साधना करने का तीसरा नियम था: भरपेट खाने का एक कौशल! यह दूसरी नियम के जैसा ही था; दुश्मनों को मारने के लिए उसे केवल एक कौशल्य की आवश्यकता थी। यदि उसने एक कौशल्य को चरम तक सीख लिया, तो यह और दस शक्तिशाली हत्यारी चालों को विकसित करने की तुलना में ज्यादा काम का होगा।
साधना करने के चौथे नियम: में साधना की कठिनाईयाँ शामिल थी। भले ही किसी ने कठिनाइयाँ सहन की हों और साधना करने के लिए अपने बहुत मेहनत की हों, फिर भी वे केवल नौसिखिए ही माने जाएंगे! केवल वे ही बड़े खिलाड़ी बन सकते हैं जिन्होंने वास्तव में खुद को साधना में डुबाने में आनंद लिया और हर कदम की गहनता का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया।
उसने उत्तरी तलवार सम्राट के शब्दों के पीछे के वास्तविक अर्थ को भी समझा "अपने दिल और दिमाग को तलवार के प्रशिक्षण में न लगाना किसी को केवल तलवार का गुलाम बना देता है। केवल अपना दिल और दिमाग प्रशिक्षण में लगाकर ही आप तलवार के महारथी बन पाएंगे।” सामान्य साधकों ने कड़ी मेहनत की, लेकिन इसमें उन्होंने अपना दिल नहीं लगाया। वास्तविकता में तलवारबाजी का आनंद लेना, उसके लिए जुनूनी हो जाना, सभी बाहरी चीजोंका त्याग देना और एक पागल दानव ( इसका मतलब दानव लोगो को मारने के लिए पागल होते है वैसे ही एक लक्ष्य पर ध्यान देना।) की तरह पूरी तरह से प्रशिक्षण में गुमसुम हो जाना वाला ही एक बड़ा खिलाड़ी (इसका मतलब ज्यादा ताकतवर होने से है। ) बन सकता है। नही तो, सिर्फ एक नौसिखिया ही बना रहेगा।
पाँचवा नियम: "दिन में प्रगति करो , महीनों में बदलाव आयेगा, अंततः सफलता मिलेगी."
छठा नियम.
कुल नौ नियम थे।
सभी नियमों में कम से कम तीन संत Experts का उल्लेख था। इसके अलावा, वरुण को जो कुछ भी पता था, उसे समझने के बाद उसे वे सही लगे।
' मैं हर दिन कई घंटे थकने तक सेबर चलाने की प्रैक्टिस कर रहा हूं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं कितना थका हुआ था, मैं बस अपने दाँत भींचकर इसे सह लूँगा। पहले, मैंने सोचा था कि मैं प्रयास कर रहा हूं, लेकिन स्पष्ट रूप से, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अपना दिमाग और दिल इसमें लगता हूं। मुझे हर कदम पर सोचते हुए खुश रहकर सेबर आर्ट में खुद को डुबोने की जरूरत है। वरुण को लगा कि यह उसकी सबसे बड़ी समस्या थी। शुरुआत में, प्रैक्टिस बहुत थका देने वाली थी।'
आम तौर पर वह दोपहर में दो घंटे पेंटिंग करता था। यह उसका एकमात्र शौक था। यह उसका बचपन से ही शौक था। पेंटिंग के माध्यम से उसकी प्रैक्टिस (प्रैक्टिस शारिरीक साधना है।) की सारी थकान भूल जाती थी और उनका दिल भी बेहद शांत हो जाता था। इससे उसे एक के बाद एक वर्ष तक टिके रहने की हिम्मत मिली।
अब, ऐसा लग रहा था कि चीज़ों के बारे में उसका दृष्टिकोण ग़लत था।
अतीत में, मैं मेहनत करने वाला लगता था, लेकिन अंत में, मैं सिर्फ एक नौसिखिया था। अब खुद को और रोक नही पाऊंगा, वरुण ने किताब नीचे टेबल पर रख दी और अध्ययन कक्ष से बाहर आंगन में चला गया।
आंगन में, उसने अपनी उच्च स्तरीय सेबर आर्ट, पत्पर्ण सेबर आर्ट की प्रैक्टिस को शुरू किया।
पहले के विपरीत - उसने केवल पत्पर्ण सेबर आर्ट के पहले रुख, सेबर की रुखमुद्रा का उपयोग किया। उसने बाकी सब कुछ अपने दिमाग से निकाल दिया क्योंकि उसने पूरी तरह से अपने सेबर आर्ट पर ध्यान केंद्रित किया, जैसे कि दुनिया में सिर्फ उसके हाथ की सेबर ही थी! फिर उसने अपनी सेबर से वार किया! वह सेबर की खामोशी को महसूस कर पा रहा था क्योंकि वह मयान से बाहर थी। वह समझ सकता था कि सेबर आर्ट अभी भी वही पुरानी सेबर आर्ट है, लेकिन उसकी मानसिकता बदल गई थी। उसने जो देखा वह भी बदल गया।
जब वह छोटा था तब से, उसने तीव्र सेबर को चुना था क्योंकि वह इसे अपने दिल की गहराइयों से पसंद करता था। यह पूरी तरह से थका देने वाले, हर रोज दोहराने वाले प्रशिक्षण के कारण था जिसने उसके जुनून को खत्म कर दिया। लेकिन आज जब उसने अपनी मन की दशा बदली, तो उसने एक बार फिर शरीर और दिमाग दोनों का उपयोग करके अपनी सेबर आर्ट पर ध्यान केंद्रित किया। प्यार की भावना जागृत थी।
सेबर खुली धीरे से हुई थी।
एक पेंटिंग में सेबर चलाने की दिशा से सुंदर स्ट्रोक बने थे। उसने हर वार के साथ सेबर चलाने की दिशा को और ज्यादा खूबसूरत बनाने की पूरी कोशिश की, जिसके हर वार से उत्पन्न हवा तेज़ हो गई। सच में ताकतवर सेबर तकनीकों में एक सुंदरता थी, और वरुण की सेबर तकनीक इस स्तर तक पहुंच रही थी।
उसने एक ही चाल को बार-बार दोहराया, अपनी सेबर चलाते समय तेजी से और अधिक बिना आवाज किए वार करने की कोशिश की, और लगातार बढ़ती गति से हवा को काटने की कड़ी मेहनत की।
संतुष्ट होने से पहले उसने इसे पचास बार दोहराया।
प्रैक्टिस करने का यही तरीका होना चाहिए! वरुण उत्साहित था, और फिर उसने दूसरा रुख घूमती चंद्रमुद्रा का उपयोग करना शुरू कर दिया।
दो दिन बाद वरुण ने बादल परिवार के एक अंडरग्राउंड हॉल में साधना के नोट्स संकलित किए।
धूऽऽऽऽ
हॉल के बीच में बैंगनी कलर की लपटें उठीं।
आग की लपटों के बीच एक काले बालों वाला श्रेष्ठ कमल की मुद्रा में बैठा था, उसे कोई नुकसान नहीं हुआ था।
"पिताजी, आपने मुझे बुलाया?" अंगद ने सम्मानपूर्वक मेन हॉल तक चला गया लेकिन उसने पास जाने की हिम्मत नहीं की। दूर से भी, वह गर्मी महसूस कर सकता था - जिसके कारण उसकी ओर बढ़ती हुए हवा बिगड रही थी।
"अंगद।" काले बालों वाले श्रेष्ठ ने अपनी आँखें खोलीं, उसकी निगाहें शांत थीं। “मुझे अभी एक समाचार मिला। अग्रज परिवार की वह बुढ़िया शांतसागर पास पर दानवों से बचाव करते समय गंभीर रूप से घायल हो गई थी। वह संभवतः ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रहेगी। उसे अगले कुछ दिनों में उज्जैन लौट आना चाहिए।"
अंगद आश्चर्यचकित था। "पिताजी, क्या आप वृत्तिका अग्रज की बात कर रहे हैं?"
