Hunter - 2 in Hindi Moral Stories by Ram Make books and stories PDF | हंटर - 2

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हंटर - 2



छाया झील के पश्चिमी तट पर बने अग्रज हवेली के प्रशिक्षण मैदान में, निधी अपने तीरंदाजी कौशल कि प्रैक्टिस कर रही थी, जबकि वरुण एक कोने में अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा था ।

उसका सेबर आर्ट अलौकिक, विचित्र और अप्रत्याशित था। इसके अलावा, वह आर्ट बेहद तेज़ था। यह सबसे तेज़ सेबर आर्ट में से एक था जिसे इंसान सीख सकता था पत्पर्ण सेबर आर्ट ।

जब वो छह साल का था, तो परिवार ने उसका टेस्ट लिया था और उसमे पता चला कि वो तीव्र गति के सेबर आर्टस में सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली है। उसे तीव्र सेबरआर्टस की प्रैक्टिस करना बहुत पसंद था क्योंकि. यह तेज़ थी!

घर पर दो साल तक शुरुवाती सेबर आर्टस का अभ्यास करने के बाद, उसके पिता विशंभर अग्रज ने उसे आठ साल की उम्र में उज्जैन प्रांत के आठ प्रमुख Academy यों में से एक में भेज दिया। हालाँकि छाया झील Academy के डीन आचार्य सोमवर्ण साधारण व्यक्तित्व के इंसान थे, वह पूरे उज्जैन प्रांत में सेबर का उपयोग करने में सबसे तेज़ थे!

वरुण जब नौ वर्ष का था, तब उसने अपनी शुरुवाती सेबर आर्ट को परफेक्शन के लेवल तक विकसित कर लिया था। उसकी फाउंडेशन पक्की थी, फिर डीन ने उसे एक अच्छी सेबर आर्ट विंध्यवायु सेबर आर्ट सिखाई थी।

ग्यारह साल की उम्र में, उसने विंध्यवायु सेबर आर्ट को परफेक्शन के लेवल तक विकसित किया था। फिर डीन ने खुद ही उसे अपनी सर्वश्रेष्ठ सेबर आर्ट, पत्पर्ण सेबर आर्ट सिखाई।

तेरह साल की उम्र में, उसने पत्पर्ण सेबर आर्ट में महान महारत के स्तर को हासिल किया, और Academy के शिखर नदी समूह के सदस्यों में से एक बन गया। शिखर नदी समूह ने संपूर्ण छाया झील Academy के हजारों होनहार शिष्यों में से केवल सबसे उत्कृष्ट शिष्यों को ही स्वीकार किया था। अभीभी, शिखर नदी समूह में केवल 22 शिष्य थे।

अब- वर्तमान समय में

वह पन्द्रह वर्ष का हो गया था।

"दुर्भाग्य से, मेरी पत्पर्ण सेबर आर्ट अभी भी महान महारत के स्तर पर ही है। मैं इसे अभी तक पूरा नहीं कर पाया। वरुण थोड़ी देर तक रुका, उसने अपने हाथ में मौजूद सेबर की जांच की, फिर भौंहें चढ़ा लीं। मैं पत्पर्ण सेबर की गुप्त तकनीक का पता कैसे लगा सकता हूं और सेबर आर्ट के पहले प्रमुख मंडल एकता मंडल तक कैसे पहुंच सकता हूं?"

सभी कौशल, चाहे उनमें कुछ भी शामिल हो - सेबर, तलवार, भाले, आदि के प्रमुख मंडल थे।

पहला प्रमुख मंडल एकता मंडल था। यह किसी के शरीर, हृदय और कौशल को एकसाथ चलाने को कहा जाता था। जो उसे अकल्पनीय ताकत को प्रकट करने की अनुमति देता है।

दूसरे प्रमुख मंडल को ' बल' के नाम से जाना जाता था और दुनिया ऐसी ताकतों से भरी हुई थी! पहाड़ों में पर्वतीय शक्तियाँ थीं और पानी में जलीय शक्तियाँ थीं। सेबर आर्टस के उपयोग के लिए इंसानों को समान भौतिक, धर्तीयुक्त और तत्त्वसंपन्न शक्तियों की आवश्यकता होती है, जिससे कृपाण बल का निर्माण होता है। तलवार चलाने वालों के लिए तलवार बल था। यह सब एक उच्चतम मंडल को दर्शाता है।

फिर भी, वरुण इतने वर्षों के बाद भी नींव के स्तर पर बना रहा। बेशक, उसने अपनी नींव को आखिरी हद तक मजबूत कर लिया था। उसका सेबर आर्ट एकता मंडल तक पहुँचने से सिर्फ एक कदम दूर था।

लेकिन वो एक कदम. सबसे कठिन था!

