्रताप सिंह दिखने में काफी हैंडसम था, उसके आंखों का रंग नीला था अगर कोई भी लड़की उसकी आंखों में देखे, तो उसे रूद्र से प्यार ही हो जाता था पर रूद्र ने आज तक किसी भी लड़की को नजर उठाकर नहीं देखा था। वो शादी भी नहीं करना चाहता था पर आज उसकी शादी हो रही थी।

वो अपनी मां अवंतिका प्रताप सिंह के बोलने से शादी कर रहा था। वो अपनी मां का कोई बात नहीं टालता था। आज सुबह से ही सिंह मेंशन में वीआईपी गेस्ट का आना शुरू हो चुका था। वही मीडिया वाले भी एक-एक चीज रिकॉर्ड कर रहे थे। सभी को इंतजार था रूद्र प्रताप सिंह की पत्नी का,, वही लड़कियां इस बात से जल रही थी कि रुद्र प्रताप सिंह उसके क्यों नहीं हो पाए।

वही एक लड़की सिंह मेंशन के कमरे में बैठी थी और लगातार चक्कर काट रही थी, उसकी नजर बार-बार दरवाजे पर ही जा रही थी। उस लड़की का नाम नव्या था। उसकी शादी रूद्र प्रताप सिंह से होने वाली थी तभी एक लड़का कमरे के अंदर आता है और उसके साथ एक और लड़की थी। वो लड़का जल्दी से कमरे का दरवाजा बंद करता है और नव्या के गले लग जाता है।

नव्या -"विक्की तुम कहां थे ,मैं कबसे तुम्हारा इंतजार कर रही थी,, 4 बार मुझसे पूछ लिया गया है कि मैं बाहर कब आऊंगी,, मैं बहाना करके कमरे में बैठी हुई हूं अब अगर मैं यहां 2 मिनट भी रुकी ना, तो रूद्र खुद आ जाएगा मुझे लेने और अगर वो आ गया ना ,तो मुझे जाना ही पड़ेगा,, मुझे उससे शादी नहीं करनी है।"

विक्की -"जानता हूं,तुम चिंता मत करो तुम्हारी शादी सिर्फ मुझसे ही होगी और देखो मैं किसे लाया हूं।"

नव्या विक्की के बगल में खड़ी लड़की की तरफ देखती है,वो लड़की उसकी बेस्ट फ्रेंड श्रेया थी।

नव्या श्रेया से बोलती है -"श्रेया तू ?"

श्रेया -"हां नव्या बात करने का ज्यादा समय नहीं है ,तू एक काम कर तू अपने कपड़े मुझे दे और मेरे कपड़े तू पहन ले।"

नव्या-" पर तू शादी के जोड़ा कैसे पहन सकती है?"

श्रेया-" देख ज्यादा मत सोच ,मैं कौन सा रुद्र से शादी करने वाली हूं ,मैं बस कुछ देर के लिए ही ये शादी का जोड़ा पहनकर बैठूंगी तब तक तू और विक्की इस मेंशन से बाहर निकल जाना ,उसके बाद मैं भी जल्दी से चेंज करके यहां से निकल जाऊंगी।"

विक्की-"हा ये अच्छा आईडिया है, नव्या मैं बाहर वेट कर रहा हूं ,जल्दी से तुम दोनों अपने अपने कपड़े बदल लो।"

इतना बोलकर विक्की कमरे से बाहर चला जाता है। श्रेया दरवाजा लगा देती है और नव्या को अपने कपड़े दे देती है। नव्या भी उसे शादी का जोड़ा निकालकर दे देती है। दोनों जल्दी से कपड़े पहन लेती है।

नव्या फिर उसके गले लगकर बोलती है-" थैंक यू मेरी मदद करने के लिए।"

श्रेया-" पागल है क्या बेस्ट फ्रेंड को थैंक्स बोलती है ,अब जा जल्दी इससे पहले कोई देख ले।"

नव्या जल्दी से कमरे का दरवाजा खोलकर विक्की के साथ निकल जाती है। उसके बाहर जाते ही श्रेया भी शादी का जोड़ा खोलने लगती है तभी दरवाजे पर दस्तक होती है।

श्रेया आवज सुनकर जल्दी से घुंघट से अपना चेहरा ढक लेती है और आवाज बदलकर बोलती है -"कौन है?"