"हाँ।" काले बालों वाले श्रेष्ठ ने थोड़ा सिर हिलाया।
"क्या यह कोई गलती हो सकती है?" अंगद को यकीन नही हो रहा था। "क्या ऐसा नहीं कहा जाता कि वृत्तिका अग्रज बातों को अंदाजा लगाने में सर्वश्रेष्ठ है। पांच किलोमीटर के अंदर की कोई भी चीज़ उनसे छिप नहीं सकती. उसे सबसे आगे जाने की भी ज़रूरत नहीं है, तो वह अचानक गंभीर रूप से घायल कैसे हो गई?"
"इसमें कोई गलती नहीं है।" काले बालों वाले श्रेष्ठ ने ठंडे स्वर में कहा। “राजा सागर ने उसके लिए कई उच्च कुशल डॉक्टरों को नियुक्त किया, लेकिन उस बुढ़िया की चोटें बहुत गंभीर हैं। उसे कोई नहीं बचा सकता. शांतसागर पास पर अब यह कोई रहस्य नहीं है! यदि वह लड़ना जारी नहीं रखती है और अपमानजनक जीवन जीती भी है, तो भी वह ज्यादा से ज्यादा आठ साल और जिंदा रहेगी। अगर वह अपनी पूरी ताकत से लड़ेगी तो उसकी उम्र और भी कम हो जाएगी।”
“ज्यादा से ज्यादा आठ साल तक?” अंगद यह कहने से खुद को नहीं रोक सका, "वृत्तिका अग्रज के बिना, क्या अग्रज परिवार खत्म नहीं हो जायेगा ?"
"उज्जैन प्रांत के पांच संत वंश जल्द ही चार हो जाएंगे।" काले बालों वाले श्रेष्ठ ने सिर हिलाया।
एक संत मंडल का Expert ही वह वजह है जिससे संत वंशों की नींव सही सलामत रहती है।
इसी तरह, संत Expert के बिना, एक परिवार सामान्य हो जाता था।
काले बालों वाले श्रेष्ठ ने ठंडे स्वर में कहा, "अग्रज परिवार उज्जैन में इतने सारे महत्वपूर्ण पदों और हितों पर कब्जा करने का अधिकार भी खो देगा।" "तो ठीक है, तुम्हे अग्रज परिवार के पास जाना चाहिए ताकि ईशान्वी और वरुण अग्रज नाम वाले उस लड़के का बीच विवाह समझौते को मांगो और उसे मौके पर ही फाड़ दो! अभी का अग्रज परिवार. हमारे साथ विवाह गठबंधन में शामिल होने के लायक नहीं है।"
"जी पिताजी।" अंगदने सम्मानपूर्वक उत्तर दिया।
"हालांकि, उस बुढ़िया के मरने से पहले, उनके साथ बदतमीजी करने की कोई जरूरत नहीं है।" बोलने के बाद काले बालों वाले श्रेष्ठ ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वहां से अंगद बादल चुपचाप चला गया।
"क्या? विवाह अनुबंध को रद्द किया जा रहा है?” ईशान्वी ने सदमे में अपने पिता को देखा। क्या उन्होंने इसका विरोध नहीं किया था? वह अचानक अपना मन क्यों बदल रहे है?
"मैं सिर्फ तुम्हे पहले ही बता रहा हूं।" अंगद मुस्कुराया। "आज, हम अग्रज हवेली जायेंगे तुम्हारी सगाई रद्द करने के लिए।"
ईशान्वी यह पूछे बिना नहीं रह सकी, "क्या अग्रज परिवार विवाह अनुबंध को शांति से सौंप देगा?"
"वे करेंगे" अंगद बादल ने आत्मविश्वास से कहा। उसके पिता को एक अच्छे दोस्त से खबर मिली थी कि अग्रज परिवार को उनके पूर्वज की होने वाली मौत के बारे में पहले से ही पता था। ये बड़े परिवार खुद को अच्छी तरह से जानते थे। हठ करने से उनका अपमान ही होग।
ईशान्वी ने तुरंत कहा, "पिताजी, मैं बस सगाई रद्द करना चाहती हूं। मैं उनके साथ झगड़ा नहीं करना चाहती और हमारे परिवारों के बीच के अच्छे रिश्तों को बर्बाद नहीं करना चाहती। आप अग्रज चाचा को चर्चा के लिए क्यों नहीं आमंत्रित करते."