यहां तक कि पूरे उज्जैन प्रांत में भी, बहुत कम लोग हैं जो एकता मंडल तक पहुंच सकते हैं। वरुण यह बात अच्छी तरह से जानता था। केवल एकता के मंडल तक पहुँचने से ही किसी को सच्चा Expert माना जाता था। अन्यथा, वे केवल औसत दर्जे के ही माने जायेंगे।

औसत दर्जे के लोग - भले ही उनके पास बहुत मात्रा में सर्वोत्कृष्ट ऊर्जा क्यों ना हो फिर भी वे अधिक ताकत और गति वाले निशानी पुतलों

से ज्यादा कुछ नहीं थे। जैसे ही वे किसी सच्चे Expert से भिड़ेंगे, वे मारे जायेंगे।

पत्पर्ण सेबर आर्ट के विवरण के अनुसार, इसे 81 चालों में विभाजित किया गया है। जब तक कोई व्यक्ति 81 चालों को परफेक्शन के लेवल में लाता है, तभी कोई स्वाभाविक रूप से गुप्त तकनीक तीहेरी ऋतुपर्ण को समझने में सक्षम होगा। यह सेबर आर्ट के पहले प्रमुख मंडल एकता मंडल तक पहुँचने के बराबर भी होगा। वरुण खो गया था क्योंकि पूरे मैनुअल में केवल एक छोटे पैराग्राफ मे एकता मंडल का वर्णन किया गया था।

कोई अन्य वर्णन नहीं था। यहाँ तक कि चालें भी दर्ज नहीं की गईं।

' स्वाभाविक रूप से गुप्त तकनीक को समझ पाना' इसका बहुत अस्पष्ट वर्णन था। उसके पत्पर्ण सेबर आर्ट ने दो वर्षों तक महान महारत पर अटका रहा; लेकिन, हर दिन लगन से प्रैक्टिस करने के बावजूद, वह ' स्वाभाविक रूप से' गुप्त तकनीक का पता लगाने में सक्षम क्यों नहीं हो पाया?

नश्वर मंडल की साधना को पांच चरणों में विभाजित किया गया है: ऊर्जा रचना, आंतरिक ऊर्जा सुधारणा, पवित्र तत्व, नश्वरता पातन, और अखंडता। नश्वरता पातन पड़ाव से अखंडता पड़ाव तक पहुंचने के लिए. किसी को अपने सेबर या तलवार कौशल को एकता मंडल में पहुंचना होगा। केवल जब शरीर, मन और तकनीक वास्तव में एकजुट होते हैं तो कोई नश्वरता पातन पड़ाव की सभी शक्तियों को एकीकृत कर सकता है, जिससे एक झटके में अखंडता पड़ाव तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है। एक बड़े वंश में, पर्याप्त गोलियाँ प्रदान की जाती हैं, इसलिए नश्वरता पातन पड़ाव तक पहुँचना मुश्किल नहीं है। लेकिन बहुत कम लोग ही अखंडता पड़ाव तक पहुंच पाते हैं!

जब वह छह वर्ष के था, तब उसने अपनी ऊर्जा रचना पड़ाव से शुरूवात की थी।

उसने नौ साल की उम्र में आंतरिक ऊर्जा सुधारना पड़ाव में और बारह साल की उम्र में पवित्रतत्व पड़ाव में कदम रखा। उसके अनुमान के मुताबिक, उसे जून के आसपास नश्वरता पातन के पड़ाव तक पहुंचने में सक्षम होना चाहिए। इस प्रकार की गति को संत वंशों के मुख्य शिष्यों के बीच साधारण माना जाता था। ईशान्वी बादल जैसी आलसी व्यक्ति भी बहुमूल्य गोलियों की भरपूर मात्रा में सेवन के कारण पंद्रह साल की उम्र में पवित्रतत्व के  पड़ाव तक पहुंच गई थी। उसकी साधना की गति काफी धीमी मानी गई।