बाहर से आवाज आती है -"मैडम रूद्र सर आपको बुला रहे हैं, शादी का मुहूर्त हो गया है, सारे गेस्ट आ चुके हैं।"

श्रेया-" मुझे 5 मिनट और लगेगा।"

औरत -"मैडम अब मैं 2 मिनट भी नहीं रुक सकती और सर ने कहा है कि आपको अभी इसी वक्त लेकर आए।"

श्रेया -"मैंने कहा ना मैं 5 मिनट में आ रही हूं,जाओ यहां से।"

वो औरत ये सुनकर वहां से चली जाती है। श्रेया फिर से कपड़े खोलने लगती है तभी एक तेज झटके के साथ दरवाजा खुल जाता है। श्रेया ऐसे अचानक दरवाजा खुलने से बुरी तरह घबरा जाती है। वो फिर जल्दी से अपना चेहरा ढक लेती है।

रुद्र गुस्से में अंदर आते हुये बोलता है-" कबसे 5 मिनट 5 मिनट सुन रहा हूं, चलो शादी का मुहूर्त निकल रहा है।"

श्रेया उसे कोई जवाब देती तब तक रुद्र उसका हाथ पकड़कर उसे जबरदस्ती खींचता हुआ कमरे से बाहर ले जाता है।

श्रेया हॉल में आ चुकी थी। वहां सारे गेस्ट और मीडिया की नजर उसके ऊपर ही थी पर कोई भी उसका चेहरा नहीं देख पा रहा था।

अवंतिका मुस्कुराकर बोलती है-"ये है रुद्र की होने वाली पत्नी,,, रूद्र जाओ अब तुम दोनों जल्दी से मंडप मे बैठो ,,बहुत लेट हो चुका है।"

रुद्र अवंतिका की बात सुनकर सर हिलाकर बोलता है-" जी मां।"

वो फिर श्रेया का हाथ पकड़कर मंडप की तरफ ले जाने लगता है पर श्रेया के पैर कांप रहे थे, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें,, उसके कदम आगे बढ़ ही नहीं रहे थे।

रूद्र उसकी तरफ देखकर धीरे से गुस्से में बोलता है-" क्या तमाशा कर रही हो तुम।"

श्रेया धीरे से बोलती है-"देखिए आप मुझे गलत समझ रहे हैं।"

रुद्र-" मतलब,,, क्या गलत है और क्या सही ये शादी के बाद डिसाइड करेंगे हम,, चलो अब।"

इतना बोलकर वो उसका हाथ और कसकर पकड़ लेता है और उसे मंडप पर ले जाकर बैठा देता है। वो भी फिर उसके बगल में जाकर बैठ जाता है। थोड़ी ही देर में शादी की रस्में शुरू हो जाती है।

श्रेया धीरे से बोलती है-" रूद्र जी मेरी बात तो सुनिये।"

रूद्र-"जस्ट शटअप,, चुप चाप से बैठी रहो और ये बार-बार बीच में बोलना बंद करो।"

श्रेया फिर खामोश हो जाती है। थोड़ी देर के बाद दोनों फिर फेरों के लिए खड़े होते हैं। फेर होने के बाद दोनों वापस मंडप में बैठ जाते हैं। रूद्र फिर श्रेया की मांग भरता है और उसे मंगलसूत्र पहना देता है।

पंडित जी अवंतिका से बोलते हैं‐" शादी संपन्न हुई।"

अवंतिका पंडित जी की बात सुनकर मुस्कुरा देती है। वो फिर रुद्र और श्रेया के सर पर नोटों की गड्डी घूमाती है और एक नौकरानी को पैसे देते हुए बोलती है-" सारे गरीबों में बांट दो।"