“इतनी परेशानी उठाने की कोई जरूरत नहीं है।” अंगद मुस्कुराया। “ठीक है, यह मामला तुम मुझ पर छोड़ दो। बस घर पर रहो और अच्छी खबर का इंतजार करो।"
पूरे दिन प्रैक्टिस करने के बाद, भले ही वरुण ऊर्जावान और उत्साहित था, फिर भी उसे अपनी ऊर्जा की थकावट के कारण आराम करना पड़ा। वह स्टडी रूम में वह काम शुरू करने के लिए आया जो वह प्रतिदिन करता था - पेंटिंग।
टेबल पर कागज का एक टुकड़ा पड़ा हुआ था और उसके बगल में एक सुंदर रंग पैलेट (Palette) था। उसमे रखे सभी रंग उच्च गुणवत्ता के थे।
वरुण ने अपने दिल से पेंटिंग करना शुरू किया। उसे बचपन से ही पेंटिंग बनाना था।
शायद ऐसा इसलिए था क्योंकि उनकी माँ पेंटिंग में अच्छी थीं और उन्होंने उसे पेंटिंग बनाना सिखाया था। जब वह छोटा था तो यही उसे सबसे ज्यादा पसंद था। कल्पना कीजिए कि एक तीन साल का बच्चा लगभग आठ घंटे तक लगातार पेंटिंग करता है, इस हद तक कि वो थकान को शिकायत किए बिना और खाना खाने को भी भूल जाता था। रंगों से कपड़े गंदे होने के बावजूद वो हंसता रहता था। उनकी माँ ने कहा था, 'मेरा बेटा बेहद प्रतिभाशाली है. वह निश्चित रूप से दुनिया के नंबर एक कलाकार बनेंगे।' हर पेंटिंग अपने वजन के बराबर सोने की होगी।”
उनका जन्म अग्रज परिवार में हुआ था; उसके माँ बाबा उससे बहुत प्यार करते थे, इसलिए वह लापरवाह था।
हालाँकि, जब वह छह साल का था, तब एक बड़ी आपदा में एक लाख से अधिक लोग मारे गए थे। उसकी मां भी अपवाद नहीं थीं।
उसके बाबा ने अपनी पूरी ताकत से उसकी रक्षा की और उज्जैन प्रांत चले आए, तो उसने साधना पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। हालाँकि, वह अब भी हर दिन दो घंटे पेंटिंग करते थे। जब भी वह पेंटिंग करता, तो वह प्रैक्टिस की अपनी थकान को भूल जाता। उसे ऐसा महसूस होता था की मानो वह उस समय में लौट आया हो जब वह छोटा था। उसकी माँ उसे संकेत देती थी, और उसका मन अतुलनीय रूप से शांत होता था।
अब वह 15 साल का हो गया था।
दस सालों से ज्यादा समय तक पेंटिंग करने और कई निपुण कलाकारों द्वारा सिखाए जाने के बाद, उसने बहुत पहले ही अपने शिक्षकों को पेंटिंग के मामले में पीछे छोड़ दिया था। उसकी माँ सही थी। उसकी प्रतिभा सच में उत्कृष्ट थी - कम से कम सेबर आर्ट के प्रति उसकी प्रतिभा से अधिक।
लेकिन उसका क्या फायदा? क्या सर्वश्रेष्ठ कलाकार दानवों को मार सकता है?
ठक ठक ठक
रूम के बाहर दरवाजे पर जल्द ही दस्तक हुई।
हुंह? वरुण ने उत्सुकता से बाहर देखा। जब मैं आमतौर पर पेंटिंग करता हूं तो कोई मुझे परेशान नहीं करता। क्या चल रहा है?
उसने ब्रश नीचे रखा, फिर दरवाज़ा खोला। उसके पिता विशंभर अग्रज बाहर खड़े थे। उनकी प्रसन्न मुस्कान चेहरे पर नही थी; उनके अभी के हावभाव बहुत गंभीर थी.
"वरुण, जल्दी से मेरे पीछे पूर्वज बंगले पर चलो," विशंभर अग्रज ने कहा।
"ठीक है।" वह बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत ही अपने पिता के पीछे चल दिया। "बाबा, आप हाल ही में पूर्वज बंगले में बार बार क्यों आ जा रहे हैं?"
"कुछ भी नहीं है।" विशंभर ने विस्तार से नहीं बताया।
“तो फिर अब हम पूर्वज बंगले की ओर क्यों जा रहे हैं?” वरुण ने फिर पूछा। एक जूनियर सदस्य के रूप में, वह सालाना उंगलियों पर गिना जा सके इतनी बार पूर्वज बंगले का दौरा करते थे।
विशंभर ने अपने बेटे की ओर देखा और कहा, "यह ईशान्वी बादल के साथ तुम्हारी सगाई के बारे में है। हमने अपने परिवारों के बीच चर्चा के बाद सगाई रद्द करने का फैसला किया।
“सगाई रद्द करने का फैसला ?” वरुण हैरान था। "बाबा, इसे अचानक रद्द क्यों किया जा रहा है?"
"तुम इसे रद्द करना बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हो क्या ?" विशंभर ने अपने बेटे की ओर देखते हुए पूछा।
"वैसा कुछ नही है।" वरुण ने तुरंत अपना सिर हिलाया। “मैं ईशान्वी से हर कुछ महीनों में केवल एक बार मिलता हूं। हमारे व्यक्तित्व मेल नहीं खाते, इसलिए सगाई का रद्द होना मेरे लिए ही अच्छी बात है।'
इस वर्ष वह केवल पन्द्रह वर्ष का था; वह प्यार के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। उसने ईशान्वी को एक परिचित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाली छोटी बहन के रूप में देखा। और अधिक कुछ भी नहीं।
“यह अच्छा है कि तुम ऐसा सोचते हो। हमारे परिवार पहले ही सगाई रद्द करने पर सहमत हो चुके हैं,' विशंभर ने कहा। “जब हम पूर्वज बंगले पर पहुँचेंगे तो तुम्हें बस सुनना होगा। ज्यादा मत बोलना।”
वरुण ने सिर हिलाया। "जी।"
अग्रज परिवार का पूर्वज बंगला उज्जैन के पश्चिमी जिले में स्थित था। इसने एक बहुत बड़े क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया - वहाँ दो हज़ार से अधिक वंश के लोग रहते थे। उसके(यहां बंगला) कब्जे वाली जमीन के केंद्र से, दक्षिण से उत्तर की ओर आधे किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जा सकती थी। (कब्जे वाली जगह का क्षेत्रफल लगभग 864,285.713 sq.m)
अग्रज परिवार की नींव ग्रामीण इलाकों में थी। दानवों के खतरे के कारण, ग्रामीण इलाकों में लोगों ने अपनी रक्षा के लिए किले बना लिए थे। हर किले के अंदर लगभग हजारों लोग थे; एक ही कबीले के लोगों का एक किले में इकट्ठा होना बहुत आम बात थी। सहस्राब्दी वंश के लोगों के जन्म लेने के बाद, अग्रज परिवार के पास तीन बड़े किले थे और वहां के दस हजार से भी ज्यादा सदस्य थे। उज्जैन प्रांत में इतने बड़े कुछ ही वंश थे।
अग्रज वंश की खास बात यह थी कि उनके पास एक संत Expert था। वे तुरंत उज्जैन प्रांत में सर्वोच्च स्थिति वाले पांच प्रमुख संत वंशों में से एक बन गए।
"श्रेष्ठ।"
"श्रेष्ठ।"
पूर्वज बंगला बहुत व्यवस्थित था। गश्त कर रहे वंश के कुछ सदस्यों ने जब दोनों को देखा तो झुके और विशंभर अग्रज का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
विशंभर अग्रज, अग्रज परिवार के तीन सबसे मजबूत सदस्यों में से एक थे। उन्हें अभी भी युवा ही माना जाता था और उनके संत Expert बनने की थोड़ी सी आशा भी थी। वो वंश का अगला वंश हेड बन सकता था।
"हम्म?"
वरुण अपने पिता के पीछे-पीछे अतिथि कक्ष में चला गया।
हॉल के दोनों ओर पहले से ही कई लोग बैठे हुए थे। एक तरफ अग्रज परिवार के लोग थे और दूसरी तरफ बादल परिवार के लोग थे। हालाँकि, माहौल स्पष्ट रूप से बिल्कुल ठीक नहीं था। एक नज़र में, वरुण बता सकता था कि उसके परिवार के श्रेष्ठ बहुत अच्छे मूड में नहीं दिख रहे थे।
"विशंभर भाई भी आ गया।" अंगद बादल खड़ा हुआ और मुस्कुराया। "क्या तुम विवाह अनुबंध लेकर आए हैं?"
