Run Or Hide? - 3 in Hindi Thriller by silent script books and stories PDF | Run Or Hide? - 3

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Run Or Hide? - 3

कुछ समय बाद, सबसे पहले कबीर की आँखें खुलीं।
‎"आह... मेरा सिर... हम यहाँ कैसे?" वह लड़खड़ाते हुए खड़ा हुआ।


‎धीरे-धीरे बाकी बच्चे भी होश में आने लगे। समीर,कांपने लगा। "मुझे घर जाना है... कबीर, यह कौन सी जगह है?"

‎तभी रिद्धि, ने डर के मारे चिल्लाते हुए कहा, "हे भगवान! कहीं यह कोई बुरा सपना तो नहीं? हाँ, पक्का! मैं सपना देख रही हूँ।" ऐसा कहते हुए उसने अपने गाल पर ज़ोर से चिमटी काटी और फिर अंजलि  को भी। "आह! दर्द हुआ... इसका मतलब... यह सच है?"


‎अंजलि, ने उसे टोकते हुए कहा, "रिद्धि, सीरियस हो जाओ! यह कोई सपना नहीं है। हमारे फोन में सिग्नल भी नहीं हैं।"


‎वे आपस में उलझ ही रहे थे कि तभी जंगल की गहराइयों से एक आवाज़ आई। सर्र... सर्र... जैसे कोई भारी चीज़ पत्तियों पर घिसट रही हो।

‎सब एकदम खामोश हो गए। पेड़ों के बीच से एक साया उभरा। वह कोई आम इंसान नहीं था। 7 फुट लंबा शरीर और चेहरे पर भयानक—खूंखार कुत्ते का मुखौटा।


‎मुखौटे के पीछे से दो जलती हुई आँखें उन बच्चों को ऐसे देख रही थीं जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता है। बच्चे पत्थर बन चुके थे। उस राक्षस की भारी और गूंजती हुई आवाज़ आई, जो एक डरावनी हँसी में बदल गई।


‎उसने उनकी तरफ कदम बढ़ाते हुए, कहा:
‎"तो बताओ... खेल शुरू करें? 

‎उस साये के मुँह से निकले शब्द किसी ठंडी बिजली की तरह बच्चों के शरीर में दौड़ गए— "खेल शुरू करें?
‎सन्नाटा इतना गहरा था कि बच्चों को अपनी ही धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं।


रिद्धि ने कांपती आवाज़ में धीरे से पूछा, "खे... खेल? कैसा खेल?"


‎वह खौफनाक आकृति, जिसके चेहरे पर वह अजीब सा कुत्ते वाला मुखौटा था, धीरे-धीरे रिद्धि की ओर झुकी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसने एक डरावनी मुस्कान के साथ कहा, "वही पुराना खेल जो तुम सबको पसंद है... लुका-छिपी! नन्हीं गुड़िया, क्या तुम छिपने में माहिर हो?"



‎कबीर ने अपनी हिम्मत बटोरी और आगे बढ़कर पूछा, "आप कौन हैं? हमें यहाँ क्यों लाए हैं? और यह सब... यह खेल क्यों?"


‎राक्षस ने कहा "अरे, अभी तो मैंने सिर्फ खेल का नाम बताया है बेटा, नियम तो अभी बाकी हैं!



‎वह एक पत्थर पर बैठ गया और अपनी उंगलियों से हवा में कुछ निशान बनाने लगा। "नियम सीधा है— तुम सबको छिपना है। मैं ढूँढूँगा। जो सबसे पहले मिला, उसे मार दिया जाएगा। इस खेल के तीन राउंड होंगे... और अंत में, सिर्फ दो ही खुशनसीब होंगे जो यहाँ से ज़िंदा बाहर जा पाएंगे।"

‎जैसे ही उस राक्षस ने खेल और मौत के नियमों की बात की, जंगल का सन्नाटा बच्चों की चीखों और सिसकियों से गूँज उठा। सबकी आँखों में मौत का खौफ साफ दिख रहा था।


‎कांपते हुए बच्चों ने गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया, "प्लीज हमें जाने दीजिए! हमने आपका क्या बिगाड़ा है? हमें बहुत डर लग रहा है, हमें घर जाना है!"


‎तभी अंजलि ने रोते हुए चिल्लाकर कहा, "नहीं! हम ऐसा कोई खौफनाक खेल नहीं खेलने वाले! तुम हमें मजबूर नहीं कर सकते!"


‎यह सुनते ही उस राक्षस का चेहरा उसकी तरफ मुड़ा। उसकी आवाज़ पहले से और भी गहरी और ठंडी हो गई थी, "अगर किसी ने भी खेलने से मना किया, तो मैं यहीं और इसी वक्त तुम सबको खत्म कर दूँगा। लेकिन अगर खेलते हो, तो तुम्हारे पास ज़िंदा रहने का एक मौका ज़रूर है।"



‎अगले ही पल, उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी उँगलियों पर गिनती शुरू की।
‎तुम्हारे पास छिपने के लिए सिर्फ 7 मिनट हैं। जिसे छिपना है, छिप जाओ... क्योंकि 7 मिनट बाद जो भी मेरी नज़रों के सामने सबसे पहले आया, उसे मैं अपने हाथों से मार दूँगा! हाहाहाहा!,
‎जैसे ही विक्रम ने आँखें बंद कर गिनती शुरू की, जंगल की हवा भारी हो गई।
‎"सात मिनट..." उसने फुसफुसाते हुए कहा, "एक... दो...
‎"राक्षस के गिनती शुरू करते ही बच्चों के बीच अफरा-तफरी मच गई। समीर ने विकी उसके छोटे भाई
का हाथ झटके से पकड़ा, "विकी, इधर! भागो!"

‎समीर ने विक्की का हाथ पागलों की तरह कसकर पकड़ा हुआ वे दोनों घने, कालिख भरे जंगल के बीच से भाग रहे थे। सूखी टहनियाँ उनके पैरों के नीचे टूट रही थीं और झाड़ियाँ उनके कपड़ों को फाड़ रही थीं, लेकिन रुकने का सवाल ही नहीं था। पीछे से आ रही वह भयानक गुर्राहट अब बहुत नज़दीक लग रही थी।
‎"समीर, मैं... मैं और नहीं भाग सकता!" विक्की ने हाँफते हुए कहा, उसका गला सूख चुका था।

‎"बस थोड़ा और, विक्की! बस थोड़ा और!" समीर की आवाज़ में मौत का साफ़ डर झलक रहा था, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी जिद्द थी।