नौकरानी वहां से चली जाती है तभी एक मीडिया वाला अवंतिका से बोलता है-" मैडम अपनी बहू की चेहरा तो दिखाइए ,हम सब बहुत देर से रुद्र सर की पत्नी का चेहरा देखना चाहते हैं।"

अवंतिका-" हां बिल्कुल।"

अवंतिका श्रेया के पास आती है और उसका घुंघट उठाने लगती है। श्रेया की घबराहट बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। वो अपने कपड़े को अपनी मुट्ठी से कसकर टाइट पकड़ लेती है।

अवंतिका जैसे ही उसका घुंघट उठाती है,तो वो बुरी तरह चौक जाती है। वही रूद्र भी श्रेया का चेहरा देखने लगता है। गोरा चेहरा ,दो बड़ी आंखें, माथे पर एक छोटी सी बिंदी, बालों का एक लट श्रेया के गालो को छू रहा था, होठों पर गुलाबी लिपस्टिक,वो दुल्हन के जोड़े में बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,ऐसा लग रहा था जैसे आसमान से कोई परी उतरकर आ गई हो।

ये है मेरी कहानी का पहला भाग।
आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइएगा।

🙏जय श्री गणेश🙏 isko comics video bnani

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"जीवन में कभी किसी बात का घमंड मत करना, क्योंकि समय ऐसा शिक्षक है जो एक पल में सब कुछ बदल सकता है।"

किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है, जो खुद पर भरोसा रखना नहीं छोड़ते।

"जो तुम्हारे भाग्य में है, वह तुमसे कोई नहीं छीन सकता; और जो तुम्हारे भाग्य में नहीं है, उसे तुम पकड़कर भी नहीं रख सकते।"
- Alka rahul Aggarwal

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दुनिया की अजीब कहानी, सब सुनते और सुनाते।
अपने मतलब के पीछे ही, दिन-रात लगे रह जाते।।
सच्चाई को समझ न पाते, मन रहता बेचैन।
कैसे कोई समझाए इनको, बहाते आँसू व्यर्थ नैन।।
देखो इनकी हालत कैसी, रहते अक्सर मौन।
इनको देखकर समझ न आए, आखिर ये हैं कौन।।
स्वार्थ भरा है इनके मन में, चैन नहीं एक पल।
कैसे कोई समझाए इनको, समझें जीवन का फल।।
नहीं किसी की परवाह इनको, अपने में खोए रहते।
दूसरों के दुख-दर्द को भी, कभी न अपने संग कहते।।
दया और प्रेम से दूर हैं, मन हुआ है कठोर।
कैसे कोई समझाए इनको, क्या है जीवन का छोर।।
धन-दौलत को सबसे ऊपर, ये लोग मानते हैं।
सच और ईमान की बातें, कम ही पहचानते हैं।।
संतों की सीख भी इनको, लगती बिल्कुल फीकी।
कैसे कोई समझाए इनको, सोच हुई है रीती।।
मानव जीवन के बलिदानों को, ये याद नहीं करते।
झूठे आँसू बहाकर अक्सर, लोगों को बस भरमाते।।
ऐसे लोगों से बचकर रहना, यही बात है गंभीर।
कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।।

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श्रमिकों का महत्व
मेहनत करने वाला व्यक्ति दिन-रात पसीना बहाता है। उसकी भी इच्छा होती है कि वह सुख से जीवन जिए और अपने अधूरे सपनों को पूरा करे।
वह अपनी मेहनत से परिवार का पालन-पोषण करता है। जब श्रमिक आगे बढ़ता है, तब देश भी तरक्की करता है और विकास की नई कहानियाँ लिखता है।
हमें श्रमिकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करना चाहिए। उन्हें कभी भी छोटी नजर से नहीं देखना चाहिए। वे समाज की अमूल्य धरोहर हैं और हमारे अपने भाई-बहन जैसे हैं।
वे दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि अपने परिवार को खुश रख सकें। अच्छा जीवन जीने की इच्छा रखना कोई अपराध नहीं है। उनके अधिकार कोई दान या खैरात नहीं, बल्कि उनका हक हैं।
श्रमिक भीख नहीं मांगते, बल्कि अपनी मेहनत का उचित सम्मान और मेहनताना चाहते हैं। उन्होंने जीवन में बहुत कष्ट झेले होते हैं।
हमारा भी कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान करें, उन्हें अपनापन दें और उनके योगदान को पहचानें।
सच्चा श्रमिक कभी मेहनत से पीछे नहीं हटता। वह लगातार काम करके समाज और देश की सेवा करता है। वह दूसरों के जीवन में खुशियों के बीज बोता है, लेकिन अक्सर उसकी मेहनत का पूरा फल उसे नहीं मिल पाता।