नश्वर मंडल साधना के पांच मुख्य क्षेत्र थे: ऊर्जा रचना, आंतरिक ऊर्जा सुधारणा, पवित्र तत्व, नश्वरता पातन, और अखंडता। आगे संत मंडल था। संत मंडल और अखंडता पड़ाव के बीच का अंतर एक खाई की तरह था। संत Expert बनना बेहद कठिन था। पिछले सौ सालों में, उज्जैन प्रांत में केवल कुछ ही लोग संत Expert बन गए थे।

" मैंने अपनी मां की कब्र के सामने शपथ ली है कि मैं इस जीवन में संत Expert बनूंगा। मैं दानवों को मार डालूँगा और अपनी माँ का बदला लूँगा।" उसने प्रैक्टिस करना बंद कर दिया और अपने हाथ में सेबर को देखा। वह बचपन में नही जानता था, लेकिन अब उसे संत Expert बनने की कठिनाई का एहसास हुआ। हालाँकि, उसने हार मानने से इनकार कर दिया चाहे यह कितना भी कठिन क्यों न हो। मुझे जल्द सेबर आर्ट के एकता मंडल में महारत हासिल करनी है। भविष्य में, मुझे दूसरे मंडल, बल में महारत हासिल करने की आवश्यकता होगी। तभी मेरे संत बनने की कुछ उम्मीद होगी।

अचानक-

" वरुण।" एक गोलाकार आकृति प्रशिक्षण मैदान में चली गई।

वरुण घूम गया। " बाबा।"

उसके सामने मौजूद अधेड़ उम्र के व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान थी। ये उसके पिता विशंभर अग्रज थे। वह उज्जैन प्रांत की सबसे बड़ी सराय चलाते थे। उनका अग्रज परिवार का अगला मुखिया बनना भी तय था।

विशंभर अग्रज बेहद शक्तिशाली था। वह उन मुट्ठी भर लोगों में से एक थे जिन्हें संत मंडल के नीचे सबसे मजबूत माना जाता था, और उन्होंने सेबर आर्ट की भी प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, वह एक अखंडता पड़ाव के Expert थे। जिसमे सेबर आर्ट के सेबर बल मंडल प्राप्त किया था। लेकिन एक सैंतालीस साल के व्यक्ति के रूप में, उनके संत Expert बनने की संभावना बहुत कम हो गई थी।

" विशंभर चाचा।" निधी भी आगे बढ़ी।

“3 मार्च को सूर्यमहल की दानव-वध बैठक है, है ना? निधी एक निशानेबाज है, इसलिए Rising Sun Academy ने निश्चित रूप से तुम्हारे लिए एक Seat आरक्षित कर दी होगी।" जैसे ही विशंभर ने बात की, निधी ने खुशी से सिर हिलाया। विशंभर ने अपने बेटे की ओर देखा और पूछा, "वरुण, तुम्हारे बारे में क्या? छाया झील Academy के पास पवित्रतत्व पड़ाव के  शिष्यों के लिए केवल तीन Seat हैं। क्या तुम उसमे से एक को पाने के बारे में आश्वस्त हो?"

"मैं आश्वस्त नहीं हूं।" वरुण खुद को जानता था। उसने कहा, “Academy के पवित्रतत्व पड़ाव के शीर्ष दस शिष्यों के बीच ताकत का बहुत अंतर नहीं है। मुझे इसके लिए लड़ने की कुछ आशा है, लेकिन असफल होने की संभावना शून्य नहीं है। यदि मैं पत्पर्ण सेबर आर्ट की गुप्त तकनीक का पता लगा सका, तो मैं निश्चित रूप से आश्वस्त हो जाऊंगा। दुर्भाग्य से, मैं इसका पता नहीं लगा सका। बाबा, क्या आपके पास गुप्त तकनीक विकसित करने के लिए कोई ट्रिक हैं?"