"हाँ।" विशंभर अग्रज ने थोड़ा सिर हिलाया।
अंगद ने मुस्कुराते हुए कहा, "अन्य श्रेष्ठों को सगाई रद्द करने पर कोई आपत्ति तो नहीं है। मेरा मानना है कि यह आपके लिए भी ऐसा ही है, क्या मैं सही हूं, भाई विशंभर?"
विशंभर अग्रज वहीं खड़ा रहा और हंसा। “यदि दोनों वंशों का विवाह के माध्यम से घनिष्ठ संबंध बनाने का इरादा है, तो यह अच्छा होगा। हालाँकि, अब कोई इरादा नहीं लग रहा है, इसलिए सगाई को जल्दी रद्द करना बेहतर ही होगा। यह विवाह अनुबंध है।”
उसने एक कागज़ निकाला और दोनों हाथों से अंगद को दे दिया।
अंगद ने अनुबंध मिलने के बाद, उसे खोला और करीब से देखा। उस पर हस्ताक्षरित नामों को देखकर उसने थोड़ा सिर हिलाया। यह बेशक वही विवाह समझौता था। दोनों पूर्वजों की लिखावट नकली नहीं बनाई जा सकती थी, जो अनुबंध पर थी।
अग्रज परिवार के एक गंजे, पतले श्रेष्ठ ने कहा, "अंगद, विवाह समझौते को यहीं फाड़ दो।"
“हाहा! क्या आप चिंतित हैं कि मैं इसे एक महत्वपूर्ण क्षण पर अनुबंध को वापस लाऊंगा, और वरुण अग्रज को मेरी बेटी से शादी करने के लिए इसका उपयोग करूंगा।" अंगद हंसा। "चिंता मत करो, मैं ऐसा कुछ भी बेशर्मी नहीं करूंगा!"
ऐसा कहते ही, अंगद ने विवाह अनुबंध को फाड़ दिया।
"मैंने पहले ही विवाह अनुबंध फाड़ दिया है, यहां का हर कोई गवाही दे सकता है। अब आप सभी निश्चिंत हो सकते हैं।” अंगद मुस्कुराया जब उसकी नज़र अग्रज परिवार के श्रेष्ठों पर पड़ी। "मैं अब और हस्तक्षेप नहीं करूंगा।"
बोलते-बोलते वह बाहर चला गया। बादल परिवार के बाकी के सदस्य भी उसके पीछे-पीछे चले गए।
जब वह वहां से गुजरा जहां वरुण था, तो अंगद रुक गया और मुस्कुरा दीया। “मेरे प्यारे भतीजे, ध्यान रखना। अब तुम्हारा मेरी बेटी ईशान्वी से कोई संबंध नहीं है।"
"हां, कोई भी संबंध नही है।," वरुण ने उत्तर दिया।
तभी अंगद ने अपना सिर हिलाया और सभी को लेकर चला गया।
विशंभर ने अंगद बादल को जाते हुए देखा और थोड़ी सी भौंहें चढ़ा लीं। उन्होंने शांति से कहा, "वरुण, सगाई रद्द कर दी गई है। तुम वापस जा सकते हैं. मेरे पास अभी भी ऐसे कुछ मामले हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।
"जी।" वरुण ने श्रेष्ठों की ओर देखा और आज्ञाकारी ढंग से चला गया।
गड़गड़ाहट की आवाज के साथ अतिथि कक्ष का दरवाज़ा बंद हो गया. मोमबत्ती की रोशनी से कक्ष जगमगाता रहा।
“ये क्या बात हुई अब तो पानी सर से ऊपर चला गया!” गंजे, पतले श्रेष्ठ ने छड़ी को ज़मीन पर पटक दीया, जिससे हलकी बहरा कर देने वाली आवाज़ पैदा हुई।
“ऐसा लगा की जैसे हम बातचीत कर रहे थे, लेकिन वास्तव में, हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। क्या हम अपनी चमड़ी मोटी करके विवाह बंधन में बंध सकते हैं?” एक सांवले श्रेष्ठ ने व्यंग्य किया। "अगर हमने बादल परिवार के साथ झगड़ा खड़ा करने की हिम्मत की, तो शायद हमें बादल परिवार के मुखिया द्वारा मौत के घाट उतार दिया जाएगा!"
“सगाई का रद्द हो जाना भी अच्छी बात है। जब यह केवल दो बच्चों के बीच विवाह की बात है तो बादल परिवार पर दबाव डालने के लिए सगाई का उपयोग करना क्या उपयोगी होगा? बादल परिवार बस हमसे द्वेष रखेगा। विवाह गठबंधन एक दूसरे की सहायता करने के लिए है। यदि हम शत्रु होते तो मित्रता न करना ही बेहतर होता। यह शादी हमारे अग्रज परिवार के लिए ईमानदारी से कहे तो मामूली थी। तीसरी बहन की चोटों ने हमारे अग्रज परिवार की नींव को हिला दिया है!" एक खूबसूरत श्रेष्ठ ने अपने आगे वाले मोटे श्रेष्ठ की ओर देखते हुए कहा। "वंश हेड, क्या हम तीसरी बहन की चोटों का इलाज नहीं कर सकते?"
मोटे श्रेष्ठ ने भौंहें सिकोड़ लीं। “तीसरी बहन दो दिनों में उज्जैन लौट आएगी। जब ऐसा होगा तो हम इसके बारे में बात करेंगे।”
विशंभर ने सुना और भौंहें सिकोड़ लीं।
अग्रज परिवार का स्तंभ ढहने के कगार पर था; अग्रज परिवार के श्रेष्ठ भी चिंतित थे।
अग्रज परिवार ने इस खबर को गुप्त रखा और केवल बड़ों को ही इसके बारे में पता था। यदि ऐसी खबर फैलती, तो दस हजार से अधिक वंश के सदस्य दहशत में आ जाते। इससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती।
अब.