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1. कर्म का फल
जैसे कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा। यदि लोग आपकी बुराई करते हैं तो पहले अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए।
2. मोह से बचें
किसी व्यक्ति या चीज़ से जरूरत से ज़्यादा लगाव दुख का कारण बनता है। इसलिए सोच-समझकर जीवन जीना चाहिए।
3. रिश्तों का मोह
कई बार जिनसे कोई खास रिश्ता नहीं होता, उनसे भी हम बहुत जुड़ जाते हैं। लेकिन हमेशा मर्यादा और संतुलन बनाए रखना चाहिए।
4. भ्रष्ट लोग
समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जो हर जगह भ्रष्टाचार और गलत काम करते रहते हैं। उनका आचरण समाज को नुकसान पहुँचाता है।
5. बुराई का अंत कठिन
ऐसे लोगों को रोकना आसान नहीं होता। वे बार-बार मुश्किलों से बच निकलते हैं और अपनी आदतें नहीं बदलते।
6. जीवन का महत्व
मानव जीवन बहुत मूल्यवान है। बुरी भावनाओं और वासनाओं को नियंत्रित करना चाहिए, नहीं तो वे हमें ही नुकसान पहुँचाती हैं।

एकता का संदेश
मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन लड़ाई नहीं करनी चाहिए। सबके हित के लिए मिल-जुलकर रहना ही सबसे अच्छा रास्ता है।
1. रिश्तों में प्यार की कमी
आज लोगों के बीच पहले जैसा प्रेम नहीं रहा। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ गए हैं और परिवारों में भी तनाव बढ़ रहा है।
2. स्वार्थी समाज
आज कई लोग अपने स्वार्थ में इतने डूब गए हैं कि सच्चा प्रेम और अपनापन कम होता जा रहा है।
बेटियों पर
बेटियाँ माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी और सम्मान होती हैं। उन्हें दुख पहुँचाना पूरे परिवार को दुखी कर देता है।
परंपरा पर व्यंग्य
लोग अक्सर परंपरा के नाम पर बहुत कुछ करते हैं, लेकिन कई बार वे उसके असली उद्देश्य को भूल जाते हैं।
समाज की विडंबना
कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि आज लोग शांति और सरल जीवन से ज्यादा दिखावे और हिंसा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
मदद और इंसानियत
किसी के आँसू पोंछना और उसकी मदद करना अच्छा काम है, लेकिन इसके पीछे स्वार्थ नहीं होना चाहिए।
यमराज का प्रतीक
यहाँ यमराज को एक ऐसे मित्र के रूप में दिखाया गया है जो जीवन की सच्चाई, कर्म और मृत्यु का ज्ञान देता है।
अंतिम संदेश
कवि कहता है कि उसने हमेशा प्रेम, सद्भाव और अच्छे कर्मों का संदेश दिया है। उसकी इच्छा है कि सभी लोग सही रास्ते पर चलें और जीवन में मुस्कुराते रहें।
मुख्य संदेश:
👉 अच्छे कर्म करो।
👉 मोह, लालच और स्वार्थ से बचो।
👉 बेटियों का सम्मान करो।
👉 एकता और प्रेम बनाए रखो।
👉 मानव जीवन को सार्थक बनाओ।