“हाहा, तुम्हारे Academy ke डीन उज्जैन प्रांत में सबसे अच्छे तीव्र सेबर आर्टस के Expert है। वह तुम्हें सीखा सकते aहै कि क्या आवश्यक है।" विशंभर ने हंसते हुए कहा। "जहां तक गुप्त तकनीक की बात है, मुझे लगता है कि यह सिर्फ ज्यादा प्रैक्टिस करने के बारे में है। ज्यादा प्रैक्टिस से तुम्हे इसका पता चल सकता है।"

वरुण को असहाय महसूस हुआ, जब उसे पता चला की कोई ट्रिक नहीं थी।

“इस पर ज़ोर मत दो। उज्जैन प्रांत में तुम्हारी पीढ़ी के बीच, पवित्रतत्व मंडल में किसी ने भी गुप्त तकनीक का पता नहीं लगाया है।" विशंभर हँसे। “अग्रज परिवार में, मैं अपनी पीढ़ी का सबसे उत्कृष्ट सदस्य हूं; फिर भी, गुप्त तकनीक का पता लगाने में मुझे उन्नीस साल का समय लगा था।"

"हालांकि, कहानियों के अनुसार, सेन परिवार के मुखिया ने तो सिर्फ तेरह साल की उम्र में गुप्त तकनीक को समझ लिया था, जिससे उनका तलवार आर्ट एकता मंडल तक पहुंच गया था।" वरुण ने आह भरते हुए कहा।

“मुखिया सेन उज्जैन प्रांत के पिछले सौ वर्षों में एकमात्र व्यक्ति हैं जो विध्यांचल पहाड़ संप्रदाय का शिष्य बनने में कामयाब रहे। इसी वजह से सेन परिवार उज्जैन प्रांत के पांच प्रमुख संत वंशों का लीडर बन गया।” विशंभर ने कहा। “ज्यादा चिंतित मत हो. पांच सौ साल पहले हमारे अग्रज परिवार के कुलपति प्रवलराज अग्रज ने केवल अठारह वर्ष की उम्र में गुप्त तकनीक का पता लगाया था। हालाँकि, वे 80 साल की उम्र तक भी संत Expert  नहीं बन पाए? भले ही वह देर से सही पर, फिर भी वह संत Expert बन गए।"

वरुण स्पष्ट रूप से अपने परिवार का इतिहास जानता था।

जब वह छोटा था, तो उसकी माँ उसे संत Expert  के विकास के बारे में कहानियाँ सुनाती थी। वो अपने माता-पिता को और अधिक सुनाने के लिए परेशान किया करता था। बचपन में उसे पेंटिंग करने के अलावा कहानियां सुनना सबसे ज्यादा पसंद था।उसके माता-पिता ने इतिहास के प्रसिद्ध संत Expert के बारे में कई कहानियों की किताबें खरीदी थीं और उन्हें पढ़ने के लिए समय भी निकाला था।

"माँ, एक दिन, मैं भी एक संत Expert बन जाऊंगा।" वरुण ने बड़बड़ाते हुए कहा।

उस दोपहर, वरुण छाया झील Academy मे जा पहुंचा। ऐसा इसलिए था क्योंकि डीन व्यक्तिगत रूप से एक क्लास में सेबर आर्ट सिखा रहे थे। डीन के रूप में, उन्हें हर पाँच दिन में केवल एक बार पढ़ाने की जरूरत थी। सेबर आर्ट का दो घंटे का लेक्चर समाप्त हुआ।क्या सफलता पाने का अभी कोई रास्ता नहीं है?मैं वास्तव में नहीं जानता कि मेरा सेबर आर्ट एकता मंडल में कब पहुँचेंगा। वरुण Academy से होकर गुजरा। वह लगभग हर दिन पत्पर्ण सेबर आर्ट की गुप्त तकनीक के बारे में इस हद तक सोचता रहता था कि वो लगभग पागल हो जाता था।

जब वह एक खाली इलाके से गुजरा, तो उसने गुस्से में चिल्लाने की आवाज सुनी। उसने पलट कर देखा।लेक्चरर माली युवाओं के एक समूह पर भड़क उठे थे।