संत वंश के अन्य चार कुलों के बड़े लोग भी जानते थे, लेकिन उन्होंने भी इसका प्रसार नहीं किया। उन्हें डर था कि उनके अज्ञानी जूनियर अग्रज परिवार को नाराज कर देंगे। आख़िरकार, वृत्तिका अग्रज अभी तक मरी नहीं थी! भले ही वह मर गई हो, उसके कई संत Expert दोस्त थे। हालाँकि, उसके संत Expert दोस्त तब तक हस्तक्षेप नहीं करेंगे जब तक कि चीज़े हद से बाहर न चली जाए।
संत एक्सपर्ट के बिना, अग्रज परिवार कई भारी ज़िम्मेदारियाँ उठाने में सक्षम नहीं होगा। यदि वे अपनी ज़िम्मेदारियाँ नहीं उठा सकते तो स्वाभाविक रूप से वे इतनी ज्यादा ताकत का आनंद नहीं ले पाएंगे।
जिम्मेदारियां और शक्ति समान थे।
नश्वर मंडल से लेकर सम्मानित संत मंडल Expert तक, वर्तमान में, कोई भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है।
जब तक कोई नश्वर व्यक्ति पवित्रतत्व पड़ाव में पहुंचता है, उसे बीस साल की उम्र में पांच साल तक सेना में सेवा करनी होगी, वो भी लिंग की परवाह किए बिना!(स्त्री पुरुष समानता) केवल आधे ही जीवित वापस लौटेंगे। हालाँकि, लोग फिर भी पवित्रतत्व पड़ाव तक पहुँचना चाहते थे क्योंकि राजन्यायालय के नियमों ने उन्हें कई व्यवसायों से मना कर दिया था जो पवित्रतत्त्व पड़ाव से नीचे थे, यदि वे इतने कमजोर थे कि सेना के लिए उनका कोई महत्व नहीं था। तो वे केवल निचले स्तर पर खेती करने वाले ही हो सकते हैं, और सबसे दयनीय जीवन जी सकते हैं।( इस दुनिया में किसान की कोई कीमत नहीं है। )
जहां तक संतो की बात है, वे मानवता की रीढ़ थे। प्रत्येक संत ने अपना पूरा जीवन लड़ने और लोगों की सुरक्षा करने में बिताया था। भले ही वे आराम करने के लिए अपने घर लौटते हों, उन्हें अपने शहर की भी रक्षा करनी होती थी।
परिणामस्वरूप, संत शानदार और ऊंचा जीवन जीते थे। उनके कुलों के लोग उनकी महिमा करते हुए थका नही करते थे। जब संत का निधन हो जाता था या उनके वंशवाले इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी लेने में असमर्थ होते थे, तो संत वंश के लोग उनके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण पदों से सेवानिवृत्त हो जाता थे।
जब वरुण घर पहुंचा तो लगभग अंधेरा हो गया था।
“वरुण, जल्दी से खाना खा लो। मैंने सुना है कि तुम और विशंभर चाचा पूर्वज बंगले पर गए थे। मुझे लगा कि तुम आज रात के खाने के लिए वापस नहीं आ रहे हैं। निधी दलिया और मिठाई खाने बैठी थी। वरुण उसके सामने बैठ गया, और एक नौकरानी दलिया का कटोरा लेकर आई। जब उसका मन भटक गया था तो उसने कुछ दलिया पी लिया।
“तुम बात क्यों नहीं कर रहे हो? क्या हुआ?" निधी ने पूछा।
"आं।"
वापस होश में आने के बाद, वरुण ने लापरवाही से कहा, "हमारे परिवारों ने चर्चा के बाद ईशान्वी के साथ मेरी सगाई को तोड़ने का फैसला किया है।"
“सगाई टूट गई?” यह कहते हुए निधी की आंखें चमक उठीं।
“हाँ, यह तो बस अभी हुआ। विवाह अनुबंध को मौके पर ही फाड़ दिया गया।” वरुण ने सिर हिलाते हुए कहा।
निधी ने उसे ध्यान से देखा और पूछा, “क्यों? क्या तुम सगाई रद्द होने से बहुत नाराज हो? तुम हैरान होकर दलिया क्यों पी रहे हो?”
"नहीं।" वरुण ने तुरंत अपना सिर हिलाया। "ऐसा नहीं है कि तुम्हे पता नहीं है कि ईशान्वी और मैं एक दूसरे से मेल नहीं खाते हैं। वह सगाई रद्द होने से खुश है और मुझे भी राहत है। यह हम दोनों के लिए अच्छी बात है. मैं दुखी कैसे हो सकता हूँ?”
“तो फिर तुम असमंजस में क्यों हैं?” निधी ने पूछा।
"मुझे ऐसा लग रहा है कि तो कुछ ठीक नहीं है," वरुण ने भौंहें चढ़ाते हुए कहा। “सगाई उस समय दोनों पूर्वजों द्वारा व्यक्तिगत रूप से की गई थी। भले ही वे सगाई रद्द करने आए हों, बादल परिवार ने कम से कम अपने तीन नायकों को भेजना चाहिए था। यह मेरे अग्रज परिवार को सम्मान दिखाने का सबसे बुनियादी तरीका है। हालाँकि, उन्होंने केवल पाँचवें और सबसे बेकार बच्चे अंगद बादल को भेजा। क्या वह मेरे अग्रज परिवार को नीची दृष्टि से नहीं देख रहा है? यह मेरा पहला शक है।
“दूसरी बात, हॉल के अंदर वंश हेड और श्रेष्ठों के चेहरे पर अच्छे भाव नही थे। लेकिन शुरू से अंत तक वे पीछे रहे। वंश हेड का स्वभाव इतना अच्छा कब से हो गया?”
"तीसरी बात, जब मेरे बाबा और बाकियों के सामने अंगद आमतौर पर चापलूस, नीच रवैया अपनाता है। परन्तु आज तो वह कुछ अधिक ही उद्दण्ड था। इस तरह के व्यवहार के लिए उसे किसने उकसाया?”
“सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सगाई रद्द करने के पीछे कोई कारण होना चाहिए। दोनों पूर्वजों के मंजूरी से तय हुई सगाई रद्द क्यों हुई?”
वरुण ने निधी की ओर देखा। "मैं अनुमान लगा रहा हूं कि या तो बादल परिवार को बहुत बड़ा समर्थन मिला है या यह मेरे अग्रज परिवार के कारण है।"
निधी हैरान रह गई। "वरुण, मैं वास्तव में यह समझ नहीं पा रहा हूं कि तुमने एक बार में इस सब के बारे में कैसे सोचा।"
“यह सिर्फ बेबुनियाद अटकलें हैं। चूँकि बाबा ने मुझे नहीं बताया, स्वाभाविक रूप से उनके पास अपने कारण होंगे। वरुण ने मुस्कुराया।
“यह सोचना कि जिस व्यक्ति की सगाई अभी रद्द हुई थी वह अभी भी मुस्कुरा सकता है थोड़ा कठिन है। जल्दी करो और अपनी पेस्ट्री खाओ," निधी ने मुस्कुराते हुए आग्रह कि
9 फरवरी, उज्जैन शहर के बाहर की दलदली जमीन में। वातावरण में उदासी छाई हुई थी।
चीख़! एक उड़नेवाले बीस्ट की मधुर चीख गूंज उठी। बादलों की गड़गड़ाहट की तरह पंखों की आवाज करते हुए एक विशालकाय उड़नेवाला बीस्ट तेजी से नीचे आया। इसकी पीठ पर दो आकृतियाँ बैठी थीं।
बूम!
