Room number 13 in Hindi Thriller by Bindu Rajesh Mallah books and stories PDF | रूम नंबर 13

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रूम नंबर 13

शहर के बीचों-बीच एक पुराना होटल था, जिसका नाम था शांति होटल। बाहर से देखने पर वह बिल्कुल सामान्य लगता था, लेकिन उसके बारे में एक अजीब अफ़वाह पूरे शहर में फैली हुई थी।
लोग कहते थे कि रूम नंबर 13 में जो भी रात बिताता है, वह अगली सुबह पहले जैसा नहीं रहता।
होटल के मालिक ने उस कमरे को वर्षों से बंद कर रखा था। कोई भी ग्राहक अगर रूम नंबर 13 माँगता, तो उसे साफ़ मना कर दिया जाता।
एक दिन प्रसिद्ध ट्रैवल व्लॉगर राहुल उस होटल में पहुँचा। उसे भूत-प्रेत और रहस्यमयी जगहों पर वीडियो बनाने का बहुत शौक था।
रिसेप्शन पर उसने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे रूम नंबर 13 चाहिए।"
मैनेजर का चेहरा अचानक उतर गया।
उसने कहा, "सर, कृपया कोई दूसरा कमरा ले लीजिए।"
लेकिन राहुल नहीं माना। उसने कहा, "अगर वहाँ कुछ नहीं है, तो डर किस बात का?"
आख़िरकार मैनेजर ने काँपते हाथों से उसे कमरे की चाबी दे दी।
राहुल रात को कमरे में पहुँचा। कमरा बिल्कुल साफ़ था। दीवार पर एक पुरानी घड़ी लगी थी और सामने एक बंद टेलीविज़न रखा था।
राहुल ने कैमरा चालू किया और बोला, "दोस्तों, आज रात सच सामने आएगा।"
रात के 1:13 बजे अचानक टीवी अपने आप चालू हो गया।
स्क्रीन पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
"पीछे मत देखना।"
राहुल हँस पड़ा।
उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।
पीछे दीवार पर एक दरवाज़ा बना हुआ था।
वह घबरा गया।
कुछ देर पहले वहाँ कोई दरवाज़ा नहीं था।
दरवाज़ा धीरे-धीरे अपने आप खुलने लगा।
अंदर सिर्फ़ घना अंधेरा था।
तभी एक छोटी बच्ची की आवाज़ आई—
"क्या तुम मेरे साथ खेलोगे?"
राहुल ने डरते हुए टॉर्च की रोशनी अंदर डाली, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
अचानक उसका कैमरा अपने आप बंद हो गया।
मोबाइल की स्क्रीन पर एक नया संदेश दिखाई दिया—
"अब बाहर जाने का रास्ता बंद हो चुका है।"
राहुल दौड़कर कमरे का मुख्य दरवाज़ा खोलने लगा।
लेकिन दरवाज़ा बाहर से बंद था।
अचानक पूरे कमरे में बच्चों की हँसी गूँजने लगी।
उसने पीछे देखा...
वही छोटी बच्ची अब उसके ठीक पीछे खड़ी थी।
उसका चेहरा पूरी तरह सफेद था और उसकी आँखें काली थीं।
वह मुस्कुराकर बोली—
"अब तुम हमेशा यहीं रहोगे।"
डर के मारे राहुल ने ज़ोर से आँखें बंद कर लीं।
जब उसने दोबारा आँखें खोलीं, तो कमरा बिल्कुल शांत था।
न बच्ची...
न दूसरा दरवाज़ा...
सब कुछ सामान्य था।
सुबह वह भागकर रिसेप्शन पहुँचा और पूरी बात बताई।
मैनेजर कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने होटल का एक पुराना रजिस्टर निकाला।
उसमें पिछले कई वर्षों के उन लोगों के नाम थे जिन्होंने रूम नंबर 13 में रात बिताई थी।
राहुल ने आख़िरी पन्ना खोला...
उस पर सबसे नीचे उसका अपना नाम लिखा हुआ था।
लेकिन उसके नाम के आगे तारीख़ आज से पाँच साल पुरानी थी।
राहुल के होश उड़ गए।
उसी समय रिसेप्शन पर बैठे सभी लोग अचानक उसकी ओर देखने लगे।
मैनेजर धीरे-धीरे मुस्कुराया और बोला—
"तुम आज पहली बार नहीं आए हो... तुम हर पाँच साल बाद वापस आते हो... लेकिन तुम्हें कभी याद नहीं रहता।"
राहुल घबराकर होटल से बाहर भागा।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
होटल वहाँ था ही नहीं।
उसकी जगह सिर्फ़ एक खंडहर खड़ा था।
और उसके टूटे हुए बोर्ड पर धूल से लिखा था—
"रूम नंबर 13 अभी भी आपका इंतज़ार कर रहा है..."
उस दिन के बाद राहुल कभी दिखाई नहीं दिया।
लेकिन शहर के लोग आज भी कहते हैं...
अगर किसी होटल में तुम्हें रूम नंबर 13 मिल जाए...
तो चाहे कुछ भी हो जाए...
उस कमरे का दरवाज़ा कभी मत खोलना।
समाप्त।