“ध्येय ऊंचा रखो; ऐसा न करने से केवल औसत दर्जे का परिणाम मिलेगा। क्या तुम समझ रहे हो?" लेक्चरर माली गुस्से से चिल्लाए। “मैं तुमको अच्छा से सीखने के लिए कह रहा हूं, बुरा नहीं। ऐसा करने से मामला और बिगड़ेगा! यदि तुम पवित्रतत्व पड़ाव तक नहीं पहुंचते हो, तो तुमलोग जीवन भर असफल रहोगे। यदि तुम पवित्रतत्व पड़ाव तक पहुँचते हो, तो 20 वर्ष की आयु में तुमको दानवों से लड़ने के लिए सेना में भरती किया जायेगा। यदि तुमने अभी पसीना नहीं बहाया, तो भविष्य में तुम्हारा खून बहेगा और तुम्हारी जान चली जाएगी। मुश्किल से सेना के आधे लोग लढाई में जीवित बचते है! क्या तुम लड़ाई के मैदान में मरने या गौरव के साथ लौटने की आशा करते हैं?”देखो, वह अग्रज परिवार की वरुण अग्रज है। वह तेरह साल की उम्र में पत्पर्ण सेबर आर्ट के महान महारत पड़ाव तक पहुंचने में कामयाब रहा और हमारे छाया झील अकादमी के शिखर नदी समूह में प्रवेश किया। खुद डीन उसे से पढ़ाते भी हैं! सेबर आर्ट में महारत हासिल करने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है, केवल कड़ी मेहनत है। मैंने सुना है कि वरुण अग्रज हर दिन घर पर प्रैक्टिस करने में कई घंटे बिताता है। आप लोगों के बारे में क्या? क्या आपने स्वयं पर विचार किया है?”

“ध्येय ऊंचा रखो; ऐसा न करने से केवल औसत दर्जे का परिणाम होगा। मैं चाहता हूं कि आप वरुण से सीखें, समझे?"लेक्चरर माली के चिल्लाने पर युवाओं के समूह ने सांस लेने की हिम्मत नहीं की।

जैसे ही वे दहाड़ कर रुके, लेक्चरर माली पास से गुजर रहे वरुण को देखकर मुस्कुराए। वरुण ने जवाब में मुस्कुराते हुए सिर हिलाया, लेकिन घर जाने से पहले उसकी आँखें अचानक चमक उठीं।अपनी हवेली में लौटने पर, वरुण तुरंत पढ़ने के लिए चला गया।

“ध्येय ऊंचा रखो; ऐसा न करने से केवल औसत दर्जे का परिणाम होगा। अगर मुझे सीखना है तो मुझे सर्वश्रेष्ठ से सीखना होगा!” वरुण ने मन ही मन बुदबुदाया। उसकी आँखें चमक उठीं और वह और अधिक उत्साहित हो गया। अगर मैं किसी से सीखना चाहता हूं, तो मुझे सबसे मजबूत संत मंडल Expert से सीखना चाहिए! इतिहास के सबसे मजबूत अस्तित्व से सीखना ही ऊंचा ध्येय रखना है!जो अजेय Expert इतिहास में अपना नाम छोड़ने में कामयाब रहे, उनमें से अधिकांश का निधन हो चुका था, लेकिन उनकी जीवनियाँ हजारों वर्षों के बाद भी प्रचलन में रहीं!उनकी जीवनियों में उनके विचार समाहित हैं।

वरुण ने अपना सिर उठाया और बुकशेल्फ़ पर रखी किताबों को देखा। जब मैं छोटा था तो बाबा और माँ ने मुझे कई संत मंडल Experts की कहानियाँ पढ़कर सुनाईं थी। उन्होंने मेरे लिए कई किताबें खरीदीं थी।उसने सहजता से एक किताब उठाई और उसे पलट दिया।

पुस्तक में संत Expert भुवन कुमार का वर्णन किया गया था। जो अपने समय में सबसे शक्तिशाली संत बने थे। अभिलेख के अनुसार, भुवन कुमार पहाड़ों में पले-बढ़े थे और उन्होंने कभी किसी प्रसिद्ध गुरु से कोई शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। उनके एकमात्र रिश्तेदार की मृत्यु उन्हें सेबर चित्र रुखमुद्रा सिखाने के बाद ही हो गई। वे प्रतिदिन आठ घंटे सेबर चलाने की प्रैक्टिस करते थे। उन्होंने बिना कोई अन्य तकनीक सीखे दस हजार बार अपनी सेबर को चलाने की प्रैक्टिस की। पहाड़ों की गहराइयों में अकेले रहते हुए यह सिलसिला बीस साल तक चलता रहा।