जैसे ही उड़नेवाला वाहन जमीन के पास आया, उसके विशालकाय पंखों से बिजली गिरने से पूरा जंगल कांप उठा। बिजली के बोल्ट नष्ट होने से पहले दूर तक उड़ गए। पंछी की पीठ से दो आकृतियाँ उतरीं। एक मध्यम आयु वर्ग की महिला थी, दूसरी छड़ी थामे एक बूढ़ी महिला।"जूनियर मुस्कान, अब जब मैं अपने घर वापस आ गई हूं, तो तुम्हे मेरे साथ आने की जरूरत नहीं है। वापस जाओ,' बुढ़िया ने छड़ी का सहारा लेते हुए मुस्कुराते हुए कहा।
"बहन वृत्तिका।" अधेड़ उम्र की महिला की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसकी "बहन वृत्तिका" पहले इतनी बूढ़ी नहीं थी। उसकी गंभीर चोटों से उसकी उम्र का पता चल गया। हालाँकि, कोई अभी भी बता सकता है कि जब वह छोटी थी तब वह एक सुंदर औरत रही होगी।"मुझे डर है कि इस विदाई के बाद हमारा दोबारा मिलना मुश्किल हो जाएगा," वृद्ध महिला ने प्रसन्नता से आह भरते हुए कहा। “हालांकि, मुझे लगता है कि यह अच्छा हुआ की, कम से कम मैं मरने से पहले अपने घर लौट सकी हूं और आखिरी कुछ साल यहां बिता सकती हूं। युद्ध में जो लोग मारे जाते है वे धूल के ढेर के अलावा और कुछ नहीं होते हैं।”
"बहन वृत्तिका, अगर आपको मेरी मदद की ज़रूरत हो तो बस एक पत्र भेज देना। मैं, मुस्कान प्रजापति, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगी," मध्यम आयु वर्ग की महिला ने गंभीरता से कहा।"अगर जरूरत पड़ी तो मैं ऐसा जरूर करूंगी।" बुढ़िया मुस्कुराई. "ठीक है, जल्दी वापस आओ।" (जैसा हम अक्षर जाने वाले को कहते ' आप आइए' जैसे)आखिरकार उड़नेवाले बीस्ट की पीठ पर कूदने से पहले अधेड़ उम्र की महिला ने ध्यान से बूढ़ी महिला की ओर देखा। जल्द ही, उड़नेवाले बीस्ट ने अपने पंख फड़फड़ाये और बिजली के साथ उसने शून्यता में जाना शुरू किया।
शूऽऽऽ
बिजली और गड़गड़ाहट के साथ, उड़नेवाला बीस्ट आकाश में उड़ गया और क्षितिज में गायब हो गया।वृद्ध महिला ने उज्जैन शहर की ओर देखने से पहले अपने साथी को जाते हुए देखा। वह हंसी। यह घर जाने का समय है। नेचर ने मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया है, मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने की अनुमति दी है!
डिंग!
जब बुढ़िया ने अपनी छड़ी से जमीन को हल्के से थपथपाया तो लहरों ने उसे घेर लिया। असंख्य लहरें सभी दिशाओं में फैल गईं - 1000 फीट के दायरे को घेर लिया।उज्जैन शहर की ओर चलते समय उसने अपनी छड़ी पकड़ रखी थी - जो पूरी तरह से लहरों से ढकी हुई थी। उसका हर कदम सैकड़ों फीट की दूरी तय करता था। जब वह रास्ते में कुछ यात्रा कर रहे व्यापारियों के पास से गुजर रही थी तब भी किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। वे हँसते रहे और बातें करते रहे।
वह कुछ क्षण बाद शहर के दरवाजे पर पहुंची।उज्जैन शहर।बूढ़ी औरत ने अपनी छड़ी पकड़ ली और अपने सामने के राजसी शहर को घूरने लगी।यह उसका घर था। वह स्थान जहाँ वह तब रहती थी जब वह छोटी थी!
जैसे-जैसे वह आगे बढ़ती गई, बुढ़िया मुस्कुराती गई। गेट पर भारी संख्या में लोगों के बावजूद, गार्डों सहित किसी ने भी बूढ़ी महिला को नहीं देखा। यह ऐसा था मानो उसका अस्तित्व ही न हो। वह सड़कों से गुजरती हुई अग्रज परिवार की पुश्तैनी हवेली (पूर्वज बंगला) में पहुंची।
वह पुश्तैनी हवेली में दाखिल हुई.कई वंश के कई लोग पुश्तैनी हवेली में गश्त कर लगा रहे थे, लेकिन इसी तरह, उनमें से कोई भी बुढ़िया को नहीं देख सका।घुट! घुट! घुट! पुश्तैनी हवेली के एक आँगन के अंदर, एक मोटा श्रेष्ठ धीरे धीरे स्वर में शराब पी रहा था।"दानवीर, तुम मुझसे घूमर क्या पी रहे हो?" आँगन में एक आवाज़ गूंजी।
मोटा श्रेष्ठ डर से काँप उठा। उसने चारों ओर देखा और खुदको यह पूछने से न रोक सका, "तीसरी बहन, क्या यह तुम हो? तीसरी बहन?”
आंगन में हवा से छड़ी के साथ मुस्कुराती हुई एक बूढ़ी औरत दिखाई दी।
"तीसरी बहन।"
मोटे श्रेष्ठ की आँखें लाल हो गईं। वह वृत्तिका का इकलौता छोटा भाई था। परिवार के अन्य श्रेष्ठ व्यावहारिकता के कारण उसे "तीसरी बहन" कहकर संबोधित करते थे। अपने हजारों साल लंबे इतिहास के कारण अग्रज वंश बहुत बड़ा हो गया था था। परिवार के कई सदस्य कुछ पीढ़ियों से अलग रहना शुरू कर चुके थे। मोटे श्रेष्ठ का नाम देववीर अग्रज था, जो अग्रज परिवार के मौजूदा वंश हेड थे। वह वृत्तिका अग्रज से लगभग बीस वर्ष छोटा थे। इसलिए, जब वह छोटा थे तो उनका पालन-पोषण वृत्तिका ने ही किया था। इसीलिए वह उसे अपनी बहन और माँ दोनों की तरह मानता था।उसके दिल में, उसकी बहन हमेशा युवा, सुंदर और सर्वशक्तिमान रही थी। अब उसकी उम्र काफी हो गई है"क्यों रो रहे हो? क्या मैं ठीक से नहीं जी रही हूँ?” बुढ़िया ने मुस्कुराते हुए कहा।"तीसरी बहन, क्या तुम सचमुच अपनी चोटों का इलाज करने में असमर्थ हो?" मोटे श्रेष्ठ ने पूछा।
बुढ़िया ने शांति से कहा, "जब तक मैं पूरी ताकत से नहीं लड़ती, मुझे अगले आठ साल तक जीवित रहना चाहिए।" “मनुष्य बीमारी और मृत्यु से प्रभावित होते हैं, और संत का जीवनकाल भी सीमित ही होता है। इसमें दुःखी होने वाली क्या बात है? अगले कुछ सालों में मुझे अग्रज परिवार को वापस पटरी पर लाने के लिए काफी समय मिलेगा। क्या क्या हुआ जब मेरी गंभीर चोटों की खबर उज्जैन प्रांत तक पहुँची?”