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माया (भ्रम) हर इंसान माया और मोह में फँसा हुआ है। यह माया उसे धोखा देती रहती है और वह दुखी बना रहता है।

. लालच लालच के कारण इंसान सही रास्ते से दूर हो जाता है। ज्ञान, ध्यान और समझ भी उसके सामने बेबस हो जाते हैं।

. माया की गुलामी पता ही नहीं चला कि कब हम माया के अधीन हो गए। आज हम सब परेशान और कमजोर महसूस कर रहे हैं।

. महँगाई महँगाई से आम जनता बहुत दुखी है। लोग दिन-रात चिंता में डूबे रहते हैं और नई-नई परेशानियों का सामना करते हैं।

किसानों की समस्या महँगाई के समय में भी किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिलता। खेती करना और भी कठिन होता जा रहा है।

. गंगा और अहंकार हम गंगा जी की महिमा तो गाते हैं, लेकिन अपने अहंकार में इतने डूब गए हैं कि उनकी पवित्रता का सही सम्मान नहीं करते।

. महँगाई का असर महँगाई लगातार बढ़ रही है और लोगों का जीवन मुश्किल बनाती जा रही है।

. दहेज प्रथा दहेज की वजह से बेटियों का विवाह करना कठिन हो गया है। समाज में दहेज की बुरी प्रथा अभी भी मौजूद है।

पैसे का लालच आज सब कुछ पैसे के इर्द-गिर्द घूमता है। दहेज जैसी बुराइयों की जड़ भी पैसों का लालच ही है।

उम्मीद कवि कहता है कि उसे अब खुद पर भी पूरा भरोसा नहीं रहा, लेकिन ईश्वर से अभी भी आशा बाकी है।

दिखावा आज लोग इंसानियत से ज्यादा पद, पैसा और पहचान को महत्व देते हैं

विज्ञान और मानसिकता विज्ञान में तरक्की के बावजूद इंसान कई मानसिक समस्याओं और कुंठाओं से घिरा हुआ है।

हिंसा और भोगवाद पर व्यंग्य कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि आज का समाज सोच-विचार छोड़कर केवल मौज-मस्ती और स्वार्थ में डूबता जा रहा है।

यह कविता माया, लालच, महँगाई, दहेज, अहंकार और समाज की बदलती सोच जैसी समस्याओं पर प्रकाश डालती है और इंसान को आत्मचिंतन करने का संदेश देती है।

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*एक ऐसी कहानी,*
*जो आपको भावुक कर देगी😢*

एक अट्ठाइस साल की बहुत ही बदसूरत और काली लड़की थी, उसके दाँत भी निकले थे, पर उसे अपने रंग और बदसूरती का जरा भी अफ़सोस नही था | हमेशा खुश रहती और एक नंबर की पेटू और पढ़ने लिखने में महाभोंदू भी थी |

पेटू होने की वजह से शरीर भी बेडौल हो गया था | एक खूबी उसमें यह भी थी की जहाँ रहती, हो-हो-हो कर हस्ती मुस्कुराते रहती और सबको भी हँसाते रहती |
उस नेक दिल लड़की का एक शौक भी था |
खाना बनाने का, वह खूब मन से खाना बनाती और बड़े चाव से मसाला पिसती |
खाना बनाने की किताबे खूब ध्यान लगा कर पढ़ती | टीवी रेडियो पे भी पाक कला के प्रोग्राम को बड़े मनोयोग से देखती सुनती |

जब भी उसे कोई खाना बनाना होता तो वह बड़े प्रेम से बनाती | आटा गूँथती, बड़े प्यार से गीत गुनगुनाते हुए कम आँच पे पूड़ियाँ तलती |
सब्जी चटनी खीर हो या मटर पनीर सब कुछ लाजबाब बनाती | जो भी उसके खाने को टेस्ट करता बिना तारीफ किये ना रहता | उसने पाक कला में अद्भुत और असाधारण प्रतिभा हासिल कर ली थी |