जब तक उन्होंने पहाड़ों को छोड़ा, तब तक वे बिना ज्यादा कुछ जाने बाहरी दुनिया में आ गये। पवित्रतत्व पड़ाव की ताकत के साथ उनका सेबर चलाना ही एक अखंडता पड़ाव Expert को मारने के लिए काफी था। उनकी सेबर आर्ट पहले ही अकल्पनीय स्तर पर पहुँच चुकी थी। एक बार जब इस बात की खबर फैली, तो प्रसिद्ध विध्यांचल पहाड़ ने तुरंत उसे भर्ती करने की पहल की और उसे अपना शिष्य बना लिया। इसके कारण वह संत Expert बनने के मार्ग पर चल पड़े।

किताब बहुत लंबी थी, और इसमें भुवन कुमार के संत Expert बनने के बाद की कई कहानियाँ भी दर्ज थीं। इन्ही कहानियों की वजह से भावी पीढ़ियों के मन मे उनके लिए आदर था।साधना के मामलों के संदर्भ में, बहुत कम उल्लेख किया गया था। एकमात्र उल्लेख था " प्रतिदिन आठ घंटे, बीस सालों तक दस हजार बार अपनी सेबर चलाना।"

वरुण के लिए यह इस किताब की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति थी।

यदि कोई Expert धीरे-धीरे सेबर आर्ट का उपयोग करता है, तो भी दस हजार बार सेबर चलाने के लिए दो घंटे पर्याप्त हैं। वरुण ने भौंहें चढ़ा दीं। फिर भी, उसने हर दिन आठ घंटे बिताए, जिसका मतलब है कि सेबर की हर चाल उसकी ताकत को दर्शाती है; सेबर चलाने से पहले वह अपना दिल और दिमाग इसमें लगाता है! एक के बाद एक. सेबर की हर चाल तयार होने से पहले शक्ति जमा करेगी। दस हजार बार ऐसा करने पर ही आठ घंटे लगेंगे।
अपना दिल और दिमाग इसमें लगाना? उसी चाल की प्रैक्टिस करनी है? सिर्फ संख्या के माध्यम से?
वरुण ने अपनी टेबल के सामने से एक ब्रश उठाया और एक और संत Expert की जीवनी पढ़ने से पहले उसे रिकॉर्ड कर लिया।

संत Expert की क्षमता हासिल करने के लिए समानताएं खोजने के लिए उसे कई संत Expert की जीवनियों से सीखने की ज़रूरत थी।

ध्येय ऊंचा रखो; ऐसा न करने से केवल औसत दर्जे का परिणाम होगा। अगर वह सीखना चाहता है. तो उसे सर्वश्रेष्ठ से सीखना होगा। उसे पूरे इतिहास के सभी अजेय संत Expert से सीखना पड़ेगा!

" कियान चाचा।" वरुण ने अचानक पुकारा।

"जी, छोटे मास्टर।" बाहर से आवाज आई।

“अपने साथ दो लोगों को ले जाओ और मेरे लिए बाज़ार से सभी संत Expert की जीवनियाँ खरीदो! वहाँ कुछ ताकतवर संत वंशो की शैक्षणिक सामग्रीयाँ भी होगी। मेरे लिए प्रत्येक में से एक खरीदो। जल्दी ले आइए!" वरुण ने कहा।

"ठीक है, मैं अभी ले आता हूं।" कियान चाचा ने तुरंत जवाब दिया।

वरुण ने आत्मकथाएँ ध्यान से पढ़ीं। इनमें से कई बड़े कुलों द्वारा प्रचार के लिए अपने किसी विशेष पूर्वज के बारे में लिखी हुई थी! उनमें से कुछ स्वतंत्र रूप से आम लोगों द्वारा लिखी गई थी, क्योंकि आम लोगों की बातों में वे संत Experts वास्तव में प्रसिद्ध थे। कुछ सबसे प्रसिद्ध संत Experts की जीवनियों के दर्जनों अलग आव्रतियां थी। कुछ संप्रदायों ने खुद की इच्छा से संत Experts के लिए जीवनियाँ लिखी थीं। इनमे सबसे अधिक बढ़ा चढ़ाकर बताने वाली आत्मकथाएँ ही थीं। इन्हें लिखने वाले संत Experts को आशा थी कि उनके वंशज उनके कार्यों को याद रखेंगे।