हमारे परिवार ने बादल परिवार के साथ सगाई रद्द कर दी। यह उस छोटे बच्चे, वरुण अग्रज की सगाई थी," मोटे श्रेष्ठ ने कहा। “बाकी के चार संत वंश केवल कुछ गंदी चालों में लगे हुए है। उन्होंने वास्तव में हमारे अग्रज परिवार को उकसाने की हिम्मत नहीं की।"
"हाँ। उस समय, वचन बादल हमारे वंश में सगाई का उपयोग अपने वंश को बेहतर बनाने के लिए करना चाहता था। अब जब मैं गंभीर रूप से जख्मी हो गई हूं, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उन्होंने ये सगाई रद्द कर दी।
बुढ़िया ने निर्देश दिया, "ठीक है, दानवीर."“तीसरी बहन, मैं पहले से ही 90 साल का हूँ। मैं अग्रज परिवार का वंश हेड भी हूं। क्या आप मुझे मेरे नाम से बुला सकती हैं?” मोटा श्रेष्ठ दुखी होने के अलावा कुछ नहीं कर सका।
“ओह, ठीक है, ठीक है। मैं तुम्हें शर्मिंदा नहीं करूंगी,' बुढ़िया ने मुस्कुराते हुए कहा। "दानवीर अग्रज, वंश के सभी श्रेष्ठों को अग्नि हॉल में इकट्ठा करो। मैं उनसे मिलना चाहती हूं।”“क्या? दानवीर अग्रज, नही मेरा नाम देववीर अग्रज है,' मोटे श्रेष्ठ ने बुदबुदाया और वह तेजी से दूसरे श्रेष्ठों को इकट्ठा करने गया।उसकी बहन उसकी माँ की तरह थी जिसने उसे पाला था। उसने उसकी रक्षा की और उसे यहाँ तक आने में मदद भी की थी।
अपनी बड़ी बहन को उसे "दानवीर" कहते हुए सुनकर वंश हेड अपने कदम उछालकर चलने लगे।अग्रज परिवार की पुश्तैनी हवेली, अग्नि हॉल।वंश से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें ही यहां तक पहुंचते थी। आज अग्नि हॉल के आसपास के क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा की गई थी।मुख्य हॉल में.वृत्तिका अपनी छड़ी के साथ वहाँ खड़ी थी। उसने हॉल में लगी पट्टिका को देखा: "अग्नि।"वंश हेड और श्रेष्ठ सभी सम्मानपूर्वक खड़े थे, कुछ आवाज निकालने की भी हिम्मत नहीं कर रहे थे।
उम्र के हिसाब से.
वृत्तिका इस साल 112 साल की थीं। वह परिवार में सबसे बूढ़ी थीं। ताकत के मामले में, वृत्तिका 35 साल की उम्र में संत बन गई थी। उसने लगभग अस्सी वर्षों तक अग्रज परिवार की रक्षा की थी और अग्रज परिवार अस्सी वर्षों तक फलता फूलता (ताकत में) रहा था। अग्रज परिवार में उसकी प्रतिष्ठा के बारे में कोई संदेह नहीं था। उसके एक ही आदेश से, कई वंश के लोग मरने में संकोच नहीं करेंगे।
बहुत देर तक पट्टिका पर "अग्नि" शब्द को देखने के बाद, वृत्तिका पलटी। उसकी नज़र उपस्थित सभी श्रेष्ठों पर पड़ी। सभी श्रेष्ठों ने घबराकर सिर झुकाया।
"क्या हमारे अग्रज परिवार की युवा पीढ़ी में कोई प्रतिभा है, जिसके पास संत बनने के चांस ज्यादा है?" वृत्तिका ने पूछताछ की। हालाँकि अग्रज परिवार एक हजार साल से भी अधिक समय से उज्जैन प्रांत में जड़ें जमाए हुए था, लेकिन इसमें केवल दो ही संत हुए थे। उनमें एक पांच सौ साल पहले के मुखिया प्रवलराज अग्रज थे, जबकि दूसरी वृत्तिका अग्रज थी। उनके युग में अग्रज परिवार को अपनी ताकत के चरम तक पहुंचने की अनुमति दी। वृत्तिका को सबसे ज्यादा क्या चाहिए था.अग्रज वंश के इतिहास में वंश तीसरे संत का पालन करने में सक्षम हो।
पहले, वह धैर्यपूर्वक पालन-पोषण के योग्य एक उपयुक्त कैंडिडेट की तलाश कर सकती थी। हालाँकि, अभी समय बहुत महत्वपूर्ण था और वह केवल उनमें से ही चुन सकती थी जो उपलब्ध थे।
“विशंभर काफी प्रतिभाशाली है। उसने 19 साल की उम्र में सेबर की गुप्त तकनीक का पता लगा लिया और 30 साल की उम्र में सेबर बल में इनसाइट्स प्राप्त की। अब, वह केवल 47 साल का हैं। एक गंजे श्रेष्ठ ने कहा, 'उसके संत बनने की थोड़ी सी उम्मीद है।'
"विशंभर?"वृत्तिका ने विशंभर को देखा।"बुआ।" मोटा विशंभर तुरंत झुक गय"क्या तुमने अपना कोर बना लिया है?" वृत्तिका ने पूछा।विशंभर ने अपना सिर हिलाया।वृत्तिका ने भौंहें चढ़ा दीं। 47 साल की उम्र में कोर को न बनाने के कारण उनके संत बनने की संभावना बहुत कम हो गई।
"बच्चों के बारे में क्या?" वृत्तिका को पूछा।
"बच्चों में से, उनमें से तीन बुरे नहीं हैं," वंश हेड देववीर अग्रज ने तुरंत कहा। “आदर्श अग्रज इस साल 23 साल का है और वो अखंडता पड़ाव में है। वह शकुंतला दर्रे पर सैन्य सेवा के बीच में है। उसने 19 साल की उम्र में गुप्त तकनीक का पता लगा लिया। दूसरी चित्रा अग्रज है । वह 16 साल की है और उसने 12 साल की उम्र में शीर्ष स्तर की तलवार आर्ट में महारत हासिल कर ली है। विशंभर का बेटा, वरुण अग्रज भी है। वह इस साल 15 साल का है, और 13 साल की उम्र में उसने सर्वोच्च श्रेणी की सेबर आर्ट में महारत हासिल कर ली है। चित्रा और वरुण दोनों भी युवा हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक गुप्त तकनीक का पता नहीं लगाया है।
वृत्तिका चुप हो गई।
