Barish wali mulakat in Hindi Love Stories by Bindu Rajesh Mallah books and stories PDF | बारिश वाली मुलाकात

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बारिश वाली मुलाकात

बारिश का मौसम था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे। सड़क पर लोग छाता लेकर भाग रहे थे। उसी भीड़ में खड़ी थी अनन्या, जो रोज़ की तरह कॉलेज से घर लौटने के लिए बस का इंतज़ार कर रही थी।
अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई। अनन्या जल्दी-जल्दी एक पुराने बस स्टॉप की छत के नीचे जाकर खड़ी हो गई। वहाँ पहले से एक लड़का खड़ा था। उसके हाथ में एक किताब थी और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान।
उसने अपनी छतरी अनन्या की ओर बढ़ाते हुए कहा, "अगर चाहो तो आधी छतरी तुम भी इस्तेमाल कर सकती हो।"
अनन्या पहले तो झिझकी, फिर मुस्कुराकर बोली, "धन्यवाद।"
उस दिन दोनों ने पहली बार एक-दूसरे का नाम जाना।
लड़के का नाम आरव था।
इसके बाद जैसे किस्मत उन्हें बार-बार मिलाने लगी। कभी कॉलेज की लाइब्रेरी में, कभी कैंटीन में, तो कभी उसी बस स्टॉप पर।
धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए।
आरव हमेशा अनन्या का हौसला बढ़ाता था। जब भी वह उदास होती, वह उसे हँसाने की कोशिश करता। अनन्या को भी अब हर सुबह कॉलेज जाने का एक नया कारण मिल गया था।
एक दिन बारिश हो रही थी। दोनों चाय की दुकान पर खड़े थे।
आरव ने मुस्कुराकर पूछा, "अगर मैं एक बात कहूँ, तो नाराज़ तो नहीं होगी?"
अनन्या ने हँसते हुए कहा, "पहले कहो तो सही।"
आरव ने गहरी साँस ली और कहा, "मुझे लगता है... मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।"
कुछ पल के लिए सब कुछ जैसे थम गया।
अनन्या ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान ही सब कुछ कह रही थी।
उस दिन के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को एक नया नाम दे दिया।
समय बहुत खूबसूरती से बीतने लगा।
लेकिन खुशियाँ हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
एक दिन अनन्या के पापा का दूसरे शहर में ट्रांसफर हो गया। उसे अचानक शहर छोड़ना पड़ा।
स्टेशन पर विदा लेते समय दोनों की आँखों में आँसू थे।
आरव ने कहा, "मैं इंतज़ार करूँगा।"
अनन्या ने जवाब दिया, "और मैं लौटकर ज़रूर आऊँगी।"
समय बीतता गया।
फोन पर बातें कम होने लगीं। पढ़ाई और ज़िम्मेदारियों ने दोनों को व्यस्त कर दिया।
एक दिन अचानक आरव के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया—
"क्या तुम अभी भी बारिश होने पर बस स्टॉप जाते हो?"
आरव का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
उसने तुरंत जवाब दिया, "हाँ... क्योंकि मुझे आज भी यकीन है कि तुम लौटोगी।"
कुछ दिन बाद फिर वही बारिश हुई।
आरव आदत के अनुसार उसी पुराने बस स्टॉप पर जाकर खड़ा हो गया।
उसे लगा शायद आज भी कोई नहीं आएगा।
तभी पीछे से किसी ने धीरे से कहा,
"इतना इंतज़ार करवाया... फिर भी नाराज़ नहीं हुए?"
आरव ने मुड़कर देखा।
सामने अनन्या खड़ी थी।
वही मुस्कान...
वही चमकती आँखें...
और हाथ में वही नीली छतरी, जो उसने पहली मुलाकात वाले दिन पकड़ी थी।
आरव की आँखें भर आईं।
उसने बिना कुछ कहे अनन्या का हाथ पकड़ लिया।
अनन्या मुस्कुराई और बोली,
"कुछ वादे देर से पूरे होते हैं... लेकिन अगर प्यार सच्चा हो, तो अधूरे नहीं रहते।"
बारिश अब भी हो रही थी।
लेकिन इस बार दोनों भीगने से नहीं डर रहे थे।
क्योंकि अब उनके बीच सिर्फ़ बारिश नहीं थी...
एक ऐसा प्यार था, जिसने इंतज़ार की हर परीक्षा पास कर ली थी।
उस दिन के बाद जब भी बारिश होती, दोनों उसी बस स्टॉप पर एक कप चाय पीते और अपनी पहली मुलाकात को याद करके मुस्कुरा देते।
लोग कहते हैं कि कुछ प्रेम कहानियाँ किसी महल या बड़ी जगह से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी छतरी, एक कप चाय और बारिश की कुछ बूँदों से शुरू होती हैं।
समाप्त।