ये जीवनियाँ मुख्यतः कहानियाँ कह रही हैं। कभी-कभी, एक पुस्तक के केवल कुछ वाक्य ही मेरी साधना के लिए उपयोगी होते हैं। ये भी संभव है कि मुझे किसी एक जीवनी में कुछ भी उपयोगी न मिले। साथ ही, इनमें से कुछ कहानियाँ ज्यादा भरोसेमंद हैं और कुछ कम भरोसेमंद हैं। उन्हें उपयुक्त रूप से वर्गीकृत करने की आवश्यकता है।

आख़िरकार वरुण एक संत वंश से था। छाया झील Academy के लोगों के मार्गदर्शन की वजह से उसकी नींव बहुत मजबूत थी। उसकी सर्वोत्कृष्ठ सेबर आर्ट महान महारत के पड़ाव तक पहुंच चुकी थी, और वह एकता मंडल तक पहुंचने से केवल एक कदम दूर थे। ऐसी नींव के साथ, वह प्रत्येक जीवनी की महत्त्व को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम था।

एक जीवनी में, वरुण ने उत्तरी तलवार सम्राट की एक कहावत देखी जो उनके वंशजों के लिए निर्देशित थी। अपने दिल और दिमाग को तलवार के अभ्यास में न लगाना किसी को केवल तलवार का गुलाम बना देता है। केवल अपना दिल और दिमाग प्रशिक्षण में लगाकर ही आप तलवार के महारथी बन सकते हो।

जैसे ही उसने इन शब्दों को देखा, उसने सोचा। उत्तरी तलवार सम्राट ने जिस वंशज की ओर संकेत किया था वह एक अखंडता पड़ाव का Expert था। पुरानी तलवार तकनीक को कम से कम एकता मंडल तक पहुँचना चाहिए था। उस Expert ने अपने सामान्य प्रशिक्षण के दौरान अपना दिल और दिमाग तलवार की प्रैक्टिस में लगाया होगा, लेकिन  फिर भी उत्तरी तलवार सम्राट ने  कहा कि. स्पष्ट रूप से, उस अखंडता पड़ाव के Expert ने अपना दिल और दिमाग अपनी प्रैक्टिस में लगाने पर विचार नहीं किया।

वरुण ने संत Experts की जीवनियों को पढ़ना जारी रखा।कभी-कभी, किसी विशेष संत Experts के सिद्धांतो या कुछ कार्यों द्वारा छोड़ी गई कहावतों ने वरुण को अटकलें लगाने के लिए प्रेरित किया। सामान्य लोगों के लिए यह केवल एक कहानी थी।लेकिन प्रेरणा की तलाश कर रहे किसी व्यक्ति की नजर से, संत Expert की ताकत के पीछे के कारणों को देखा जा सकता है।

भरपेट खाने का एक कौशल; मारने का एक कौशल. आपको बस बिना दिखावे के एक कौशल की आवश्यकता है। ये एक जीवनी में दिया गया उदाहरण था। यह तीन हजार साल पहले एक शक्तिशाली Experts आसुरी सेबर संत वशिष्ठ वर्मा और उनके शिष्य के बीच हुई बातचीत से आया था। उज्जैन प्रांत में आसुरी सेबर संत वशिष्ठ वर्मा की कहानीयों की कुल पंद्रह आवृत्तियां बेची गई थी।
उनमें " भरपेट खाने के एक कौशल (Skill) " के समान ही बाते थीं। "मारने का एक कौशल. आपको बस बिना दिखावे के एक कौशल की जरूरत है।” वरुण ने भी इसे दर्ज किया।जीवनियों के अलावा, उसने प्रसिद्ध संत वंशों की पारिवारिक शिक्षाओं को भी महत्व दिया।पारिवारिक शिक्षाएँ संत Experts के द्वारा पीछे छोड़ दी गईं थी। आम तौर पर कहें तो, संत Experts का मानना था कि वे बेहद महत्वपूर्ण मामले थे।
जितना अधिक उसने रिकार्ड किया, वह उतना ही ज्यादा शॉक में चला गया।