आदर्श को गुप्त तकनीक का पता तभी चल गया था जब वह 19 वर्ष का था। संत बनने वालों के लिए यह बहुत देर हो चुकी थी! ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्हें पता नही था की आदर्श को बाल की इनसाइट कब तक मिलेगी। जब तक ऐसा हुआ, उसके संत बनने की संभावना और भी दूर हो गई।चित्रा और वरुण; एक 16 वर्ष की थी, जबकि दूसरा 15 वर्ष का था। समय की कमी थी, और उन्हें अभी तक मुख्य गुप्त तकनीक समझ में नहीं आई थी।
भले ही वह दूसरे सर्वश्रेष्ठ में से चुनना चाहे, लेकिन उन्हें अच्छा नहीं माना जा सकता।"आप सभी वापस जा सकते हैं," वृर्तिका ने ठंडे स्वर में कहा। “अगले कुछ सालो तक, पूरे परिवार के जूनियरों को बेहतर पोषण मिलेगा। यह वंश के लिए एक महत्वपूर्ण मामला है. इसके महत्व को और कुछ नहीं बढ़ा सकता। मरने से पहले, मैं किसी ऐसे को को देखना चाहती हूँ जिसके पास संत बनने का मौका हो।स्पष्टतः, उसे कोई कोई ऐसा दिखा नही। वह बस नौ से बारह साल के बच्चों में किसी प्रतिभाशाली के निकलने की आशा कर सकती थी।
"जी" वंश हेड और श्रेष्ठों ने एक स्वर में उत्तर दिया।“इस मामले से वंश का उत्थान और पतन शामिल है, इसलिए इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। यदि ऐसा होने पर कोई भी लाभ हड़प की कोशिश करता है, तो उसे वंश के नियमों के अनुसार दंडित किया जाएगा। वृत्तिका के इतना कहने के बाद, वह अपनी छड़ी लेकर बाहर चली गई।अग्रज वंश की पुश्तैनी हवेली में हलचल मच गई क्योंकि लोग अपने लिए क़ीमती गोलियाँ लेने के लिए कतार में खड़े थे।
"यह बहुत ज्यादा है।"
“इतनी सारी गोलियाँ दी जा रही है?”जिन कुलजनों को बहुमूल्य गोलियाँ प्राप्त हुईं वे आश्चर्यचकित रह गए। एक महिला ने अपनी सात साल बेटी का हाथ पकड़ा और अपनी बेटी की मासिक साधना के लिए संसाधन प्राप्त किए। वह भी सदमे में थी. “पहले, मेरी बेटी को प्रति माह केवल तीन चांदी के सिक्के और एक रक्तजीवन गोली मिलती थी। अब, उसे 30 चांदी के सिक्के और 10 रक्तजीवन गोलियाँ मिल रही हैं? अब वह हर तीन दिन में एक बार रक्तजीवन गोली का सेवन कर सकती है?
उसकी बेटी केवल सात साल की थी। उसने अभी तक साधना पर ध्यान भी केंद्रित नहीं किया और उन्हें केवल सबसे बुनियादी संसाधन दिए गए जो वंश ने युवा पीढ़ी को दिए थे। फिर भी, उसका कोटा काफी बढ़ गया था।"हर कोई बात सुनो, वंश हेड ने व्यक्तिगत रूप से घोषणा की है कि इस महीने से, 20 वर्ष से कम उम्र के सभी वंश के मेंबर्स को हर महीने दस गुना ज्यादा मात्रा में गोलियाँ और चांदी के सिक्के मिलेंगे।" वंश के सदस्य जो संसाधनों के वितरण के लिए जिम्मेदार थे, वे सभी को समझाने लगे। यह जल्द ही फैल गया, जिससे अग्रज परिवार की पुश्तैनी हवेली में रहने वाले लोग उदास हो गए।वंश के जिनियरों को उनकी साधना की प्रगति के अनुसार पाँच स्तरों में विभाजित किया गया था।
उदाहरण के लिए, चित्रा अग्रज और वरुण अग्रज सूची में शीर्ष पर थे। उनका विशेष पालन-पोषण किया जाता था।दूसरे और तीसरे स्तर भी थे.
और अब, सबसे सामान्य जूनियरों को प्रति माह 30 चांदी के सिक्के और 10 रक्तजिवन गोलियां मिल रही थी।"वंश हेड, वंश में कम से कम 2,000 लोग हैं जिनकी उम्र 6 से 20 वर्ष के बीच है। क्या वंश इतने ज्यादा वितरण को संभाल भी पाएगा?" पुराने नौकरों में से एक ने चिंतित होकर पूछा। वंश हेड देववीर दूर खड़े होकर वंश के लोगों को अपना कोटा इकट्ठा करते हुए देख रहे थे। उन्होंने शांति से कहा, “चिंता मत करो। कबीले की बचत ऐसे वितरण के अगले दस वर्षों को संभालने के लिए पर्याप्त है।
बूढ़ा नौकर थोड़ा चिंतित हुआ।
संत वंशों की आय आश्चर्यजनक थी, लेकिन उसके खर्चे भी उतने ही बड़े थे। अब, कबीला साधकों की एक नई पीढ़ी को तैयार करने की भरसक कोशिश कर रहा था। वे अगले दस वर्षों तक उनका हर प्रकार से पालन-पोषण कर सकते थे! वे किसी ऐसे तैयार करने की आशा में युवा पीढ़ी पर संसाधन बांट रहे थे जिसके पास संत बनने का मौका था।छाया झील अग्रज हवेली में।
विशंभर एक दर्जन लोगों को हवेली में वापस ले आया।"मास्टर।" नौकर बहुत आदरणीय थे।"वरुण कहाँ है?" विशंभर ने पूछा।नौकरों ने आदरपूर्वक उत्तर दिया, "छोटे मास्टर प्रशिक्षण मैदान पर हैं।"विशंभर ने भौंहें सिकोड़ लीं और आसमान की ओर देखा। सूरज पश्चिम में डूब रहा था और शाम के लगभग पाँच बज रहे थे। "वह इस समय भी प्रैक्टिस क्यों कर रहा है?
विशंभर प्रशिक्षण मैदान में कुछ लोगों को लेकर चला गया। उसने अस्पष्ट रूप से हवा में सेबर के चलाने से सीटी के बजने की आवाज सुनी। उसने अपना हाथ हिलाया और धीमी आवाज़ में आदेश दिया, "यहीं रुको।" इतना कहकर वह चुपचाप से करीब चला गया। उसने प्रशिक्षण मैदान के चारों ओर की खिड़कियों से देखा। उसने देखा कि सेबर की चमक के भीतर एक लड़के की धुंधली परछाई छिपी हुई है, जो पत्पर्ण सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा है।
"कियान।" विशंभर ने कुछ ही दूरी पर एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को इशारा किया। कियान वशिष्ठ - जो वरुण की सेवा करने वाला एक पुराना नौकर था, जल्दी से वहाँ चला गया।