Jungle - 39 in Hindi Women Focused by Neeraj Sharma books and stories PDF | जंगल - 39

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जंगल - 39

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....

ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा है। ये बूटी भाँग की बहुत बीमारियों को खत्म कर देगी... ये दवाई की माफक है ऐसे तमाकू मे मिला कर ही बनता है। दियाल जिंदगी ऊपर नीचे पड़ाव दिखाती हुई चलती है, गोदली का समय सूर्य देव पश्चिम मे डूब रहे गंगा के जल मे पीला प्रकाश बिखेरे हुए था। आरती का माहौल बने हुए था... सब सन्यासी हम भी वहा तट पे नगे पाव खड़े हो गए थे। अंदर ठंड का करंट दौड़ रहा था.... नगे पावो के नीचे से। आरती और मधुर संगीत कितना मधुरता भरा हकीकत मे वातावरण था। संख की गुज़ ने जैसे सभी कान के पर्दे खोल दीये थे। सब आपना आपना आनंद ले रहे थे। कितना आनंद था......

                      गंगा की धूमिल हो चुकी छलो मे दीये जगते हुए रात्रि का संकेत दे रहे थे। कितना विसमय से भरा शिव लोक था... शिव का बनारस और काशी। हमने आते वक़्त रीड किया था, कितने ही सन्यासी और हो चुके भस्म लगाए योगी, जिनकी कोई संख्या नहीं थी। बेगिनत होंगे। हम आपने टेंट हॉउस मे आ गए थे... आते ही किर्पा ने कहा ---" चावल कौन बनायेगा... " उसमे छोटे ने कहा " गुरू जी मीठे चावल मै बनाता हूँ। " किर्पा जी ने कमबल दियाल जी को देते कहा ---" लो ठंड इतनी नहीं " हसते हुए कहा ---" मन को जैसा करोगे वैसा ही बनेगा। " दियाल जी ने बड़ी सीख सीख लेकर कहा, "जी गुरू जी " जैसे छोटे ने इज़त भाव दिया, वैसे ही दियाल ने भी दिया। इटो का चुला और लकड़ो की भीनी भीनी आग धुयाँ ज्यादा हो गया... कमबल ले कर तीनो चौकड़ी लगा कर बैठ गए... लडके ने लोहे के बम्बू से आग फुके मार मार कर जला ली थी.... चावलो मे गुड़ की चासनी बना कर चावल बना दीये गए। सब चुप, विराम लगा हुआ था... धयान मे मग्न थे। चावल बन गए... पतलो मे डाल दीये जो बोड़ की थी... ठंडे होने मे समय था। भूख लगी होंगी, तो दियाल को, उन्हों ने तो सब तैयाग दिया था... शिवशंकर की किर्पा से। किसी ने जल्दबाजी नहीं दिखायी.. ये बात दियाल ने नोट की... पर दियाल से रहा नहीं गया। " खाने से पहले शिव का धयान करो बच्चे, फिर पतल पर ही गाये का भोजन निकालो, फिर आपनी जननी, पिता को याद करो, फिर शिव शंकर का धयान करो..... "  "---- फिर पानी का छिटा दो। " गिलास मे पानी रखा हुआ था... ऐसा ही दियाल ने किया -----! ऊगलो से गर्म गर्म मीठे चावल खाते हुए हर्ष से कहा " धन्य है भोले, कितना स्वाद भोजन। " सब भी धीरे धीरे खाने लग गए। पतलो से गौ की हिस्सा की रोटी उठा कर किर्पा ने लिफाफे मे संभालने को किर्पा से छोटे जो बोलते भी बहुत कम थे उनका नाम अजय कह कर सम्भोदन किया। --" कल सुबह तुमने ये हिस्से जो है गौ परमेश्वरी को देना है। " फिर किर्पा सब उठे बाहर टहलने को चले.... आगे यही समय मिलेंगे ---- संस्कृति की दुनिया मे।

(चलदा )