ध्येय ऊँचा रखो; ऐसा न करने से केवल औसत दर्जे के परिणाम ही प्राप्त होंगे। इतिहास के सबसे शक्तिशाली संत Experts से सीखना सच में अच्छा है! हालाँकि, जीवनियाँ केवल प्रेरणा की सीढ़ियां मात्र हैं। मजबूत नींव के बिना, किसका भी भटकना बहुत आसान है। वरुण को इसका एहसास हुआ क्योंकि उसने देखा कि ज्यादातर वंशों की पारिवारिक शिक्षाएँ सीखने वाले को साधना की नींव पर जोर देने को बताती हैं।

परिवार के सभी सदस्यों को Academy में प्रवेश करना होगा तो साधना की पूरी शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती थी।ऐसा इसलिए था क्योंकि Academy की स्थापना दुनिया के सबसे पुराने संप्रदाय विध्यांचल पहाड़ संप्रदाय के द्वारा की गई थी। वे महान गुप्त साम्राज्य के हर बड़े शहर में अपनी शाखा खोल चुके थे, और सभी Academy की शिक्षा प्रणाली विध्यांचल पहाड़ द्वारा स्थापित की गई थी। केवल Academy में साधना करने से ही कोई मजबूत नींव (साधना की फाउंडेशन) को पा सकता था।

बेशक, इसने उसे सिर्फ बेसिक बातें सिखाईं। उसका सेबर आर्ट एकता मंडल तक पहुँचने से केवल एक कदम दूर थीं। Academy ने उसे सात सालो की साधना में वह सब कुछ सिखाया गया था, जिसकी उसे आवश्यकता थी। अब उसे चीज़ों का स्वयं पता लगाने की ज़रूरत थी।' मेरी नींव ही पर्याप्त मजबूत है। अब मुझे सफलता हासिल करने के लिए आखिरी कदम की आवश्यकता है। आज मैंने जो कुछ भी रिकॉर्ड किया है, उसमें से ज्यादातर ने मुझे प्रेरित किया है। हालाँकि, कोई जल्दी नहीं है। इसे पक्का करने से पहले मैं इन पुस्तकों को पूरा पढ़ूंगा। इससे पहले कि मैं उन्हें भरोसेमंद मानूं, मुझे कम से कम तीन संत Experts की जरूरत है जिन्होंने समान साधना सिद्धांतों को अपनाया हो।'

दिन-ब-दिन, वरुण ने लगातार बढ़ती मात्रा में ज्ञान इकट्ठा और पक्का किया। उसने छाया झील Academy के "कठोर कानून" को भी शामिल किया - वे वो साधना के नियम थे जिन्हें विध्यांचल पहाड संप्रदाय ने शिला पर मुद्रित किया था।
दोनों को मिलाने से वरुण को साधना के बारे में और भी अधिक समझने में मदद मिली।"यह पूरा हो गया।"शाम को, वरुण ने अपनी किताब देखी और मुस्कुराया। "ये पाँच दिन मेरी साधना के पिछले पाँच सालों से भी अधिक महत्वपूर्ण रहे हैं। वरुण ने उत्साह से किताब को देखा। अब उसकी साधना की समझ और भी गहरी हो गई थी।

साधना करने के पहले नियम: हर किसी की नींव के अत्यधिक महत्व पर जोर दिया। ये एक घर की नींव के समान था। Academy में प्रवेश करना और पूरे साधना प्रणाली से गुजरना सबसे अच्छा विकल्प था।
साधना करने के दूसरे नियम: में वारंवारीता ( चीजों को दोहराना) पर बल दिया गया। चाहे कोई भीतर से कितनी भी कल्पना कर ले, उसकी तुलना दस हजार बार प्रैक्टिस करने से नहीं की जा सकती! किसी के सेबर को दस हजार बार चलाने और संगीन आया बिंदु को प्रतिदिन दोहराने जैसी चीजों का उल्लेख बारह संत Experts द्वारा किया गया था।