पर वह मनहूस थी उसके काले रंग और बदसूरत होने से कोई उसे प्यार न करता था पर माँ उसे बहुत प्यार करती थी | आज तक माँ ने उसे डाँटा तक नही था और वह भी माँ से बहुत प्यार करती थी |

हर बार की तरह इस बार भी आज सुबह उसकी शादी के लिए जो लोग लड़की देखने आये थे उन सबो ने खाने की बहुत तारीफ की लेकिन लड़की को देखकर नाक मुँह सिकोड़कर चले गए |

वह लड़की भी तैयार होकर किसी को बिना कुछ बताये कहीं चली गयी | शाम में जब वो लौटी तो घर का माहौल बहुत गरम था |

पिता जी माँ पे बहुत गुस्सा थे बोल रहे थे पता नही कौन से पाप के बदले ये मनहूस लड़की मिली | पिता से प्रायः यह सुब सुनती थी उससे उसे कोई असर न होता था |
वह बहुत खुश खुश माँ को कुछ बताने गई और कहा " बड़ी भूख लगी है कुछ खाने को दो पहले" !

उसके हाथों में एक सर्टिफिकेट और एक चेक भी था, पर माँ भी आज बहुत गुस्से में सब्जी काट रही थी उसके तरफ देखे बिना ही बोली "तू सचमुच मनहूस है काश पैदा होते ही मर जाती तो आज ये दिन ना देखना पड़ता |
पचासों रिश्तों आये किसी ने तुझे पसंद न किया " |

उस मनहूस लड़की को माँ से ऐसी आशा ना थी उसका दिल बैठ गया और उसकी ख़ुशी उड़ गई और उदास होकर माँ से बोली " मैं सचमुच मनहूस हूँं माँ क्या मैं मर जाऊँ ?" बोलते बोलते उसका गला रुंध गया और चेहरा लाल हो गया |

माँ ने भी गुस्से में कहा "जा मर जा सबको चैन मिले" |
तभी उस मनहूस लड़की ने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया | थोड़ी देर बाद जैसे ही माँ को अपनी गलती का अहसास हुआ वो दौड़ती हुई उसके कमरे के तरफ गयी | आवाज़ देने पर भी दरवाजा जब नही खुला तो माँ ने जोर का धक्का दिया |
तेज धक्के से जैसे ही दरवाज़ा खुला माँ ने देखा सामने दुपट्टे के सहारे जीभ बाहर निकले उस मनहूस काली लड़की की लाश झूल रही थी |
वही पर एक चिट्ठी, सर्टिफिकेट और एक लाख का चेक रखा था |

चिट्ठी में लिखा था" माँ मैंने आज तक तुम्हारा कहना माना है | आज तुमने मरने को बोला ये भी मान रही | अब तुम मनहूस लड़की की माँ नही कहलाओगी |
मैंने पढ़ने की बहुत कोशिश की पर मेरे दिमाग मे कुछ जाता है नहीं, पर भगवान ने मुझे ऐसा बनाया इसमें मेरा क्या कसूर माँ ?😢
मुझे सबने काली मनहूस भोंदू सब कहा, मुझे बुरा न लगा पर तुम्हारे मुँह से सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा 😢
मेरी प्यारी माँ और हां आज नेशनल लेवल के खाना बनाने वाली प्रतियोगिता में मुझे फर्स्ट प्राइज और एक लाख रूपए का चेक मिला और साथ में फाइव स्टार होटल में मास्टर शेफ की नौकरी भी |😢

और पता है माँ आज मेरी जिंदगी की सबसे खुशी का दिन था क्योंकि पहली बार वहाँ सबने मुझे कहा था
देखो ये है कितनी भाग्यशाली लड़की है 😢😢😢...

नोट- बेटी है तो कल है | उसका सम्मान करे |
उसे ताकत दे,
उत्साहित करें,
माँ बाप का नाम,
देश का नाम रोशन करेगी |

💞🙏🏻💞
*सभी एक 𝗟𝗶𝗸𝗲 अवश्य करें ♥

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